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‘दुर्गा प्रसाइँ और राप्रपाकी असंतुष्टों को समेट कर नई पार्टी बनाऊंगा’

समाचार सारांश

  • डा. धवल शमशेर राण ने कहा है कि वे राप्रपा में कभी वापस नहीं लौटेंगे।
  • उनका आरोप है कि नेतृत्व ने एजेंडा बेचा है।
  • वे कहते हैं – हिंदू राष्ट्र और राजा की स्तुति करके केवल वोट मांगे गए, अब राप्रपा से पार पाना संभव नहीं है।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के महामंत्री डा. धवल शमशेर राणा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है।

राप्रपा नेतृत्व पर आरोप है कि उन्होंने हिंदू राष्ट्र और राजतंत्र के एजेंडे को सिर्फ सत्ता के स्वार्थ में इस्तेमाल किया, जरूरी समय पर महाधिवेशन नहीं किया और पार्टी में विषाक्त माहौल बना दिया गया। पूर्व सांसद और नेपालगंज के पूर्व मेयर राणा जल्द ही नई पार्टी बनाने की तैयारी में हैं।

दुर्गा प्रसाईं जैसे कार्यकर्ताओं और छोटे दलों को मिलाकर एक ‘कट्टर राष्ट्रवादी’ पार्टी बनाने की उनकी योजना है। प्रस्तुत है राप्रपा छोड़ने के कारण और आगामी राजनीतिक यात्रा पर डॉ. राणा के साथ विस्तृत बातचीत :

अब आपको राप्रपा का महामंत्री नहीं कहा जा सकता?

जिस दिन मैंने कहा था, उसी दिन से मैंने राप्रपा छोड़ दी है। इसलिए अब मुझे धवल शमशेर कहें।

‘नेता’ कहे जाने की आवश्यकता नहीं थी?

नेता कहने से लोग अच्छा महसूस नहीं करते। नेता खराब नाम अर्जित कर चुके हैं। मुझे धवल दाइ या धवल शमशेर कहें, जो भी ठीक लगे।

राप्रपा छोड़ने का कारण क्या है?

हमें जो लक्ष्य और मूल्यधाराएं थीं, वे राप्रपा में पूरी नहीं हो रही थीं, इसलिए मैंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। हम सनातन धर्म आधारित हिंदू अधिराज्य, देश के कल्याण और भ्रष्टाचार समाप्ति के उद्देश्य से राजनीति करते थे, लेकिन यह पार्टी इसे पूरा नहीं कर सकती। जनता ने भी प्रमाणित कर दिया है कि अब राप्रपा से पार पाना संभव नहीं।

पिछली उपचुनावों और राष्ट्रीय चुनावों में हमारे लगभग ९७ प्रतिशत उम्मीदवारों की गारंटी जब्त हो गई। महाधिवेशन न करने और नेतृत्व परिवर्तन न होने की स्थिति ने बड़ी चुनौतियां पैदा कीं। ऐसी विषाक्त स्थिति में बने रहना उचित नहीं लगा, इसलिए नई पार्टी बनाने जा रहा हूं।

राप्रपा के दस्तावेज़ में राजतंत्र, हिंदू राष्ट्र और संघीयता से इन्कार स्पष्ट है, आप महामंत्री थे, फिर भी क्या हुआ?

हाँ, मैंने दस्तावेज़ बनाए हैं, सब कुछ उसमें है। लेकिन शब्दों और कर्मों में फर्क है। राप्रपा नेतृत्व अपना एजेंडा पूरा नहीं कर पा रहा। मैंने चार साल बदलाव के लिए संघर्ष किया, जो कठिन समय था। अब ऐसी दूषित स्थिति में समय बर्बाद नहीं करूंगा। नई पार्टी से हमारे मूल्यों और एजेंडे को आगे बढ़ाऊंगा।

चार साल पहले २०७८ के महाधिवेशन में क्या समस्या आई?

कमल थापा को अध्यक्ष पद से हटाने और प्रजातांत्रिक प्रणाली में पार्टी चलाने की कोशिश में मैंने उम्मीदवार बनने का विचार किया। बाद में राजेन्द्र लिङ्देन को आगे किया, लेकिन उन्होंने मेरे सुझावों को नजरअंदाज किया, जिससे टूट बढ़ी।

महाधिवेशन नहीं होगा तो निर्णय क्या रहा?

कार्यसमिति की बैठक में महाधिवेशन करवाने की पहल की, पर नेतृत्व ने अनदेखी की। बहाना बनाकर पार्टी का सफाया हो गया। यही देखकर पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।

आप अध्यक्ष बनने की इच्छा रखते थे?

महाधिवेशन न होने की वजह से अध्यक्ष बनने का सपना पूरा नहीं हुआ। महाधिवेशन के बिना अध्यक्ष बनना संभव नहीं, इसलिए बाहर निकलने का निर्णय लिया।

राप्रपा अब एक सीट पर सिमित है, पार्टी टूटने पर क्या होगा?

एक ही सीट मिलने की स्थिति का विश्लेषण नेतृत्व को करना चाहिए। जनता नाराज है क्योंकि पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया।

नेताओं की कार्यशैली जिम्मेदार है या एजेंडा कमजोर पड़ गया?

हमारे काम और व्यवहार जनता की अपेक्षा के विपरीत रहे हैं। हिंदू राष्ट्र और राजा की पूजा करने को कहकर भी व्यवहार में वो नहीं दिखता।

१५ चैत के आसपास आंदोलन में समर्थन न मिलने की पीड़ा?

राजनीति में बहुत समय बीता है। पार्टी का समर्थन न मिलने पर व्यक्तिगत नुकसान हुआ। फिर भी पीड़ा सहकर यह फैसला लिया।

क्या राप्रपा ने बीमारी के बावजूद कार्रवाई की बात सच है?

हाँ, बीमार पड़ने पर भी पद से हटाया गया। मैं देशभर स्थानीय निकायों को सक्रिय कर रहा था, पर पद से हटाए जाने की कार्रवाई हुई।

राप्रपा छोड़कर नई पार्टी कब घोषणा करेंगे?

१५ दिन के भीतर व्यवस्था कर लूंगा। अभी मलमास चल रहा है, उसके बाद नई पार्टी की घोषणा होगी।

कौन-कौन शामिल होंगे?

बहुत से जिलों के कार्यकर्ता और मधेस प्रदेश के छोटे दल बातचीत में हैं। दुर्गा प्रसाईं भी लगभग तयशुदा हैं।

राप्रपा में वापस जाने की संभावना कितनी है?

मैं वापस राप्रपा में नहीं जाऊंगा। वहां कोई संभावना नहीं है।

यह नई पार्टी पुरानी से कैसे भिन्न होगी?

सिद्धांत समान होगा, लेकिन काम करने का तरीका अलग होगा। हम जनता को धोखा नहीं देंगे, सबको साथ लेकर चलेंगे और अनावश्यक कार्रवाई नहीं करेंगे।

नेतृत्व का मूल्यांकन कैसे करेंगे?

मैं भ्रष्टाचार से ऊपर वाला व्यक्ति हूं। १० साल नेपालगंज के मेयर रहते कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा। मैं कुर्सी पकड़कर नहीं बैठता।

सांसदीय नेता/कार्यकर्ता राजेन्द्र लिङ्देन के प्रति क्या कहेंगे, इसका डर नहीं?

ऐसा दिन आए तो मैं खुद पद छोड़ दूंगा। पद की लालसा नहीं है मुझे।

वीडियो/फोटो: शंकर गिरी