राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल पर दबाव, सरकार द्वारा अध्यादेश सिफारिश से उत्पन्न स्थिति

सरकार द्वारा संसद की अवहेलना करते हुए ५ अध्यादेशों की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल संवैधानिक परिषद संबंधी अध्यादेश को लेकर दबाव में आ गए हैं। राष्ट्रपति पौडेल ने पहले संवैधानिक परिषद विधेयक को वापस भेजा था, जिसमें बहुमत निर्णय के प्रावधान संवैधानिक मान्यता के विरुद्ध थे। संवैधानिक परिषद संबंधी अध्यादेश में ३ सदस्यों द्वारा निर्णय लेने की व्यवस्था की गई है, जिसे राष्ट्रपति संवैधानिक एवं कानूनी परामर्श के बाद अनुमोदित या रोका जा सकेगा। १६ वैशाख, काठमाडौं।
सरकार द्वारा संसद को नजरअंदाज करते हुए एक साथ ५ अध्यादेशों की सिफारिश करने के बाद राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल पर दबाव बढ़ा है। एक ओर विपक्षी दल संसद की अवहेलना कर अध्यादेश लाए जाने पर राष्ट्रपति का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, संसद ने पहले ही संवैधानिक परिषद संबंधी विधेयक पारित कर राष्ट्रपति को भेजा था, जिसे राष्ट्रपति पौडेल ने वापस कर दिया था, और अब उसी विधेयक को अध्यादेश के रूप में जारी करने की बाध्यता का सामना करना पड़ रहा है।
सिफारिश किए गए अध्यादेशों का अध्ययन राष्ट्रपति कर रहे हैं। अध्यादेश के विषय में राष्ट्रपति कार्यालय और सरकार ने आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी है। लेकिन सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति सबसे अधिक संवैधानिक परिषद संबंधी अध्यादेश को लेकर दबाव महसूस कर रहे हैं। राष्ट्रपति कार्यालय के एक स्रोत ने कहा, “जिस विषय पर राष्ट्रपति ने पहले सवाल उठाकर विधेयक वापस किया था, सरकार ने वही विषय अध्यादेश लेकर आकर राष्ट्रपति को नैतिक संकट में डाल दिया है।”





