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क्या उपभोक्ता विषाक्तता रहित आम खा रहे हैं?

काठमांडू के कुलेश्वर फल बाजार में इस समय देशी आम का दैनिक 60 से 75 लाख रुपए के बराबर कारोबार हो रहा है। विशेषज्ञों ने आम पकाने के लिए प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड के बजाय सुरक्षित माने जाने वाले एथिलीन गैस के उपयोग की सलाह दी है। खाद्य प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने अब तक बाजार में बिकने वाले आमों में किसी हानिकारक रसायन या जहर पाए जाने से इनकार किया है।

1 आसार, काठमांडू। जेठ की शुरुआत में नेपाली बाजार में धीरे-धीरे दिखना शुरू हुआ ‘फलों का राजा’ आम अब जेठ के अंत में बाजार के हर कोने में पहुंच चुका है। काठमांडू घाटी के बड़े फल विक्रेताओं और सुपरमार्केट से लेकर मोहल्ला-मोहल्ला की छोटी किराने की दुकानों, ठेला और सड़क किनारे की दुकानों तक सभी जगह पीले रंग के आमों का राज है।

वर्तमान में बाजार में मिलने वाले आमों का स्रोत देखें तो इसकी यात्रा पड़ोसी भारत से शुरू होकर नेपाल के तराई के जिलों तक फैली हुई है। जेठ की शुरुआत में भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार और आंध्र प्रदेश से बड़े पैमाने पर आम आए थे। अब मुख्य रूप से नेपाल के सिरहा, सप्तरी, धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट, बारा जैसे तराई के जिलों से रोजाना ट्रक के ट्रक आम शहरों और बाजारों तक पहुंचाए जा रहे हैं।

कामुळेश्वर और कालिमाटी जैसे बड़े थोक बाजारों में मालदह, बॉम्बे, दशहरी, जर्दा, कलकत्ता, आम्रपाली, और कृष्णभोग प्रकार के आम बड़ी धूम मचा रहे हैं। स्वाद में अत्यंत स्वादिष्ट होने के साथ ही आम को स्वास्थ्य के लिए पोषण का खजाना भी माना जाता है। लेकिन, इस समय उपभोक्ता का सवाल यह है – बिना पकने के जल्दी बाजार में आए आमों को पकाने के लिए क्या रसायनों का उपयोग किया गया होगा? यह स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक हो सकता है?

रविवार सुबह काठमांडू के बुद्धनगर की एक दुकान में हरी-पीली आम बहुत आकर्षक तरीके से कटकर रखी देख सुनिता शर्मा ठहर गईं। उन्होंने विक्रेता से पूछा, ‘साहब, यह आम कैसे हैं? कहाँ से लाए हैं? क्या इस पर जहर डाला गया है?’ विक्रेता ने जवाब दिया, ‘यह मालदह का आम है मैडम, हमारे तराई से आया है, पेड़ पर ही पका हुआ ऑर्गेनिक आम, कीमत 120 रुपये प्रति किलोग्राम।’

हालांकि विक्रेता ने ऑर्गेनिक और बिना जहर वाले आम की बात कही, फिर भी सुनिता को विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘फल और सब्जियों में 100% जहर होने की खबरें रोजाना आती रहती हैं। पिछले साल भी आम में बहुत जहर पाए जाने की खबर आई थी, इस साल भी सुनने में आ रहा है, सरकार ने जांच की है या नहीं पता नहीं, सरकारी ध्यान इस तरफ भी होना चाहिए।’ संदेह करते हुए उन्होंने 2 किलो आम खरीदे और कहा, ‘थोड़ी देर पानी में डुबाकर ही खाएंगे।’

इसके अलावा फेसबुक, टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया पर ऑर्गेनिक होने के विज्ञापन उपभोक्ताओं को और भ्रमित कर रहे हैं। सुनिता जैसे हर उपभोक्ता का यह सवाल है – ‘क्या ये आम स्वास्थ्यकर हैं या नहीं?’

कुलेश्वर में दैनिक 75 लाख तक का कारोबार, जहर को लेकर व्यवसायियों के अपने तर्क

काठमांडू के मुख्य फल थोक बाजार कुलेश्वर में फिलहाल नेपाली आम का दबदबा बताया जाता है। नेपाल फ्रूट थोक व्यवसायी संघ के अध्यक्ष अमर बानियाँ के मुताबिक, बाजार में मिलने वाले 90 प्रतिशत से ज्यादा आम देशी हैं। भारतीय आम महंगे और ढुलाई खर्च अधिक होने के कारण व्यवसायी वर्तमान में नेपाली आम को प्राथमिकता दे रहे हैं।

‘अभी बाजार में अच्छे आम का थोक मूल्य प्रति किलो 75 रुपये और कम गुणवत्ता वाले का 50 रुपये तक है,’ अध्यक्ष बानियाँ बताते हैं, ‘एक क्रेट में 22 से 25 किलो आम होते हैं, जिनकी कीमत 1500 से 2000 रुपये तक होती है।’ बानियाँ का कहना है कि रोजाना 15 से 20 पिकअप वाहन (लगभग 50 टन) आम केवल कुलेश्वर बाजार में ही खपत हो रहे हैं। कुलेश्वर फल बाजार से ही रोज़ाना 60 से 75 लाख रुपये के बराबर नेपाली आम का कारोबार हो रहा है।

‘फसल के सीजन में रोजाना 62 से 75 लाख के आस-पास कारोबार हो रहा है,’ वे कहते हैं, ‘देशी उत्पादन को बाजार मिला है, यह एक सकारात्मक पक्ष है।’

आम पकाने में उपयोग होने वाले जहर और प्रक्रिया को लेकर अध्यक्ष बानियाँ का अलग मत है। वे कहते हैं कि आम पकाने के लिए ‘एथिलीन’ गैस के पाउच का उपयोग हो रहा है।

‘हमने जहर का इस्तेमाल नहीं किया है, एथिलीन गैस का पाउच डालकर आम पकाया गया है,’ उनकी दलील है, ‘किसानों से खरीदे गए आम को व्यापारियों द्वारा पकाकर ही बाजार में लाया जाता है, इसलिये वे किस प्रकार के रासायनिक या जहर का उपयोग करते हैं, हम निश्चित नही कह सकते।’ लेकिन सरकारी संस्थाओं की निष्क्रियता पर उन्हें आपत्ति है।

‘पिछले साल भी खाद्य प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने नमूने लेकर जांच की थी, पर रिपोर्ट हमें कभी नहीं दी गई,’ वे कहते हैं, ‘राज्य को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह खाने योग्य है या नहीं, उपभोक्ताओं को भ्रमित नहीं करना चाहिए।’ वे अभी भी राज्य के जिम्मेदार निकायों से जहर जांच के लिए बार-बार आग्रह कर रहे हैं, किन्तु उनका आरोप है कि पुष्‍टि पक्ष इन संस्थानों ने कोई ध्यान नहीं दिया।

देशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य को सीमा शुल्क बढ़ाने, तथा नेपाली किसानों को अनुदान और तकनीकी सलाह देने की जरूरत पर बानियाँ जोर देते हैं।

‘सरकार से फल विक्रेताओं और किसानों को कोई राहत या अनुदान नहीं मिलता,’ वे कहते हैं, ‘विशेषज्ञों को किसान और दलालों को सलाह देना चाहिए कि आम समय से पहले न तोड़ें।’

एथिलीन का इस्तेमाल सुरक्षित, कार्बाइड खतरनाक

राष्ट्रीय फल विकास केंद्र ने इस वर्ष से आम का सीजन कुछ जल्दी शुरू होने की बात कही है। बॉम्बे, दशहरी समेत जल्दी पकने वाली प्रजातियों के आम बाजार में आना शुरू हो चुके हैं, पर सभी प्रकार के आम में जहर या हानिकारक रसायन के उपयोग के बारे में कहा जाना मुश्किल है, यह केंद्र की राय है।

केंद्र के प्रमुख महेशचंद्र आचार्य ने कहा कि बाजार में आए सभी आम हानिकारक नहीं हैं, लेकिन कुछ गैरखाद्य रसायनों से उपचारित आमों से उपभोक्ताओं को सावधान रहना चाहिए। उनका कहना है कि इस बार ज्यादा बारिश होने के कारण आम सिजन से पहले पककर बाजार में आ गए।

‘सर्लाही समेत फार्मों को आंधी-तूफान ने काफी नुकसान पहुंचाया,’ उन्होंने बताया, ‘आंधी से गिरे हुए आम खराब हो सकते हैं, इस डर से व्यापारियों ने जल्दी पकाकर बाजार भेजा।’

फलों को पकाने में उपयोग होने वाली तकनीक पर आचार्य ने कहा कि एथिलीन गैस का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है।

‘एथिलीन एक रसायन है जिसे फल पकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है,’ उन्होंने कहा, ‘यह प्राकृतिक रूप से जैसे हार्मोन रिलीज कर फल को पकाता है। अब टी-बैग की तरह पाउच में एथिलीन रखकर पकाने का वैज्ञानिक और प्रमाणित तरीका भी शुरू हो चुका है, जो विषैला नहीं है।’

लेकिन आम पकाने में कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग को वे बहुत खतरनाक बताते हैं। कार्बाइड जो पत्थर या राख जैसा दिखता है, यदि इसमें उपयोग किया गया तो वह स्वास्थ्य के लिए घातक है।

‘कैल्शियम कार्बाइड पूरी तरह प्रतिबंधित है, यह कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाला) है,’ मुख्य आचार्य ने कहा, ‘यदि आम के ऊपर सफेद राख का धूल जैसा पदार्थ या काले अस्वाभाविक दाग हों तो कार्बाइड प्रयोग हुआ हो सकता है, ऐसे आम न खाएं।’

नेपाल में आधिकारिक तौर पर भारतीय आम के आयात पर रोक होने के बावजूद खुली सीमा से अवैध आम आना स्वीकार किया गया है।

‘आधिकारिक रूप से प्लांट क्वारंटीन और जहर प्रबंधन केंद्र ने स्वीकृति नहीं दी है और प्रतिबंधित है,’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन हमारी खुली सीमा में कई छिद्र हैं, इसके कारण अवैध मार्ग से भारतीय आम बाजार में आ रहे होंगे।’

उन्होंने कहा कि राज्य के पास बाजार में आए फलों में जहर का परीक्षण करने की क्षमता सीमित है। केंद्रीय कृषि प्रयोगशाला केवल दो प्रकार के जहर का परीक्षण कर सकती है, अतः अन्य प्रकार के जहर का पता नहीं चलेगा।

‘प्रयोगशाला की मशीन सभी प्रकार के जहर की पहचान नहीं करती,’ प्रमुख आचार्य ने कहा, ‘पंजीकृत जहरों के अलावा अन्य को टेस्ट करना जरूरी है।’

इसके अलावा बाजार में उपलब्ध सब्जी और फल का परीक्षण करना और कानूनी कार्रवाई करना खाद्य प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता नियंत्रण विभाग की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, ‘बाजार से आने वाले फल में जहर है या नहीं इसका परीक्षण करना और कानूनी कार्रवाई करना विभाग का काम है, लेकिन परीक्षण महंगा है इसलिए सभी का परीक्षण संभव नहीं हो पाता।’

सोशल मीडिया में जो अफवाहें चल रही हैं कि सभी आमों में जहर है और उन्हें छोड़ देना चाहिए, वे निराधार हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं को स्वयं सतर्क होकर फल खरीदने की सलाह दी है।

सरकार का दावा: आमों में कोई हानिकारक रसायन या जहर नहीं

खाद्य प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने आमों में हानिकारक रसायन नहीं पाए जाने का दावा किया है। विभाग ने बाजार सर्वेक्षण के दौरान अब तक हानिकारक रसायन या जहर प्रयुक्त नहीं होने की बात कही है।

विभाग की प्रवक्ता एवं वरिष्ठ खाद्य अनुसंधान अधिकारी डॉ. बालकुमारी शर्मा ने कहा कि तराई के विभिन्न जिलों एवं सीमाओं पर रैपिड पेस्टिसाइड टेस्टिंग हो रही है और परिणाम संतोषजनक हैं। खासकर तराई से फल आने के कारण विभाग ने स्थानीय कार्यालय के माध्यम से निगरानी तेज कर दी है।

‘विराटनगर ऑफिस ने वहां के 7-8 विभिन्न फल केंद्रों का स्थल परीक्षण किया था, रिपोर्ट के अनुसार फल पकाने के लिए कोई हानिकारक रसायन इस्तेमाल नहीं पाया गया, जहर परीक्षण में भी कोई जहर नहीं मिला,’ डॉ. शर्मा ने कहा।

कुछ साल पहले तक फूलों को जल्दी पकाने के लिए हानिकारक और विषाक्त रसायनों का उपयोग होता था, लेकिन अब व्यापारी स्वयं सजग हैं।

‘चार-पांच साल पहले तक आम, केले जैसे फलों को पकाने के लिए मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायन प्रयोग किए जाते थे,’ उन्होंने दावा किया, ‘लेकिन अब व्यापारी ही इस तरह की हानिकारक वस्तुएं इस्तेमाल नहीं करते।’

अब बाजार में फलों को जल्दी पकाने के लिए सुरक्षित समझी गई एथिलीन गैस का उपयोग होता है। यह प्राकृतिक रूप से फल पकने की प्रक्रिया में सहायता करती है, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है, डॉ. शर्मा ने बताया।

विभाग खाद्य आयात-निर्यात गुणवत्ता प्रमाणीकरण कार्यालय के माध्यम से सीमाओं पर फल और सब्जियों का नियमित परीक्षण करता है और निगरानी जारी रखता है।

आम के गुण केवल स्वाद में ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी अत्यंत लाभकारी हैं। पोषण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक तौर पर पकने वाला आम विटामिन और खनिज से भरपूर होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ‘सी’ होता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने में मदद करता है। विटामिन ‘ए’ दृष्टि और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। हृदय स्वास्थ्य के लिए भी आम लाभकारी माना जाता है क्योंकि इसमें पोटैसियम और मैग्नीशियम रक्तचाप को नियंत्रित करने और दिल को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। इसके अलावा आम में पॉलीफेनोल्स और मैंगिफ़ेरिन जैसे एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो शरीर में ऑक्सिडेटिव तनाव को कम कर विभिन्न प्रकार के कैंसर के जोखिम को घटाने में मदद करते हैं।

हालांकि आम में प्राकृतिक शर्करा की मात्रा अधिक होती है, इसलिए मधुमेह रोगियों को चिकित्सक या पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही सीमित मात्रा में आम का सेवन करना चाहिए।

कार्बाइड से पकाए गए आम खाने से क्या होता है?

यदि आम पकाने के लिए हानिकारक रसायन कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग किया गया हो, तो यह मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है। कैल्शियम कार्बाइड में आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे विषैले तत्व होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे आम खाने से तत्काल और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के प्रभाव हो सकते हैं। आम खाकर तुरंत पेट में दर्द, जलन, दस्त, घबराहट और उल्टियां हो सकती हैं। कुछ मामलों में मुँह, गला और जीभ में जलन, खुजली, छींके आना, सिर दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।

इस जोखिम से बचने के लिए कार्बाइड से पकाए गए आमों की पहचान आवश्यक है। यदि आम के ऊपर सफेद राख जैसा धूल जैसा पदार्थ चिपका हो या काले असामान्य दाग हों, बाहर से पूरी तरह पीला लेकिन अंदर काटने पर आम सफेद और कड़ा हो, तथा प्राकृतिक खुशबू न हो तो ऐसे आम में कार्बाइड का उपयोग हुआ हो सकता है। ऐसे आम खरीदना और खाना सावधानीपूर्वक टालना चाहिए।