
१०वीं शताब्दी के आसपास प्राचीन फारस से शुरू हुआ ‘सान्बोसाग’ ही परिवर्तित होकर आधुनिक समोसा बना है, ऐसा इतिहासकारों का मत है। समोसा नाम सुनते ही कई लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। गरमा गरम समोसा न केवल पेट को तृप्त करता है बल्कि मन को भी आनंदित करता है। चाहे जितना भी खाएं, इसके लिए बार-बार मन करता है। नेपाल से लेकर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और विश्व के विभिन्न देशों में यह नाश्ते के रूप में लोकप्रिय है। लेकिन, इस व्यंजन की उत्पत्ति कहाँ हुई? यह हमारी रोजमर्रा की नाश्ते की थाली का हिस्सा कैसे बना? और क्यों यह विश्वव्यापी रूप से सबसे पसंदीदा व्यंजन बन गया?
मध्य एशिया और मध्य पूर्व का तोहफा समोसा नाम मध्य फारसी शब्द ‘सान्बोसाग’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘त्रिकोण आकार की पेस्ट्री’। यह व्यंजन भारत का मूल निवासी नहीं है। इसकी जड़ें १०वीं शताब्दी के मध्य पूर्व और मध्य एशिया में पाई जाती हैं। इसका सबसे पुराना उल्लेख अब्बासिड काल के कवि इशाक अल–मौसिली की रचनाओं में मिलता है। ११वीं शताब्दी में ईरानी इतिहासकार अबुल–फजल बेयहाकी ने अपनी पुस्तक तारिख–ए–बेयहाकी में ‘सम्बोसा’ का उल्लेख किया है। उस समय इसे राजदरबार में मांस, सूखे फल और मेवों से भरी पेस्ट्री के रूप में परोसा जाता था।
सिल्क रोड के व्यापार मार्ग के माध्यम से यह व्यंजन विभिन्न देशों में फैला। मध्य एशियाई ‘सम्सा’, अरबी ‘सम्बुसक’, टर्की के ‘सोम्सा’ जैसे नामों से यह जाना जाता था। भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश और रूपांतरण १३वीं–१४वीं शताब्दी के दौरान दिल्ली सल्तनत के समय मध्य पूर्वी और मध्य एशियाई व्यापारी तथा रसोइयों के आगमन के साथ हुआ। अमीर खुसरो जैसे विद्वानों ने भी इसका उल्लेख किया है। मुगल साम्राज्य के दौरान यह राजदरबार में एक लोकप्रिय स्नैक के रूप में स्थापित हुआ।
भारत में आने के बाद समोसे ने एक बड़ा परिवर्तन लिया। यहां की शाकाहारी परंपरा और स्थानीय मसालों ने इसे नई स्वादिष्टता दी। आलू, मटर, प्याज, जीरा, धनिया, हल्दी जैसे सामग्री से भरने की परंपरा शुरू हुई। ब्रिटिश काल के दौरान आलू के व्यापक उपयोग ने समोसे को और भी लोकप्रिय बनाया। नेपाल में भी यह व्यंजन भारत से आया माना जाता है। यहां भी चाय की दुकानों से लेकर सड़कों तक समोसा और चटनी की जोड़ी अपराजेय है।
समोसा केवल खाने की वस्तु नहीं है, यह सांस्कृतिक सेतु भी है। यह विभिन्न जाति, धर्म और वर्ग के लोगों को एक साथ लाता है। मुस्लिम, हिंदू, सिख सभी इसका आनंद समान रूप से लेते हैं। आर्थिक दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है। कम निवेश में शुरू किया जाने वाला व्यवसाय है। नेपाल और भारत में लाखों लोग समोसा बेचकर अपने परिवार का पालन कर रहे हैं। स्वास्थ्य के लिहाज से परंपरागत रूप से इसे तेल में तलकर बनाया जाता है, इसलिए इसमें कैलोरी अधिक होती है और इसे पूरी तरह स्वास्थ्यकर नहीं माना जाता। लेकिन कभी-कभी स्वाद की खातिर समोसा खाना ठीक रहता है। समोसे की कहानी सभ्यता के सफर की कहानी है—व्यापारिक मार्गों का व्यापार, साम्राज्यों का उत्थान-पतन, संस्कृतियों का मिश्रण और मानव स्वाद की उत्कृष्ट कृति। मध्य पूर्व के राजदरबार से शुरू हुआ यह व्यंजन आज विश्वभर में सर्वप्रिय स्वाद बन चुका है।
