
२८ जेठ, काठमाडौं। उत्तर सिक्किम के लाचुङ स्थित जिरो पोइन्ट के पास भारतीय सैन्य जवानों द्वारा स्थानीय चालक की पिटाई के बाद सिक्किम में विवाद गहराया है। पीड़ित चालकों ने पिटाई में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय निवासियों ने भी अपने वाहनों पर “चालक के प्रति दयालु बनें” संदेश वाले स्टिकर लगाने का अभियान शुरू किया है।
स्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ९ जून (जेठ २६) को जिरो पोइन्ट से लौटते समय शिव मंदिर क्षेत्र के नजदीक चालक अनुभूष गुरुङ पर पिटाई हुई थी। उस गाड़ी में एक बीमार बच्चा भी था। जल्द अस्पताल पहुंचाने की आवश्यकता के कारण अनुभूष ने सैन्य वाहन के चालक से रास्ता देने का आग्रह किया था। लेकिन सैन्य जवानों ने रास्ता देने से इंकार कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। विवाद के बीच सैन्य जवानों ने अनुभव पर हाथापाई और पिटाई की।
एक वीडियो में सैन्य जवानों को चालक को गाड़ी से बाहर निकालकर सामूहिक रूप से घूंसे मारते हुए दिखाया गया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सिक्किम में भारी आक्रोश फैल गया है। चालक संगठनों “सारथी वेलफेयर बोर्ड”, “ऑल सिक्किम ड्राइवर्स वेलफेयर काउंसिल” और सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) के निकट चालक समूहों ने इस घटना की संयुक्त रूप से कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे श्रमिक चालक समुदाय की आत्म-सम्मान और सुरक्षा पर हमला बताया है और पिटाई में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
चालक संगठनों ने यह भी कहा है कि भारतीय सेना एक अनुशासित संस्था है और ऐसी घटना में शामिल लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट तंत्र और जिम्मेदारियां तय करने का आग्रह किया है। पीड़ित चालकों ने लाचुङ पुलिस चौकी में भारतीय सैन्य जवानों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। सिक्किम गुरुङ एसोसिएशन ने भी चालक अनुभूष गुरुङ सहित तीन लोगों की पिटाई की घटना की कड़ी निंदा की है। इससे पहले सिक्किम में एक महिला यात्री द्वारा चालक की पिटाई के मामले की भी सार्वजनिकता हुई थी। इसके बाद सैन्य जवानों द्वारा होने वाले अत्याचारों के मद्देनजर स्थानीय चालकों ने अपने वाहनों पर “Be Kind To The Driver” अर्थात “चालक के प्रति दयालु बनें” लिखे स्टिकर लगाने का अभियान शुरू कर दिया है।
पुलिस ने घायल चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण कर लिया है और मामले की जांच जारी है। हालांकि भारतीय सेना की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सिक्किम में यह घटना सोशल मीडिया से लेकर राजनेताओं और आम नागरिकों के बीच व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है।




