आज कांगो राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना उनके गर्व का विषय है। वह केवल क्लब खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि अपने देश के प्रतिनिधि हैं। और आज, उस प्रतिनिधित्व ने इतिहास रचा। अमेरिका के ह्यूस्टन में पुर्तगाल के खिलाफ मैच में कांगो के योएन विसा ने ऐतिहासिक गोल दागते हुए स्कोर १-१ के बराबर कर दिया। यह गोल कांगो के ५२ वर्षों के इंतजार के बाद विश्व कप में उनका पहला गोल है, जिसने मजबूत प्रतिद्वंदी पुर्तगाल को रोकने में सफलता पाई। सन् २०२१ में एसिड अटैक में गंभीर रूप से घायल हुए विसा ने छह महीने की उपचार और कठिन संघर्ष के बाद मैदान में लौटकर यह सफलता हासिल की।
ह्यूस्टन का स्टेडियम जगमगा रहा था। खेल मैदान पर पुर्तगाल और कांगो की टीमें मौजूद थीं। ध्यान केंद्रित था पुर्तगाल की टीम पर और आकर्षण का केंद्र थे रोनाल्डो। स्टेडियम के हर कोने में लाल पुर्तगाली जर्सी नजर आ रही थीं। वहीं कांगो के नीले जर्सी शांति और दृढ़ता लिए हुए थे। समर्थक एक ही नाम के नारे लगा रहे थे, ‘रोनाल्डो, …रोनाल्डो।’ उस आवाज़ ने वातावरण को और भी गर्मा दिया। खेल शुरू होते ही पुर्तगाल ने अपनी श्रेष्ठता दिखाई। तेज पासिंग, मिडफील्ड नियंत्रण और विंग से लगातार हमले ने कांगो को दबाव में रखा। कांगो की टीम मुख्यत: रक्षा में सीमित थी। वे गेंद छीनकर काउन्टर अटैक करने की रणनीति अपना रहे थे। खेल के १२वें मिनट में पुर्तगाल ने बढ़त बना ली।
लेकिन कांगो डरा नहीं। उन्होंने संरचना बनाई, मिडफील्ड को मजबूत किया और मौके का इंतजार किया। यह केवल फुटबॉल नहीं था, यह ५२ वर्षों के इंतजार के बाद विश्व कप में अपनी पहचान बनाने की लड़ाई थी। कांगो के समर्थक भले ही कम थे, लेकिन उनकी आवाज स्टेडियम में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही थी। कई लोगों ने सोचा यह मैच एकतरफा रहेगा और यहीं खत्म होगा। लेकिन कांगो ने हार नहीं मानी। मैदान में कांगो के अनुशासन और साहस ने एक अलग कहानी लिखनी शुरू कर दी। मैच के अंत में विसा ने गोल करके कांगो का पहला विश्व कप गोल कर इतिहास रच दिया।
