
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इरान के संवर्धित युरेनियम को सैन्य ऑपरेशन के माध्यम से कब्जा करने को अपनी मुख्य रणनीतिक प्राथमिकता बना लिया है। इरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित युरेनियम मौजूद है, जिसे 90 प्रतिशत तक बढ़ाकर परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी गुप्त भूमिगत परमाणु केंद्र पर हमला करके अमेरिकी सेना द्वारा इस संवर्धित युरेनियम को हासिल करना शुरू में असंभव लग सकता है, लेकिन हाल ही में आई रिपोर्टों में ट्रम्प ने इसे अपनी प्राथमिकता बताया है।
इरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए ट्रम्प इस भंडार को जब्त करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि सैन्य विशेषज्ञ और पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी इसे न केवल कठिन बल्कि अत्यंत जोखिमपूर्ण परायण मानते हैं। इस मिशन के लिए अमेरिकी सेना को बड़ी संख्या में स्थल सेना तैनात करनी होगी और पूरा ऑपरेशन कुछ दिनों तक नहीं बल्कि हफ्तों तक चल सकता है। रणनीतिक विकल्पों की खोज के तहत ट्रम्प प्रशासन ने इरान पर दबाव बनाने के लिए विभिन्न सैन्य विकल्प खुले रखे हैं।
वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, युद्ध की शुरुआत में इरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित युरेनियम था, जिसे तत्काल 90 प्रतिशत तक पहुंचाकर परमाणु हथियारों के स्तर पर ले जाया जा सकता है। इसके अलावा, इरान के पास लगभग 1,000 किलोग्राम 20 प्रतिशत संवर्धित युरेनियम और 8,500 किलोग्राम 3.6 प्रतिशत संवर्धित युरेनियम भी है। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस संबंध में कोई निश्चित निर्णय लेने से इनकार किया है।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका अपने 82वीं वायुसेना डिवीज़न का उपयोग करके इस्फहान और नतान्ज के आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षित कर सकता है। इसके बाद विशेष रूप से प्रशिक्षित सैन्य बल भूमिगत सुरंगों में जाकर युरेनियम को निकालने का प्रयास करेंगे। युरेनियम आमतौर पर गैस के रूप में बड़े धातु कंटेनरों में संग्रहीत रहता है, लेकिन सुरंगों में पहुँचने और फोहड़ हटाने के लिए भारी उपकरणों की आवश्यकता पड़ेगी। इस प्रक्रिया में अमेरिकी सेना को लगातार गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।





