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सहकारी ऐन २०७४ के तहत सदस्यता अवधि दो वर्ष तक बढ़ाई गई

सहकारी ऐन २०७४ के अनुसार एक वर्ष में केवल एक संस्थान में सदस्यता रखने का प्रावधान अब दो वर्ष तक बढ़ा दिया गया है। सहकारी क्षेत्र में दोहरी सदस्यता और संचालक पद की समस्या अभी भी बनी हुई है, और ऐन का पूर्ण रूप से कार्यान्वयन नहीं हो पाया है। सरकार ने सहकारी अध्यादेश २०८३ के माध्यम से दोहरी सदस्यता की अवधि दो वर्ष कर दी है, लेकिन दोहरी पद की कार्रवाई के बारे में स्पष्टता उपलब्ध नहीं है। २४ वैशाख, काठमांडू। सहकारी संस्थाओं के सदस्य अब भी दो वर्ष तक कई संस्थाओं की सदस्यता रख सकते हैं। सहकारी ऐन २०७४ लागू होने पर सदस्यता को एक वर्ष के भीतर एक संस्थान तक सीमित करने का नियम था, जिसे अब अतिरिक्त दो वर्ष की अवधि दी गई है। सहकारी ऐन २०७४ लागू होने के समय एक व्यक्ति कई सहकारी संस्थाओं का सदस्य हो सकता था, किंतु उसे नियंत्रण में रखने के लिए केवल एक संस्थान का सदस्य बने रहने की व्यवस्था थी। इसके लिए २०७४ कार्तिक में लागू हुए सहकारी ऐन ने एक वर्ष की अवधि दी थी। लेकिन ऐन लागू होने के लगभग आठ वर्षों बाद, पुनः बहु संस्थाओं में सदस्यता रखने वाले व्यक्तियों को एक संस्थान में ही सदस्यता रखने के लिए दो वर्ष की अवधि दी गई है।

सहकारी ऐन के प्रभावी कार्यान्वयन न होने के कारण सहकारी क्षेत्र में अनेक समस्याएं उपस्थित हैं, ऐसा सहकारी कार्यकर्ता बताते हैं। ऐन में एक से अधिक संस्थाओं में सदस्य तथा संचालक नहीं होने देने का प्रावधान है, परन्तु इसका सही कार्यान्वयन नहीं हो पाया है। ‘ऐन लागू हुए लगभग आठ वर्ष हो गए हैं,’ उन्होंने कहा, ‘फिर भी बहु संस्थाओं में सदस्यता और दोहरी संचालक पद की स्थिति बनी हुई है।’ सहकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐन को केवल कागजी दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने के कारण समस्या जटिल हुई है। ऐन के सबसे सामान्य प्रावधान भी यदि लागू नहीं किए गए तो सहकारी संस्थाओं में सुशासन की कमी होना स्वाभाविक है। ऐन लागू होने पर एक वर्ष की अवधि दी गई थी, जबकि सरकार द्वारा लाए गए सहकारी ऐन संशोधन अध्यादेश २०८३ में इसे दो वर्ष कर दिया गया है। सरकार द्वारा दो वर्ष की गई यह व्यवस्था केवल बहु संस्थाओं में एक ही व्यक्ति की सदस्यता पर लागू होती है। दोहरी पद के संदर्भ में अध्यादेश में कोई स्पष्टता प्रदान नहीं की गई है।