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‘अमेरिका-चीन युद्ध आने पर परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा’

एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रक्षा अध्ययन संस्थान ने ताइवान विवाद के चलते अमेरिका और चीन के बीच युद्ध की स्थिति में इसे परमाणु विनाश में तब्दील होने की चेतावनी दी है। ब्रिटेन के लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) ने गुरुवार को जारी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के मुख्य कमांड और संचार केंद्रों को निशाना बनाने की स्थिति में हैं, जिससे परमाणु युद्ध भड़क सकता है। यह रिपोर्ट सिंगापुर में इसी सप्ताह शुरू हो रहे एशिया के सबसे बड़े वार्षिक रक्षा सम्मेलन ‘सैंगरी-ला डायलॉग’ की पूर्व संध्या पर जारी की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, विश्व इस समय नए परमाणु हथियारों की होड़ में है और इसका केंद्र एशिया-प्रशांत क्षेत्र है। पिछले वर्षों में चीन ने अन्य परमाणु शक्तियों की तुलना में अपनी परमाणु हथियार क्षमता को तेज़ी से बढ़ाया है, अमेरिकी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2030 तक चीन के पास लगभग 1000 परमाणु वारहेड होने का अनुमान है। वर्तमान में अमेरिका के पास 3700, रूस के पास 4400 सक्रिय परमाणु हथियार हैं, जबकि चीन के पास लगभग 620 हथियार हैं।

आईआईएसएस के वरिष्ठ फेलो डेनियल सालिसबरी ने बताया कि शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी और सोवियत संघ के बीच हथियार नियंत्रण को लेकर लंबी बातचीत होती रही, लेकिन वर्तमान में अमेरिका और चीन के बीच इस तरह की कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है। इस महीने की शुरुआत में बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच शिखर वार्ता हुई थी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार उस वार्ता में परमाणु सुरक्षा को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।

इस रिपोर्ट पर चीन ने असंतोष व्यक्त किया है। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ियाङ बिन ने आईआईएसएस की रिपोर्ट को वास्तविक स्थिति से अलग बताया है। उन्होंने ताइवान मामले को चीन का आंतरिक मसला बताया और कहा कि किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने अमेरिका को ताइवान के मसले पर बेहद सावधानीपूर्वक कदम उठाने की चेतावनी दी है। सिंगापुर में 29 से 31 मई तक आयोजित होने वाले रक्षा सम्मेलन में अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ हिस्सा लेंगे। चीन के रक्षा मंत्री डोंग ज़ुन की भागीदारी की पुष्टि अभी नहीं हुई है।