Skip to main content

सुरेन्द्र पाण्डेः नेपाली राजनीतिक दलों को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को समझना आवश्यक है

नेकपा एमाले के नेता सुरेन्द्र पाण्डे ने कहा है कि नेपाल के राजनीतिक दलों को अपनी वर्गीय आधारों का पुनर्मूल्यांकन करना जरूरी है। पाण्डे ने दावा किया है कि ८३ प्रतिशत मध्यम वर्ग को अनदेखा करके कोई भी पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर सकती। उन्होंने आगामी राष्ट्रीयता की परिभाषा ‘आर्थिक राष्ट्रीयता’ होनी चाहिए और पुरानी भूमिगतकालीन मानसिकता को त्यागने की भी चेतावनी दी। १४ वैशाख, काठमांडू।

नेकपा एमाले के नेता सुरेन्द्र पाण्डे ने बताया कि नेपाल की बदलती सामाजिक संरचना और अंतरराष्ट्रीय परिवेश को समझे बिना राजनीति सफल नहीं हो सकती। मदन भण्डारी फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘मदन भण्डारी, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण’ विषयक विचार गोष्ठी में उन्होंने पुरानी शैली की राजनीति वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ होने की बात कही।

पाण्डे ने जोर देते हुए कहा कि नेपाल के राजनीतिक दलों को अपनी वर्गीय आधार को पुनः देखना होगा। उन्होंने कहा– केवल १७ प्रतिशत जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए ८३ प्रतिशत प्रमुख मध्यम वर्ग की अनदेखी करते हुए कोई भी पार्टी अब बहुमत नहीं ला सकती। ‘२००६ साल में पार्टी स्थापना के समय ९० प्रतिशत से अधिक लोग गरीब थे, लेकिन वर्तमान स्थिति अलग है। वर्तमान में १७.४ प्रतिशत ही गरीबी रेखा के नीचे हैं जबकि ८३ प्रतिशत जनसंख्या मध्यम वर्ग में है। क्या हम केवल किताबों और यांत्रिक आधारों से समाधान खोजेंगे या वास्तविक जीवन से? जीवन ही मुख्य है, किताब नहीं,’ उन्होंने कहा।

जनता के बहुदलीय जनवाद (जबज) की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए पाण्डे ने याद दिलाया कि मदन भण्डारी ने हमेशा क्लासिकल सिद्धांतों के बजाय जीवंत वास्तविकता को महत्वपूर्ण माना। उन्होंने कहा कि दलों को पुरानी भूमिगतकालीन मानसिकता और नियंत्रणप्रधान शैली को छोड़ना होगा और चेतावनी दी कि पुरानी सोच में बदलाव नहीं हुआ तो नई पीढ़ी राजनीति में नहीं आ सकेगी। ‘मदन भण्डारी ने विश्व भर में कम्युनिस्ट आंदोलनों के संरक्षणात्मक अवस्था में रहते हुए नेपाली क्रांति को जीवंत तथ्यों के आधार पर नई ऊँचाई दी,’ उन्होंने बताया।

नेता पाण्डे ने कहा कि आगामी राष्ट्रीयता अब ‘आर्थिक राष्ट्रीयता’ होनी चाहिए।