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विष्णु पौडेल ने केपी ओली से कहा- ‘आपसे पार्टी नहीं चलेगी’

एमाले के उपाध्यक्ष विष्णु पौडेल ने अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को ७० वर्ष की आयु सीमा और दो कार्यकाल की व्यवस्था हटाने को एक बड़ी भूल बताते हुए पद छोड़ने का प्रस्ताव रखा है। उपाध्यक्ष पौडेल सहित चार उपाध्यक्षों ने कहा है कि ओली के नेतृत्व में पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती और पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा है। जब ओली ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वालों को दंडित करने की धमकी दी, तब उपाध्यक्ष पृथ्वी सुब्बा गुरुङ ने कहा, ‘पार्टी आपकी निजी कंपनी नहीं है’ और सवाल उठाए। ८ जेठ, काठमाडौँ।

जेनजी आन्दोलन के बाद सत्ता से बाहर हुए एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली अब चुनाव में शर्मनाक हार के कारण पार्टी में भी संकट में हैं। पिछले महाधिवेशन में खुद को जिताने में मदद करने वाले नेतागण भी अब उनसे पार्टी नहीं चलाए जाने का निष्कर्ष निकाल कर पद छोड़ने पर आमादा हैं। इस प्रस्ताव को पार्टी की बैठक में औपचारिक रूप से रखा गया है। शुक्रवार को सचिवालय की बैठक में उपाध्यक्ष विष्णु पौडेल ने अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को ७० वर्ष की आयु सीमा और दो कार्यकाल की प्रावधान को हटाना गलती बताया और पार्टी के लिए नई राह खोलने का प्रस्ताव रखा।

उपाध्यक्ष पौडेल ने कहा कि वर्तमान स्थिति में पार्टी का नेतृत्व करना उनके लिए संभव नहीं है और उन्हें अपना रास्ता छोड़ देना चाहिए। चुनाव में पार्टी की शर्मनाक हार के बाद यह प्रस्ताव सचिवालय की बैठक में औपचारिक तौर पर पेश किया गया। अब इस विचार के समर्थन में चार उपाध्यक्ष खड़े हैं। पौडेल, जो उपाध्यक्षों में दूसरे नंबर पर हैं, ने नेतृत्व बदलने की स्पष्ट धारणा व्यक्त करते हुए पार्टी को दो विभिन्न गुटों में बांट दिया है।

“अब आपके नेतृत्व में पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती, निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में गहरा निराशा है,” यह विचार उपाध्यक्ष पौडेल, पृथ्वी सुब्बा गुरुङ, रघुजी पन्त और गोकर्ण बिष्ट का था। जब उन्होंने अध्यक्ष के विकल्प की बातें कीं तब उपाध्यक्ष रामबहादुर थापा बादल ने इसका विरोध किया। थापाले कहा कि पार्टी संकट में है और इस समय नेतृत्व का बचाव करना जरूरी है। जब अन्य उपाध्यक्षों ने नेतृत्व पर सवाल उठाए, तब ओली ने कहा कि थापा का कथन ही पार्टी की आधिकारिक पंक्ति है।

अध्यक्ष ओली द्वारा अराजकता के आरोप लगाने पर उपाध्यक्ष पृथ्वी सुब्बा गुरुङ ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, “आज बैठक में कड़ी बहस हुई। अध्यक्ष ने अंतिम क्षणों में कठोर भाषा का इस्तेमाल किया। इसका जवाब देते हुए मैंने भी कठोर प्रतिक्रिया दी और पूछा- क्या यह पार्टी आपकी निजी कंपनी है? क्या आपको अपने साथियों से सम्मानजनक तरीके से बात करने का तरीका नहीं आता?” बैठक में पौडेल ने पार्टी की हार की समीक्षा करने और उसकी जिम्मेदारी नेतृत्व को लेने की मांग की।

पौडेल ने कहा, “असफलता की जिम्मेदारी लेकर आपको मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। ७० वर्ष की उम्र सीमा और दो कार्यकाल की व्यवस्था को लेकर पार्टी में लोकतंत्रीकरण का जो मुद्दा उठाया गया था, उसमें हमने समर्थन किया था, लेकिन बाद में आपने वह प्रावधान हटा दिया और हम मान गए। यह मानना हमारी गलती थी। अब ७० वर्ष की आयु सीमा और दो कार्यकाल की व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए।” जब बैठक में दो गुट स्पष्ट हुए कि एक गुट ओली का समर्थन करता है और दूसरा उनका विरोध, तब अध्यक्ष ओली ने व्यंग्य करते हुए कहा कि ‘अध्यक्ष हटाने की मांग विष्णु पौडेल कर रहे हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व रामबहादुर थापा कर रहे हैं।’