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जल स्रोत, नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा दक्षता से संबंधित विधेयक की प्रगति

१३ जेठ, काठमाडौं। ऊर्जा, जल स्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय जल स्रोत, नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा दक्षता से संबंधित विधेयक को आगे बढ़ा रहा है। ऊर्जा, जल स्रोत तथा सिंचाई मंत्री वीराज भक्त श्रेष्ठ ने इस विधेयक में सुझाव एकत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। विद्युत विकास विभाग और विद्युत नियमन आयोग के कर्मचारीयों के साथ हुई बातचीत के दौरान मंत्री श्रेष्ठ ने इस अनुरोध को दोहराया। उन्होंने उत्पादित विद्युत बेकार न होने देने और जनता की निवेश को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता जताई।

आगामी आर्थिक वर्ष के भीतर नेपाल विद्युत प्राधिकरण और राष्ट्रीय प्रसारण ग्रिड कंपनी के माध्यम से एक दर्जन से अधिक रणनीतिक महत्व की प्रसारण लाइनों को प्राथमिकता देते हुए एक वर्ष के अंदर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य लेकर काम चल रहा है, इसकी जानकारी उन्होंने दी। मंत्री श्रेष्ठ ने कहा कि विद्युत उत्पादन तेजी से बढ़ा भी है लेकिन खपत वृद्धि न होने की स्थिति में देश भविष्य में ऋण जोखिम में पड़ सकता है। इसलिए विद्युत खपत के विस्तार और प्रसारण पूर्वाधार को भी विभाग को प्राथमिकता देनी होगी, इस बात पर उन्होंने मजबूती से ज़ोर दिया।

उन्होंने आगामी दिनों में जलविद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए नए कार्यप्रणाली अपनाने और अन्य संस्थाओं के साथ सहयोग से आगे बढ़ने की आवश्यकता को भी उजागर किया। वैश्विक परिवर्तनों के कारण नेपाल की ऊर्जा आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं पर नए दृष्टिकोण से सोचने की आवश्यकता पर उन्होंने प्रकाश डाला, साथ ही विद्युत उत्पादन अनुमतिपत्र (लाइसेंस) वितरण प्रक्रिया में विभाग को और गंभीर होने की बात कही।

मंत्री श्रेष्ठ ने निवेशकों की पूंजी सुरक्षित रखने और सरकार की नीतियों एवं निर्णयों पर कोई प्रश्न उठने न देने वाले प्रावधानों को सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाग केवल लाइसेंस जारी करने के कार्य तक सीमित न रहे, बल्कि परियोजना की गुणवत्ता, उपकरणों और भौतिक पूर्वाधार की स्थिति पर भी नियमित निगरानी करने की आवश्यकता है। उन्होंने विभाग की भूमिका को मुख्य बताते हुए विश्वास जताया कि कुछ वर्षों बाद सरकार के स्वामित्व में आने वाली परियोजनाओं तथा कार्यों की मानकों के अनुसार सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय गृहकार्य कर रहा है। उन्होंने क्षणिक लोकप्रियता और महत्वाकांक्षा से बढ़कर सुशासन एवं प्रशासनिक सुधार को प्राथमिकता देने का वचन भी दिया तथा उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन के आधार पर कर्मचारियों को जिम्मेदारी और अवसर प्रदान करने का आश्वासन दिया।