चीन की तटरक्षक गतिविधियों को लेकर पश्चिमी देशों की गंभीर चिंता, ताइवान ने जताया आभार
११ असार, काठमाडौं। ताइवान के पूर्वी तट पर चीनी कोस्ट गार्ड और अन्य सैन्य गतिविधियों में वृद्धि को लेकर अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसके बाद ताइवान ने इन देशों का धन्यवाद दिया है। ताइवान सरकार ने समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवागमन (फ्रीडम ऑफ नेविगेशन) को वैश्विक व्यापार के लिए अपरिहार्य बताते हुए इस पर जोर दिया है। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र के रूप में दावा करता आया है।
पिछले जून की शुरुआत में चीन ने ताइवान के पूर्वी तट के निकट जल क्षेत्रों में ‘विशेष समुद्री यातायात कानून-कार्यान्वयन अभियान’ शुरू करने के लिए अपने तटरक्षक जहाज भेजे थे, जिनके खिलाफ ताइपेई ने कड़ी आपत्ति जताई थी। जापान और फिलिपींस ने अपनी समुद्री सीमाओं पर औपचारिक वार्ता शुरू करने की घोषणा की थी, जिस पर प्रतिक्रिया स्वरूप चीन ने यह कदम उठाने का दावा किया। बीजिंग का दावा है कि इन वार्ताओं में शामिल क्षेत्र ताइवान के समीप चीनी जल क्षेत्र है।
ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव जोसेफ वू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से चार पश्चिमी देशों के बयान के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, वर्तमान स्थिति (स्टेटस को) और क्षेत्रीय शांति तथा स्थिरता सभी का साझा हित हैं और चीन को अपने समुद्री विस्तारवाद को रोकना चाहिए। इस विषय पर चीनी विदेश मंत्रालय ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
चीन ताइवान की संप्रभुता के दावे को अस्वीकार करता है और द्वीप तथा उसके आस-पास के जल क्षेत्रों को अपनी क्षेत्रीय जलभूमि बताता है। ताइवान की तटरक्षक बलों को देखने वाली महासागरीय मामलों की परिषद ने ताइवान जलमार्ग और आसपास के क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा को वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। परिषद के अनुसार चीन द्वारा ताइवान पर समुद्री उत्पीड़न और राजनीतिक दबाव अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों में बाधक है।
