प्रतिपक्ष ने आश्वासन को खोखला बताया, सत्तापक्ष ने जीवन बदलने वाली कार्ययोजना बताया

समाचार सारांश
संपादकीय समीक्षा पश्चात्।
- कोशी प्रदेश सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के लिए प्रस्तुत वार्षिक नीति तथा कार्यक्रम पर विराटनगर में चर्चा शुरू की है।
- छहकार में प्रतिपक्षी सांसदों ने इसे दूरदर्शिता की कमी और पुरानी योजनाओं का संग्रह बताया और आलोचना की।
- सत्तापक्ष के सांसदों ने इसे प्रदेश की आर्थिक समृद्धि के लिए नया आधार बनाने वाला बताया।
१० जेठ, विराटनगर। कोशी प्रदेश सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के लिए प्रस्तुत वार्षिक नीति तथा कार्यक्रम पर चर्चा की शुरुआत की है। रविवार से शुरू हुई इस चर्चा में सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष के सांसद नीति तथा कार्यक्रम के पक्ष और विपक्ष में विभाजित दिखे।
सत्तापक्ष के सांसदों ने नीति तथा कार्यक्रम को प्रगतिशील और समृद्धि का आधार बताते हुए इसका बचाव किया। वहीं प्रतिपक्षी सांसदों ने इसके क्रियान्वयन को लेकर शंका जताई और इसे पुरानी आश्वासनों का निरंतर पुनरावृत्ति बताया।
प्रतिपक्षी दल नेकपा के सांसद गोम्बु शेर्पा ने नीति तथा कार्यक्रम को यथास्थितिवादी बताया। उन्होंने कहा, ‘सरकार की नीति तथा कार्यक्रम वैचारिक रूप से यथास्थितिवादी लगती है, व्यावहारिक रूप में यह सिर्फ टपरटुइंया और आश्वासन देने की भावना से भरपूर है।’
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री नीति तथा कार्यक्रम के बारे में अभिज्ञ नहीं लगते। यह पुरानी नीति तथा कार्यक्रम की ही नकल है। ‘नीति तथा कार्यक्रम में लिख देना ही क्या सचमुच होगी? क्या सरकार जिम्मेदार नहीं होगी?’ उन्होंने सवाल उठाया।
नेकपा के ही सांसद गणेशप्रसाद उप्रेती ने भी सरकार की नीतियों में नवाचार की कमी बताई और कहा कि यह पुरानी योजनाओं का संग्रह मात्र है। उन्होंने पर्यटन पूर्वाधार के बिना ‘पर्यटन वर्ष’ के प्रचार को निरर्थक करार दिया।
‘बीती बार असफल रही और पूरी नहीं हो सकी योजनाओं को ही नए ढांचे में दोहराया गया है,’ उन्होंने कहा, ‘नीति तथा कार्यक्रम में देश के नामकरण आंदोलन और पहचान के मुद्दों पर जनता की भावनाओं और उपचुनाव के मत को समझने में सरकार असफल रही है।’
उप्रेती ने बिना सड़क व होटल निर्माण के पर्यटन वर्ष की घोषणा को केवल प्रचार के रूप में बताया।
प्रतिपक्षी सांसद बाबूराम गौतम ने नीति तथा कार्यक्रम में दृष्टिकोण की कमी बताई। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के घरों को संग्रहालय बनाने के लिए बजट आवंटित करने के प्रस्ताव का विरोध किया।
‘एक ओर प्रदेश के हजारों नागरिक सुरक्षित आश्रय न पाकर सुकुमवासी बने हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार के नेता अपने घरों को सजाने में लगे हैं। यह कैसा समाजवाद है?’ उन्होंने कहा, ‘सरकार के पास कोई विजन या दृष्टिकोण नहीं है।’ उन्होंने कहा कि सीमित क्षेत्र के भीतर बनाई गई नीति तथा कार्यक्रम जनता की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाएगी।
प्रतिपक्षी दल नेकपा की सांसद सपना दर्जी ने कहा कि नीति तथा कार्यक्रम शब्दों में आकर्षक जरूर है, लेकिन व्यवहार में दलित, महिला और भूमिहीन सुकुमवासियों की समस्याओं का समाधान नहीं करता।
प्रतिपक्षी सांसद राजेंद्र कार्की ने बताया कि पहले के नीति कार्यक्रम में शामिल थे लेकिन प्रगति नहीं हुई योजनाएं अब भी जस की तस रखी गई हैं। ‘तमोर-लेउती सुरंग मार्ग, केचना-सगरमाथा द्रुतमार्ग और चतरा-चौरीखर्क रेलमार्ग कहां पहुंचे, इसका कोई पता नहीं,’ उन्होंने प्रश्न उठाया। ‘पुरानी योजनाएं केवल कागज पर सीमित नहीं रहनी चाहिए, व्यवहार में ईमानदारी जरूरी है।’
सत्तापक्ष के सांसदों ने कहा कि नीति कार्यक्रम ने सभी क्षेत्रों और समुदायों को समाहित करने की कोशिश की है।
एमाले के सांसद राधाकृष्ण खनाल ने कहा कि नीति कार्यक्रम स्वच्छ, सुखी और समृद्ध प्रदेश की कल्पना को साकार करेगा। ‘युवाओं के लिए टैलेंट हंट जैसी पहल और ‘‘मैं आगे बढ़ूंगा’’ जैसे स्वयंसेवी कार्यक्रम उर्जा का संचार करेंगे।’
एमाले सांसद होमबहादुर थापा ने बताया कि कोशी प्रदेश चाय और कॉफी का केंद्र है इसलिए अंतरराष्ट्रीय चाय सम्मेलन आयोजित करने से आर्थिक समृद्धि के द्वार खुलेंगे। ‘नीति कार्यक्रम प्रगतिशील है, मगर संघीय सरकार ने अभी अधिकार नहीं दिए, इसके लिए मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन जरूरी है।’
सत्तापक्ष के जयप्रकाश चौधरी ने कहा कि मुख्यमन्त्री डैशबोर्ड के माध्यम से योजनाओं की निगरानी और मंत्रालयों के पुनर्गठन से सरकारी कार्य क्षमता में सुधार आएगा।
सत्तापक्ष के प्रेमराज थाम्सुहाङ ने नीति कार्यक्रम को सकारात्मक बताया और कहा कि यदि केवल १५ प्रतिशत भी क्रियान्वित हो जाता है, तो प्रदेश के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी।
सत्तापक्ष के किशोरचंद्र दुलाल ने कहा कि प्रदेश की नीति कार्यक्रम में अनेक विषय समाहित हैं और सरकार के कार्यक्रम व्यावहारिक हैं। उन्होंने बताया, ‘यह नीति कार्यक्रम कोशी प्रदेश वासियों की दैनिक जीवन से जुड़ा है। यह सिर्फ सरकार का सपना नहीं, बल्कि प्रदेश वासियों का जीवन बदलने की कार्ययोजना है।’
नीति तथा कार्यक्रम पर चर्चा कल भी जारी रहेगी।
