भारत ने चीन और पाकिस्तान के दबाव में ‘थिएटर कमांड’ की स्थापना कर नई सैन्य संरचना की तैयारी शुरू की
भारत ने स्वतंत्रता के बाद अपनी सबसे बड़ी सैन्य पुनर्गठन योजना के तहत ‘एकीकृत थिएटर कमांड’ स्थापित करने की अंतिम तैयारियां कर ली हैं। इस नई योजना के तहत वर्तमान में मौजूद १७ कमांडों को समाप्त कर चीन, पाकिस्तान और हिंद महासागर क्षेत्र पर केंद्रित तीन संयुक्त कमांड बनाए जाएंगे। सीमित वायुसेना संसाधनों को भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित करने के कारण भारतीय वायुसेना ने इस प्रस्तावित पुनर्गठन पर चिंता और असहमति व्यक्त की है। ३० जेठ, काठमांडू।
स्वतंत्रता के बाद भारत अपनी सबसे बड़ी सैन्य संरचनात्मक सुधार की दिशा में अग्रसर है। इस प्रक्रिया में थल सेना, नौसेना और वायुसेना को कुछ विवादित क्षेत्रीय कमांडरों के मातहत लाया जाएगा। हालांकि, यह संयोजन चीन और पाकिस्तान का एक साथ सामना करने में सक्षम होगा या नहीं, इस पर भी चिंता और शंका बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रस्तावित ‘एकीकृत थिएटर कमांड’ पर बहस केवल सैन्य संरचना सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय सेना की सीमा विवाद और बदलते खतरों का सामना करने के लिए कितनी प्रभावी एकजुटता से काम कर सकती है, इस विषय से जुड़ी है।
लंबे इंतजार के बाद यह योजना पिछले महीने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को प्रस्तुत की जा चुकी है। फिलहाल यह रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा संबंधित कैबिनेट समिति की मंजूरी का इंतजार कर रही है। इस योजना के तहत भारत के वर्तमान १७ थल, नौसेना और वायुसेना कमांडों को समाप्त कर एक नई संरचना बनाई जाएगी। वर्तमान में ये सभी कमांड प्रमुखतः स्वतंत्र रूप से संचालित होते हैं, जबकि नई व्यवस्था के तहत इन्हें भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा खतरों के आधार पर गठित संयुक्त कमांड में बदला जाएगा। चीन-केंद्रित उत्तरी थिएटर कमांड का मुख्यालय लखनऊ में होगा, जबकि पाकिस्तान जिम्मेदारी वाले पश्चिमी थिएटर कमांड का मुख्यालय जयपुर में स्थित होगा। इसके अतिरिक्त हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के हितों की सुरक्षा हेतु सामुद्रिक थिएटर कमांड का मुख्यालय तिरुवनंतपुरम में होगा।
तीनों कमांडों का नेतृत्व क्रमशः थल सेना, वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी संभालेंगे। रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान करने वाले यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के शोधकर्ता गौरव कुमार के अनुसार इस योजना को तेज़ी से लागू करने का मुख्य कारण ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच स्पष्ट सहकार्य था। पिछले वर्ष भारत प्रशासन वाले जम्मू-कश्मीर में २६ नागरिकों की हत्या के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य हमला किया था, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के नाम से जाना जाता है।
