
राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी ने अपने पहले महाधिवेशन को केंद्र में रखते हुए जेठ माह में दो चरणों में वडा और पालिका अधिवेशन आयोजित करने का निर्णय लिया है। विधान के अनुसार केन्द्रीय समिति का आकार १२९ सदस्यों का होगा और ३३ प्रतिशत महिला प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से शामिल किए जाएंगे। महाधिवेशन के माध्यम से केन्द्रीय, प्रदेश, जिला, निर्वाचन क्षेत्र, पालिका और वडा के छह स्तरों पर निर्वाचित समितियाँ गठित करने की तैयारी चल रही है। २७ वैशाख, काठमांडू। राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) अपने पहले महाधिवेशन पर केंद्रित है। फागुन में होने वाला महाधिवेशन चुनाव के कारण स्थगित हो गया था, जिसके बाद पार्टी ने अब नई तिथि घोषित कर संरचना परिचालन कर रही है। वडा और पालिका अधिवेशन दो चरणों में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। महाधिवेशन केंद्रित होकर समिति गठन नहीं हुए वडाओं का भेला जेठ २ को बुलाया गया है। पार्टी प्रवक्ता मनिष झाकाक के अनुसार, वैशाख २० से पहले समिति गठित हुए वडाओं का अधिवेशन जेठ ३ को तय किया गया है। सचिवालय की बैठक में निर्णय लिया गया कि वैशाख २५ से पहले गठित पालिकाओं का अधिवेशन जेठ १० को होगा। जेठ ३ से पहले गठित बाकी वडा समितियों को उसी माह के १६ तक वडा अधिवेशन करना होगा। जेठ १० से पहले गठित बाकी पालिकाओं के अधिवेशन जेठ १७ को निर्धारित किए गए हैं। जेठ २३ और २४ को जिला अधिवेशन होने हैं, लेकिन प्रदेश और केन्द्रीय महाधिवेशन की तारीख अभी तय नहीं हुई है। विधान के तहत महाधिवेशन के लिए कम से कम छह महीने का समय देना आवश्यक है। निर्वाचन समिति केन्द्रीय समिति को महाधिवेशन के लिए सिफारिश करने के बाद ही केन्द्रीय समिति तारीख तय कर सकती है। नेतागण इस महाधिवेशन को भदौ या असोज महीने में कराने की तैयारी कर रहे हैं। चुनाव के छठे महीने के बाद महाधिवेशन करने का निर्णय सौराहा की विस्तारित बैठक में लिया गया था। इस निर्णय के अनुसार भदौ में पहला महाधिवेशन होगा। वडा अधिवेशन शुरू होने के बाद केन्द्रीय महाधिवेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। चुनाव से पहले वडा अधिवेशन शुरू हो गया था, लेकिन चुनाव ने कार्यतालिका को प्रभावित किया था। निर्वाचन आयोग के अनुसार चुनाव से पहले ४५२ वडाओं और ६२ पालिकाओं के अधिवेशन हो चुके थे। चुनाव के बाद २०० से अधिक वडा अधिवेशन जारी हैं, आयोग के सचिव भूमिनन्द बराल ने जानकारी दी। उनके अनुसार वडा स्तर के अधिवेशन तेजी से हो रहे हैं और अगले तीन सप्ताह में इसे पूरा करने का लक्ष्य है। बारा जिले को छोड़कर अन्य जिलों में अधिवेशन जारी हैं। उच्च स्तर के अधिवेशन के लिए निचले स्तर के अधिवेशन संपन्न होना आवश्यक है। यदि निचले स्तर के अधिवेशन नहीं होंगे तो विधान के अनुसार केन्द्रीय समिति के पास उन उच्च स्तर के अधिवेशन कराने का अधिकार है। विधान की इसी व्यवस्था के तहत बिना अधिवेशन वाले संरचनाओं का अधिवेशन स्थगित रखकर भी केन्द्रीय महाधिवेशन की तैयारी चल रही है। पार्टी नेता बताते हैं कि केन्द्रीय महाधिवेशन को फास्ट ट्रैक पर कराने के लिए कार्य तेज़ किया जा रहा है। तदर्थ समितियाँ बनाकर तल्लो स्तर पर अधिवेशन कर पार्टी संरचना परिचालन कराई जा रही है। संगठन विभाग के सदस्य बताते हैं कि प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाह के पक्ष को भी संगठन में शामिल करने के लिए कई जगह संरचनाएँ भंग कर तदर्थ समिति बनाई गई है। संगठन विभाग के सदस्यों का कहना है, “जिला समितियाँ भंग कर दोनों पक्षों के लिए तदर्थ समिति बनाई जा रही है और जल्दी अधिवेशन कराने की तैयारी है।” केन्द्रीय स्तर पर प्रधानमन्त्री शाह पक्ष शामिल हो चुका है, लेकिन निचली संरचना में समावेशन का काम जारी है।
महाधिवेशन में कितने प्रतिनिधि होंगे?
राष्ट्रिय महाधिवेशन में केन्द्रीय समिति के सदस्य स्वतः प्रतिनिधि होंगे। केन्द्रीय सल्लाहकार परिषद, अनुशासन आयोग, लेखा आयोग, निर्वाचन आयोग के पदाधिकारी सदस्य महाधिवेशन में भाग लेंगे। केन्द्रीय विभाग से प्रमुख सहित ११ सदस्यों में ३३ प्रतिशत महिला प्रतिनिधि चयन करना अनिवार्य है। संघीय संसद के दोनों सदनों और प्रदेश सभाओं के सदस्य भी स्वतः महाधिवेशन के प्रतिनिधि होंगे। राष्ट्रिय सभा एवं प्रदेश सभा में रास्वपा के जनप्रतिनिधि न होने के कारण प्रतिनिधि सभा के सदस्य महाधिवेशन के प्रतिनिधि होंगे। संशोधित विधान के अनुसार केन्द्रीय समिति का आकार १२९ सदस्यीय निर्धारित है, जबकि वर्तमान में यह संख्या ९२ सदस्य है। ये सदस्य स्वतः महाधिवेशन के प्रतिनिधि हैं। प्रदेश समिति तथा उससे संबंधित अनुशासन, लेखा, निर्वाचन समितियों के पदाधिकारी प्रतिनिधि होंगे। प्रदेश विभाग से तीन प्रतिनिधि चुना जाएगा जिसमें एक महिला अनिवार्य है। जिला समिति से पाँच सदस्यों में एक महिला अनिवार्य होगी। जिला काठमांडू सम्पर्क विभाग के प्रमुख महाधिवेशन के प्रतिनिधि होंगे। संघीय प्रतिनिधि सभा क्षेत्र समिति के अंतर्गत निर्वाचन क्षेत्र संयोजक और उपसंयोजक भी प्रतिनिधि बनेंगे। प्रवास नेपाली सम्पर्क विभाग के विभिन्न देशों की शाखाओं से अधिकतम ११ प्रतिनिधि होंगे। पालिका स्तर से पालिका सभापति प्रतिनिधि बनेंगे। पालिका अधिवेशन सदस्यों की संख्या के आधार पर २०१ से अधिक सदस्य वाले गाउँपालिकाएं से १ प्रतिनिधि, ४०१ से अधिक सदस्य वाले नगर पालिकाओं से २ प्रतिनिधि, ५०१ से अधिक सदस्य वाली उपमहानगर पालिकाओं से ३ तथा ७०१ से अधिक सदस्य वाली महानगर पालिकाओं से ४ प्रतिनिधि चुनने का विधान है। पालिका प्रमुख एवं उपप्रमुख स्वचालित रूप से महाधिवेशन प्रतिनिधि होंगे। केन्द्रीय स्तर पर विपत, राहत और उद्धार के लिए गठित र्याट के संयोजक सहित पाँच प्रतिनिधि महाधिवेशन के लिए होंगे।
निर्वाचित समिति संरचना
महाधिवेशन से केन्द्रीय, प्रदेश, जिला, निर्वाचन क्षेत्र, पालिका और वडा के छह स्तरों पर निर्वाचित समितियाँ बनाए जाएंगी। प्रत्येक स्तर के सभापतियों को ५० प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त करना होगा। केन्द्रीय पदाधिकारियों की संख्या १३ सदस्यीय होगी, जिसमें सभापति, उपसभापति (३ में महिला सहित), महामन्त्री एक, सहमहामन्त्री तीन (पुरुष एवं महिला दोनों), कोषाध्यक्ष, सहकोषाध्यक्ष, प्रवक्ता और सहप्रवक्ताएँ शामिल होंगे। वर्तमान में रास्वपा में वरिष्ठ नेता सहित एक और उपसभापति तथा महामन्त्री दो-दो हैं। केन्द्रीय पदाधिकारी महाधिवेशन में निर्वाचित होंगे। सभापति कोषाध्यक्ष, सहकोषाध्यक्ष, प्रवक्ता और सहप्रवक्ता मनोनीत करेंगे। २५ सदस्यीय सचिवालय के सदस्य भी सभापति द्वारा मनोनीत होंगे। १२९ सदस्यीय केन्द्रीय समिति में एक तिहाई महिला और युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रदेश समिति में सभापति, उपसभापति, महामन्त्री, कोषाध्यक्ष और प्रवक्ता सहित ७ सदस्यीय टीम होगी। सात प्रदेश समितियों का आकार अलग-अलग होगा (कोशी ६१, मधेस ५९, बागमती ६५, गण्डकी ४७, लुम्बिनी ५७, कर्णाली ४१ और सुदूरपश्चिम ४३ सदस्यीय)। प्रदेश सभापति की सिफारिश पर कोषाध्यक्ष और प्रवक्ता मनोनीत होंगे। जिला समिति में सभापति, उपसभापति, सचिव, सहसचिव, समावेशी सदस्य और प्रत्येक प्रतिनिधि सभा क्षेत्र से एक-एक सदस्य जिला अधिवेशन द्वारा निर्वाचित होंगे। जिला सभापति एक कोषाध्यक्ष मनोनीत कर सकता है। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में सात सदस्यीय समिति होगी, जिसमें संयोजक, प्रदेश सभाका दो क्षेत्रों से एक-एक उपसंयोजक, सचिव और सदस्य होंगे।
पालिका स्तर पर गांवपालिका में ११, नगरपालिका में १५, उपमहानगरपालिका में २१ और महानगरपालिका में २५ सदस्यीय निर्वाचित समिती बनेगी। पालिका स्तर पर भी कोषाध्यक्ष पालिका सभापति की सिफारिश पर मनोनीत होगा। पालिका पदाधिकारियों में सभापति, उपसभापति, सचिव, सहसचिव और कोषाध्यक्ष प्रत्येक एक-एक होंगे तथा बालिका सदस्य भी रहेंगे। वडा समिति में न्यूनतम ३ और अधिकतम ११ सदस्यों तक समिति बनाई जा सकेगी। वडा समिति में सभापति, उपसभापति, सचिव एक-एक होंगे और ६ सदस्य प्रतिनिधियों द्वारा निर्वाचित किए जाएँगे। निर्वाचित वडा समिति को पार्टी सदस्य दो सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार विधान द्वारा दिया गया है। ११ सदस्यीय पूर्ण समिति में ४ महिलाएँ (जिनमें कम से कम एक दलित महिला हो) अनिवार्य होंगी।





