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अधिकांश लोग दाहिने हाथी होने के पीछे का रहस्य नए अध्ययन ने खोला

समाचार सारांश

प्रस्तुत और संपादकीय समीक्षा।

  • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पाया कि मानव पूर्वजों का सीधे खड़े होकर चलना और मस्तिष्क के आकार में बदलाव दाहिने हाथ के प्रबल उपयोग के मुख्य कारण हैं।
  • 41 प्रजातियों के 2,025 बंदरों के डेटा का विश्लेषण कर हाथ की प्राथमिकता निर्धारित करने वाले कारणों की जांच की गई।
  • डा. थोमस ए. पुशेल के अनुसार, इंसान को अन्य जीवों से अलग करने वाली विशेषताओं के साथ-साथ हाथ की प्राथमिकता भी जुड़ी हुई है।

4 जेठ, काठमाडौँ। मानव विकास के इतिहास में एक बड़ा रहस्य जो वैज्ञानिकों को लम्बे समय से उत्सुक करता रहा है, उसे नई रिसर्च ने स्पष्ट किया है।

दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों और क्षेत्रों के लगभग 90 प्रतिशत लोग दाहिने हाथ के क्यों होते हैं, जबकि अन्य बंदर या वानर प्रजातियों में ऐसा बड़ा अंतर नहीं दिखता, इस पर वैज्ञानिकों ने खोज की है।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नए अध्ययन से पता चला है कि मानव पूर्वजों द्वारा दो पैरों पर सीधा खड़े होकर चलने और मस्तिष्क के आकार में तेज़ विकास ने दायें हाथ के प्रमुख उपयोग के पीछे मुख्य कारण प्रदान किया है।

प्लॉस बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के लिए डॉ. थोमस ए. पुशेल, राचेल एम. हर्विट्स (ऑक्सफोर्ड) तथा प्रोफेसर क्रिस वेन्डिटी (रीडिंग विश्वविद्यालय) के नेतृत्व में टीम ने 41 विभिन्न प्रजातियों के 2,025 बंदरों का आंकड़ा विश्लेषण किया।

वैज्ञानिकों ने औजार उपयोग, भोजन, आवास, सामाजिक संरचना, मस्तिष्क के आकार, चलते हुए पैटर्न समेत सभी संभावित कारणों को एक गणितीय मॉडल में डाल कर व्यवस्थित परीक्षण किया।

शुरुआत में अन्य जीवों की तुलना में केवल इंसान को दाहिने हाथ का अपवाद माना गया, लेकिन मस्तिष्क के आकार और दो पैरों पर सीधे चलने को शामिल करने पर यह प्राकृतिक विकास प्रक्रिया का हिस्सा साबित हुआ।

अर्थात्, सीधे खड़े होकर चलने की आदत और बड़े मस्तिष्क का मेल इंसानों में दाहिने हाथ के उपयोग को तीव्र गति से बढ़ा रहा था।

इस अध्ययन ने मानव के लुप्तपूर्वक पूर्वजों में भी हाथ की प्राथमिकता का अनुमान लगाया है। शुरुआती मानव पूर्वज आर्डिपिथेकस और ऑस्ट्रालोपिथेकस में थोड़ा दाहिने हाथ की झुकाव था।

लेकिन, होमो वर्ग के उभरने के साथ दाहिने हाथ का इस्तेमाल क्रमशः बढ़ा। होमो एर्गास्टर, होमो इरेक्टस और निएंडरथल प्रजातियों में यह प्राथमिकता बढ़ती रही और आधुनिक मानव में चरम पर पहुँच गई।

विकास प्रक्रिया में एक अपवाद भी देखने को मिला। इंडोनेशिया में पाई जाने वाली छोटी कद की “होमो फ्लोरेसिन्सिस” प्रजाति में दाहिने हाथ की प्रधानता नहीं थी। इस प्रजाति का मस्तिष्क छोटा था तथा वे पेड़ चढ़ने व सीधे चलने दोनों में सीमित थे, इसलिए दाहिने हाथ की प्रवृत्ति कम पाई गई।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी हुई। पहले चरण में सीधे खड़े होकर चलना शुरू हुआ जिससे हाथ चलने से स्वतंत्र होकर विभिन्न कामों के लिए उपयोग होने लगे। दूसरे चरण में मस्तिष्क बड़ा और जटिल हुआ जिससे दाहिने हाथ की प्राथमिकता और अधिक मजबूत और व्यापक हुई।

मुख्य शोधकर्ता डॉ. थोमस ए. पुशेल के अनुसार यह पहली बार था जब दाहिने हाथ होने के सभी प्रमुख सिद्धांतों को एक ही मॉडल में रख कर परीक्षण किया गया। इसने दिखाया कि सीधे चलना, बड़े मस्तिष्क और हाथ की प्राथमिकता सभी गहरे रूप से जुड़े हुए हैं जो इंसान को अन्य जीवों से अलग बनाते हैं।

फिर भी, विकासक्रम में बाएँ हाथ के अस्तित्व के कारणों और इसके सामाजिक प्रभावों पर और शोध की जरूरत बताई गई है।