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इंग्लैंड ने बुधवार को क्रोएशिया के खिलाफ मुकाबला करते हुए फीफा विश्व कप २०२६ में अपना अभियान शुरू किया। इस मैच को देखते हुए दर्शकों ने हैरी केन के जर्सी पर कुछ अलग देखा होगा।
उनके जर्सी पर प्रतियोगिता के लोगो से अलग सुनहरा पैच था। लेकिन इंग्लैंड की टीम के अन्य खिलाड़ियों की जर्सी पर ऐसी कोई निशानी नहीं थी।
तो आखिर केन के जर्सी में यह फर्क क्यों था?
दरअसल विश्व कप में ‘गोल्डन बूट’ पुरस्कार जीतने वाले खिलाड़ियों को ही ऐसे ‘पैच’ पहनने की अनुमति मिलती है।
केन ने 2018 में रूस विश्व कप में सर्वाधिक गोल करते हुए ‘गोल्डन बूट’ जीता था। उस टूर्नामेंट में उन्होंने इंग्लैंड को सेमीफाइनल तक पहुंचाया था और कुल छह गोल किए थे।
नज़दीकी नजर रखने वाले दर्शकों ने मंगलवार को सेनेगल के खिलाफ दो गोल करने वाले फ्रांस के स्ट्राइकर किलियन म्बाप्पे के जर्सी पर भी सुनहरा पैच देखा। उन्होंने चार साल पहले कतर में सबसे अधिक आठ गोल करते हुए गोल्डन बूट जीता था।
इस विश्व कप में कोलंबिया के हामेज़ रोड्रिगेज भी ऐसे पैच पहनने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं। वे 2014 ब्राजील विश्व कप में सबसे अधिक छह गोल करने वाले खिलाड़ी थे।
इस प्रतियोगिता में अन्य खास चिह्न भी होते हैं?
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खिलाड़ियों की विभिन्न उपलब्धियों को दर्शाते हुए विश्व कप में शामिल होने के कारण जर्सी पर अलग-अलग प्रकार के पैच लगाए जाते हैं।
पहले विश्व कप जीत चुके टीम के सदस्यों को विश्व कप का सुनहरा लोगो (पैच) पहनने की अनुमति मिलती है। फिलहाल इंग्लैंड सहित सात देश विश्व कप का खिताब जीत चुके हैं।
हालांकि इस बार इटली क्वालीफाई नहीं कर पाया है, जो इस पैच को पहनने वाला टीम होती।
पहली बार विश्व कप खेलने वाले खिलाड़ियों को प्रतियोगिता का लोगो सहित ‘डेब्यू फीफा वर्ल्ड कप’ लिखा हुआ पैच दिया जाता है।
पहले भी विश्व कप खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए भी खास पैच होता है।
पाँच या उससे अधिक बार विश्व कप खेलने वाले खिलाड़ियों के जर्सी पर उनके देश का झंडा के साथ ‘लिगेसी’ लिखा हुआ पैच होता है।
दर्शकों को पिछले विश्व कपों में बेहतरीन गोलकीपर घोषित खिलाड़ियों के जर्सी पर भी अलग चिह्न देखने को मिल सकता है, जिसमें विश्व कप का लोगो और बीच में गोलकीपर के हाथ में पहनने वाले दस्ताने की आकृति ‘क्रेस्ट’ शामिल होती है।
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विश्व कप जीतने वाली टीम के सदस्यों के लिए सुनहरा पैच:
- ब्राजील : 1958, 1962, 1970, 1994, 2002
- जर्मनी : 1954, 1974, 1990 [पश्चिम जर्मनी], 2014
- आर्जेंटीना : 1978, 1986, 2022
- फ्रांस : 1998, 2018
- उरुग्वे : 1930, 1950
- स्पेन : 2010
- इंग्लैंड : 1966
गोल्डन बूट पुरस्कार विजेताओं के पैच:
- हैरी केन, इंग्लैंड
- किलियन म्बाप्पे, फ्रांस
- हामेज़ रोड्रिगेज, कोलंबिया
गोल्डन ग्लव पुरस्कार विजेताओं के पैच:
- एमिलियानो मार्टिनेज, आर्जेंटिना
- थिबो कॉर्टवा, बेल्जियम
- मानुएल नोएर, जर्मनी
‘लिगेसी’ पैच:
- लियोनेल मेसी, आर्जेंटिना
- क्रिस्टियानो रोनाल्डो, पुर्तगाल
- लुका मोड्रिच, क्रोएशिया
- मानुएल नोएर, जर्मनी
- युतो नागातोमा, जापान
ऐसे पैच और बैज लगाने की शुरुआत क्यों हुई?
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फीफा और ट्रेडिंग कार्ड कंपनी ‘टॉप्स’ के बीच लंबे समय से सहयोग होने के कारण ये विशेष पैच शुरू हुए हैं।
लेकिन मैच खत्म होने के बाद ये पैच जर्सी से हटा दिए जाते हैं और प्रशंसक इन्हें महत्त्वपूर्ण और मूल्यवान भौतिक वस्तुओं के रूप में संग्रहित कर सकते हैं।
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