
सरकार ने सभी आर्थिक लेन-देन को डिजिटल प्लेटफॉर्म से अनिवार्य रूप से जोड़ने की नीति अपनाई है, जिसका उद्देश्य अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाना है। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ की नीति तथा कार्यक्रम में कर संरचना की पुनर्समीक्षा और स्वैच्छिक कर अनुपालन पर विशेष जोर देने की घोषणा की है। सरकार ने छरिते करों को एकीकृत कर हरित कर प्रणाली में बदलने और दोहरे कर-मुक्ति समझौतों का विस्तार करने की योजना के साथ कदम उठाने की बात कही है। २८ वैशाख, काठमांडू।
सरकार कर के दायरे का विस्तार करते हुए सभी आर्थिक कारोबारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी कर रही है। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने सोमवार को आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ की नीति तथा कार्यक्रम संसद के संयुक्त सत्र में प्रस्तुत करते हुए इस योजना की घोषणा की। नीति तथा कार्यक्रम में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक अर्थव्यवस्था में स्थानांतरित करने का लक्ष्य बताया गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म में सभी आर्थिक गतिविधियों को समाहित कर नगद रहित, पारदर्शी और राजस्व लीक मुक्त अर्थव्यवस्था की औपचारिक शुरुआत करने की बात कही गई है।
राष्ट्रपति पौडेल के अनुसार कर संरचना की पुनर्समीक्षा भी जारी है, जो सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के घोषणा पत्र का हिस्सा था। उनका कहना है कि यह नीति उद्यमी एवं मध्यम वर्गीय परिवारों पर कर के बोझ को कम करने के उद्देश्य से लाई गई है। सरकार की प्राथमिकता स्वैच्छिक कर अनुपालन को देना है। तकनीकी रूप से सक्षम राजस्व प्रशासन और शीघ्र कर विवाद समाधान प्रणाली के माध्यम से राजस्व व्यवस्था को उद्यम-मैत्री बनाया जाएगा, यह प्रतिबद्धता राष्ट्रपति पौडेल ने व्यक्त की।
सरकार ने कर दरों में बड़े बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। निजी क्षेत्र नई सरकार से भन्सार और कच्चे माल की दरों में व्यापक सुधार की अपेक्षा कर रहा है। नेपाल उद्योग परिसंघ ने कच्चे माल और तैयार वस्तुओं की भन्सार दरों में कम से कम दो स्तरीय अंतर रखने की मांग अर्थमंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले से की है। कर छूट और प्रोत्साहन के मामले में भी सरकार ने नीति कार्यक्रम में अधिक उदारता नहीं दिखाई है।
छरिते शुल्कों को हरित कर प्रणाली में बदलना सरकार की बड़ी पहल है। फिलहाल सरकार प्रदूषण, पूर्वाधार और अन्य विभिन्न शीर्षकों पर कर वसूलती है। नीति कार्यक्रम में विभिन्न देशों के साथ दोहरे कर-मुक्ति समझौतों का विस्तार करने की योजना शामिल है, जो चालू वर्ष की नीति और बजट में भी उल्लेखित था। हालांकि इस वर्ष किसी नए देश के साथ समझौता नहीं हुआ है। सरकार भन्सार नाकों पर न्यून बिजलीकरण नियंत्रण करेगी। मूल्य अभिवृद्धि कर समेत सभी करों की वापसी की प्रक्रिया अब स्वचालित और समयबद्ध बनाई जाएगी।




