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राजनीतिक दबाव के बीच संसद सचिवालय ने अर्थमंत्री की त्रुटि सुधार पत्र दर्ज किया

अर्थ मंत्रालय ने संसद में पेश किए गए आर्थिक विधेयक में कर दर संशोधन के लिए संसद सचिवालय पर दबाव बनाते हुए त्रुटि सुधार पत्र दर्ज कराया है। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने विधेयक में संशोधन करते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों की सड़क शुल्क, सिनेमा हॉल के आयकर और शिक्षण शुल्क से संबंधित कर दरों में परिवर्तन किया है। बजट से जुड़े विशेषज्ञों ने संसद में प्रस्तुत विधेयक को संसदीय प्रक्रिया के विपरीत सरकार द्वारा अपने अनुकूल संशोधित करने को गंभीर त्रुटि बताया है। २१ जेठ, काठमांडू।

अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने संसद को छलकर आर्थिक विधेयक में मनमानी कर दर संशोधन को वैध बनाने के उद्देश्य से संसद में दर्ता कराए गए ‘त्रुटि सुधार’ पत्र की प्रक्रिया में गंभीर कमी सामने आई है। संसदीय नियम और प्रथानुसार संसद में प्रस्तुत किसी भी विधेयक में संशोधन केवल संसद की पूरी बैठक या समिति के द्वारा ही किया जा सकता है। फिर भी, डॉ. वाग्ले ने आर्थिक विधेयक में किए गए संशोधनों को मंजूरी दिलाने के लिए संसद सचिवालय को त्रुटि सुधार पत्र भेजा है।

संसद सचिवालय के अनुसार अर्थमंत्री द्वारा भेजा गया त्रुटि सुधार पत्र १७ जेठ को प्राप्त हुआ था। लेकिन संसद में पेश विधेयक में संशोधन प्रस्ताव दर्ज नहीं किया जा सकता, इसलिए सचिवालय के कर्मचारियों ने उस पत्र को दर्ज करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद जब मीडिया में खबरें आईं, तब अर्थ मंत्रालय ने मंत्री वाग्ले को उस प्रस्ताव को दर्ज करने के लिए दबाव डालने की जानकारी संसद सचिवालय सूत्रों ने दी है।

पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बताते हैं कि यदि अर्थमंत्री को मनमर्जी करने की अनुमति दी गई तो विधेयक का संसद में पेश और पारित होना निरर्थक हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘१५ जेठ को बजट लाकर लागू किए गए कर दरों को बिना वजह बदला नहीं जाना चाहिए।’ आम तौर पर बजट और उससे संबंधित विधेयकों को सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत किए गए स्वरूप में ही पारित किया जाता है और ‘एक-एक शब्द तक’ संशोधन नहीं किया जाता।