सरकार ने सभी राजनीतिक नियुक्तियों को रद्द करने के लिए अध्यादेश राष्ट्रपति के समक्ष सिफारिश की

सरकार ने राजनीतिक प्रकृति की सभी नियुक्तियों को रद्द करने की व्यवस्था वाला अध्यादेश राष्ट्रपति के समक्ष सिफारिश किया है। यह अध्यादेश सार्वजनिक निकायों में नियुक्ति को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक बनाने तथा दलगत राजनीतीकरण को समाप्त करने का उद्देश्य रखता है। साथ ही, सहकारी अधिनियम, विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान और 20 अन्य अधिनियमों में संशोधन करने वाले अध्यादेश भी सिफारिश किए गए हैं। 16 वैशाख, Kathmandu।
सरकार ने सार्वजनिक पदाधिकारियों की पदमुक्ति से संबंधित विशेष प्रावधान रखने वाला अध्यादेश लाने का निर्णय कर राष्ट्रपति के समक्ष सिफारिश किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय से भेजे गए नोट में उल्लेख है, ‘यह अध्यादेश सार्वजनिक निकायों में राजनीतिक रूप से नियुक्त पदाधिकारियों को पदमुक्त करने के उद्देश्य से लाया गया है।’
सिफारिश किए गए अध्यादेश सार्वजनिक निकायों में नियुक्ति को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक बनाएंगे, दलगत राजनीतीकरण समाप्त करेंगे, सार्वजनिक निर्माण में तेजी लाएंगे, सहकारी के छोटे बचतकर्ताओं की धनराशि वापस दिलाएंगे तथा भूमि, मालपोत और नापी सहित सेवाओं को प्रभावकारी बनाएंगे।
संवैधानिक परिषद (कार्य, कर्तव्य, अधिकार और कार्यविधि) सम्बन्धी अधिनियम, २०६६ में संशोधन करने वाला अध्यादेश भी सिफारिश किया गया है। यह सहकारी संस्थाओं के नियमन, संचालन के लिए अनिवार्य परमिट व्यवस्था और समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं के सदस्यों को तत्क्षण बचत की राशि लौटाने हेतु ‘चक्रय राहत कोष’ की स्थापना का प्रावधान करता है।




