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सरकार स्क्रीनिंग में व्यस्त, सुकुमवासियों के भविष्य पर अनिश्चितता

समाचार सारांश

संचारकर्मीद्वारा समीक्षा गरिएको ।

  • काठमाडौं प्रशासन ने १० वैशाख को दिन सुकुमवासियों को १५ दिनों के भीतर आवास की उचित व्यवस्था करने का वादा किया था।
  • सुकुमवासी गीता थापाले कीर्तिपुर होल्डिंग सेंटर में अनिश्चित भविष्य और रोजी-रोटी खोने की शिकायत की।
  • सरकार ने सुकुमवासियों का स्क्रीनिंग कर लालपुर्जा वितरण तक मासिक १५ हजार रुपये घर किराया देने की तैयारी की है।

३१ वैशाख, काठमाडौं। ‘आगामी १० से १५ दिनों के अंदर वास्तविक भूमिहीनों को निश्चित कर उन्हें आवास की उचित व्यवस्था करने की तैयारी की जा रही है। कृपया इस कार्य में सहयोग करें,’ यह घोषणा गत १० वैशाख को काठमाडौँ जिला प्रशासन कार्यालय द्वारा की गई थी।

नदी किनारे बसे सुकुमवासियों की बस्ती में डोजर चलाने से पहले काठमाडौँ प्रशासन ने विश्वास दिलाया था कि उचित व्यवस्था की जाएगी। वैशाख १२ की सुबह ६ बजे से घर-जगह गिराने की सूचना देते हुए प्रशासन ने अवरोध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की धमकी भी दी थी।

प्रशासन ने वादा किया था, ‘इस स्थान से हटाए गए सभी व्यक्तियों और परिवारों को सरकार द्वारा तय न्यूनतम सुविधाओं से युक्त विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में रखा जाएगा।’

इस तरह प्रशासन द्वारा चेतावनी के साथ जारी किए गए विज्ञप्ति में दी गई तिथियों के अनुसार व्यवस्था करने की आशा सुकुमवासियों को थी। प्रधानमंत्री के फेसबुक पोस्ट ने भी आशाओं को बढ़ावा दिया था। ‘हम सरकार में हैं। अतिक्रमणकारियों और सुकुमवासियों को अलग करेंगे,’ प्रधानमंत्री बालेन ने लिखा था, ‘देशभर के वास्तविक सुकुमवासियों को जल्द से जल्द जमीन वितरण की प्रक्रिया पूरी करेंगे। वर्षों पुरानी इस समस्या का स्थायी समाधान हमारी सरकार करेगी।’

लेकिन १९ दिन बीत जाने के बाद भी गीता थापा को कोई चैन नहीं है। कीर्तिपुर होल्डिंग सेंटर में रहने वाली गीता खान-पान तो ठीक है लेकिन भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। उनकी बेटी एसईई पास कर चुकी है पर आगे पढ़ाई का कोई अवसर नहीं है। दिव्यांग पति के उपचार को लेकर भी तनाव में हैं। डॉक्टर ने ऑपरेशन का खर्च ७ लाख बताया है, इसलिए पति अभी घर पर ही गर्दन की नस संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं।

उनके पोते को अचानक तीन दिन पहले बुखार आया और उन्हें वीर अस्पताल ले जाना पड़ा, सरकार की मदद से अस्पताल तक पहुंचाया गया। उसी रात पोता को ट्यूमर दिखने लगा। गीता कहती हैं कि यह उनकी सेहत पर भी असर डाल रहा है।

गीता थापाथली पूर्व में रहने वाली सुकुमवासी हैं। अपनी मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करती थीं। कीर्तिपुर आने के बाद वहां ऐसे काम नहीं मिले। ‘अब मनोरंजन से ज्यादा पैसो की जरूरत है। सरकार द्वारा दी गई भत्ता अच्छी है, मगर रोज़ाना मजदूरी करने वालों के लिए वह पर्याप्त नहीं है,’ उन्होंने कहा।

कीर्तिपुर होल्डिंग सेंटर में रहकर गीता ने रोज़गार खो दिया है। जबकि सरकार ने १५ दिन में व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था, १९ दिन बीत जाने पर कोई योजना नहीं मिलने से वे चिंतित हैं।

उन्होंने बताया, ‘१५ दिन के अंदर हमको स्थानांतरित कर व्यवस्था करने का कहा गया था, लेकिन १९ दिन गुजरने के बाद भी कोई सूचना नहीं मिली। बीच में तो वे लगभग बनेपा में भी ले जा चुके हैं।’

कीर्तिपुर होल्डिंग सेंटर में अब १७२ सुकुमवासी हैं, जिनका प्रबंधन काठमाडौँ महानगरपालिका कर रही है। बाकी कुछ बनेपा होल्डिंग सेंटर, बालाजु गेस्ट हाउस, भक्तपुर खरिपाटी और चन्द्रागिरि के शहरी विकास भवन में रह रहे हैं।

‘तीन महीने का किराया देकर घर लौटाने पर हो रही चर्चा’

मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार बस्ती से हटाए गए सुकुमवासियों के प्रबंधन के लिए विभिन्न विकल्पों पर चर्चा चल रही है। फिलहाल एक सत्यापन टीम गठित हुई है, और उसके बाद यह तय होगा कि किसे कैसे प्रबंधित किया जाए।

प्रारंभिक चरण में, सुकुमवासियों को तीन महीने का खर्च देकर उनके अस्थायी ठिकाने पर लौटाने की योजना पर विचार हो रहा है। तीन महीने बाद अन्य व्यवस्थापन विकल्पों को देखा जाएगा।

‘अभी तीन महीने का घरभाड़ा देकर सुकुमवासियों को उनके गंतव्य पर वापस भेजने की तैयारी पर चर्चा हो रही है,’ सूत्र ने कहा, ‘बहुत अधिक संख्या होल्डिंग सेंटर में रखने से विवाद हो सकता है इसलिए विकल्प खोजे जा रहे हैं।’

जिनके पास अस्थायी पता नहीं है, वे कहां जाएंगे, इसका अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। मंत्रालय प्रयासरत है।

सरकार स्क्रीनिंग कर १५ दिनों में प्रबंधन करने की बात कह रही है, लेकिन १९ दिन निकल जाने पर कोई ठोस निर्णय न होने से होल्डिंग सेंटर में अनिश्चितता बढ़ रही है। साथ ही, सरकार ने यह भी कहा है कि यदि विकल्प नहीं मिला तो संबंधित जिलों में भूमि देकर प्रबंधन किया जाएगा।

‘कुछ विकल्प न होने पर चल रहे चर्चाओं में विस्थापितों को उनके जिलों में जमीन प्रदान करने पर विचार हो रहा है, लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है,’ मंत्रालय के अधिकारी ने बताया।

सरकार स्क्रीनिंग में उलझी

तत्काल व्यवस्था करने की बात कह कर डोजर चलाने वाली सरकार अब १९ दिन बाद भी ठोस फैसला नहीं दे पाई है। अभी तक नकली और असली सुकुमवासियों की स्क्रीनिंग में ही व्यस्त है।

राज्य व्यवस्था एवं सुशासन समिति के अध्यक्ष हरि ढकाल के अनुसार काठमाडौँ के होल्डिंग सेंटरों में भूमिहीनों की स्क्रीनिंग जारी है और उसके बाद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया से लालपुर्जा वितरण का लक्ष्य है।

ढकाल ने बताया कि सरकार असली सुकुमवासियों को लालपुर्जा मिलने तक प्रति माह १५ हजार रुपये घर किराया भी देने की तैयारी कर रही है। इस योजना और इसके स्रोत की पुष्टि शहरी विकास मंत्रालय ने समिति को दी है।

इसके अलावा होल्डिंग सेंटर में रह रहे बच्चों के लिए स्कूल बस की व्यवस्था की गई है और प्रसूता महिलाओं के पोषण के लिए आवश्यक प्रबंध भी किए गए हैं।

‘काठमांडू के होल्डिंग सेंटरों में रहने वाले भूमिहीन लोगों की स्क्रीनिंग जारी है,’ ढकाल ने कहा, ‘लालपुर्जा मिलने तक के लिए मासिक १५ हजार रुपये किराया देने की तैयारी है और इसके लिए स्रोत सुनिश्चित भी हो चुके हैं।’

सरकार द्वारा दी गई जानकारी और प्रगति की सच्चाई जानने के लिए संसदीय समिति ने स्थलगत निरीक्षण का निर्णय भी लिया है।