
१२ जेठ, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस की सांसद गीता गुरूंग ने कुप्रथाओं और भेदभावपूर्ण कानूनों के कारण पीड़ित महिलाओं से सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। प्रतिनिधि सभा की मंगलवार की बैठक में उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा मांगी गई माफी केवल शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह महिला प्रतिनिधित्व की सुनिश्चितता, आर्थिक सम्मान और आत्मनिर्भरता समेत होनी चाहिए।”
सांसद गुरूंग ने पिछले कुप्रथा और भेदभावपूर्ण कानूनों के कारण महिलाओं को हुई पीड़ा के लिए नेपाल सरकार द्वारा औपचारिक माफी की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने सरकार की नीति तथा कार्यक्रम में महिलाओं से संबंधित विषयों के अभाव की ओर संसद का ध्यान आकर्षित कराया।
“हमने सरकार की नीति तथा कार्यक्रम का अध्ययन किया, उसमें महिलाओं का विशेष समावेश दिखाई नहीं दिया,” उन्होंने कहा। आगामी बजट में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को न्याय की अनुभूति हो इस प्रकार का बजट लाने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा, “आगामी बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में कुप्रथा के शिकार महिलाओं से लेकर शहरों में उद्योग और विभिन्न पेशा-व्यवसायों में सक्रिय महिलाओं को न्याय का अनुभव हो इस तरह का बजट लाया जाए।”
सांसद गुरूंग ने महिलाओं के योगदान का उचित सम्मान किए बिना देश के लोकतंत्र को अधूरा बताया। उन्होंने प्रथम जननिर्वाचित प्रधानमंत्री भीमपुर्व कोइराला द्वारा बैतडी की द्वारिकादेवी ठाकुरानी को स्वास्थ्य सहायक मंत्री नियुक्त करने का स्मरण करते हुए कहा, “वह केवल नेपाल की नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की पहली महिला मंत्री थीं।”
