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मनास्लु और ल्होत्से पर्वतारोহণ के ७० वर्ष पूरे, विशेष कार्यक्रम का आयोजन होगा

विश्व पर्वतारोहण इतिहास के दो महत्वपूर्ण शिखर मनास्लु और ल्होत्से के प्रथम सफल आरोहण की ७०वीं वर्षगांठ पूरी हो गई है। नेपाल वर्ष २०२६ में ‘‘प्लैटिनम जुबिली’’ के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड और नेपाल पर्वतारोहण संघ ने संयुक्त रूप से इस कार्यक्रम के संचालन की जानकारी दी है। १६ वैशाख, काठमांडू।

इस अवसर पर नेपाल वर्ष २०२६ भर ‘‘प्लैटिनम जुबिली’’ कार्यक्रम के साथ समारोह मनाने की योजना बना रहा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड और नेपाल पर्वतारोहण संघ द्वारा आयोजित ये कार्यक्रम न केवल इस ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति करने के लिए हैं, बल्कि नेपाल को विश्व पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने में भी सहायक होंगे। पत्रकार सम्मेलन में स्विस दूतावास के मैक्सिमिलियन रुर्ज़मैन और जापान दूतावास के पुरव कायस्थ सहित कई कूटनीतिक प्रतिनिधि मौजूद थे।

सन् १९५६ में मनास्लु और ल्होत्से दोनों पर्वतों का प्रथम सफल आरोहण किया गया था। मनास्लु पर्वत का सफल आरोहण ९ मई १९५६ को जापानी अभियान दल और नेपाली पर्वतारोही उर्केन छिरिंग शेर्पा द्वारा किया गया था, जबकि ल्होत्से का प्रथम आरोहण स्विस पर्वतारोही अर्नस्ट राइस और फ्रिट्ज़ लुक्सिंगर ने किया था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि का सम्मान करते हुए पहले आरोहियों की स्मृति में तीन प्रतिमाएँ बनाकर अनावरण किया जाएगा। नेपाल पर्वतारोहण संघ के दूसरे उपाध्यक्ष बोधराज भंडारी ने बताया कि ‘‘प्लैटिनम जुबिली’’ के अवसर पर वरिष्ठ पर्वतारोही और उनके परिवारों को विशेष सम्मान दिया जाएगा।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के कार्यवाहक निदेशक सुनील शर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम पर्यटन को बढ़ावा देने से सीधे जुड़ा है। चुमनुब्री गाउँपालिका के अध्यक्ष निमा लामा ने मनास्लु पर्वत के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि अब तक तीन हजार से अधिक पर्वतारोही इस शिखर पर चढ़ चुके हैं। नेपाल पर्वतारोहण संघ के अध्यक्ष फुर्गेल्जे शेर्पा ने ‘‘प्लैटिनम जुबिली’’ को न केवल नेपाल के लिए बल्कि विश्व पर्वतारोहण समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। इस प्लैटिनम जुबिली से नेपाल को विश्व पर्वतारोहण और ट्रेकिंग गंतव्य के रूप में और मजबूत बनाने की उम्मीद है।