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राप्रपा संसदीय दल के नेता ज्ञानेन्द्र शाही का प्रधानन्यायाधीश सिफारिश पर असंतोष

राप्रपा संसदीय दल के नेता ज्ञानेन्द्र शाही ने संवैधानिक परिषद की बैठक द्वारा प्रधानन्यायाधीश मनोजकुमार शर्मा का नाम सिफारिश किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया है। शाही ने कहा है कि यदि न्यायपालिका को कार्यपालिका के अधीन किया गया तो शक्ति संतुलन बिगड़ेगा और न्याय निष्पक्ष नहीं रहेगा। उन्होंने परंपरा तोड़कर की गई सिफारिश से नागरिक अधिकार कमजोर होंगे और लोकतांत्रिक मूल्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे, इसकी चेतावनी दी है। २४ वैशाख, काठमांडू।

शाही ने गुरुवार शाम सामाजिक मीडिया के माध्यम से संवैधानिक परिषद द्वारा भावी प्रधानन्यायाधीश के रूप में मनोजकुमार शर्मा के नाम की सिफारिश पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा, ‘कानून के शासन में कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका एक-दूसरे के पूरक होते हुए भी स्वतंत्र और संतुलित होने चाहिए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यदि न्यायपालिका कार्यपालिका के अधीन आ गई तो शक्ति संतुलन टूट जाएगा, न्याय निष्पक्ष नहीं रह पाएगा और भले ही यह अभी सामान्य दिखे, लेकिन समय के साथ इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।’

शाही ने परंपरा के विरुद्ध की गई सिफारिश से नागरिक अधिकारों के कमजोर होने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘यदि ऐसा हालात बनती है, तो लोकतांत्रिक मूल्य, मान्यताएँ और नागरिक अधिकार गंभीर रूप से कमजोर होंगे।’