चीन ने जापान के ‘सैन्यीकरण’ को रोकने के लिए 20 जापानी कंपनियों पर निर्यात प्रतिबंध लगाया
15 असार, काठमांडू। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान जारी करते हुए जापान के ‘पुनः सैन्यीकरण’ और ‘परमाणु हथियार प्राप्ति’ के प्रयासों को रोकने के लिए निर्यात नियंत्रण सूची में 20 जापानी संस्थाओं को शामिल किया है। मंत्रालय के अनुसार, ये संस्थाएं जापान की सैन्य क्षमताओं के बढ़ावे में संलग्न हैं। इसके साथ ही अन्य 20 जापानी संस्थाओं को अलग निगरानी सूची में भी रखा गया है। चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा तथा परमाणु अप्रसार जैसे अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के लिए यह कदम उठाया है।
वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन का यह कदम पूरी तरह से कानूनसम्मत है और यह केवल सीमित संख्या में जापानी संस्थाओं और द्वैध उपयोग सामग्री को लक्षित करता है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया, ‘यह चीन और जापान के सामान्य आर्थिक और व्यापारिक आदान-प्रदान को प्रभावित नहीं करेगा। ईमानदार और नियम का पालन करने वाली जापानी कंपनियों को इसके बारे में कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।’ निर्यात नियंत्रण सूची में शामिल संस्थाओं में जापान का ‘नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज’ और स्थल, जल तथा हवाई हथियार प्रणालियों के लिए काम करने वाले सैन्य अनुसंधान संस्थान शामिल हैं।
इस सूची में ‘मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक’ और ‘मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज’ की कई शाखाएं भी शामिल हैं, जिनका व्यवसाय रक्षा तथा अंतरिक्ष प्रणाली, विशेष सॉफ्टवेयर विकास, सूक्ष्म यंत्र उत्पादन, इंजीनियरिंग सेवा, लॉजिस्टिक्स, समुद्री तकनीक और विशेष वाहन के लिए प्राविधिक सहायता प्रदान करने के क्षेत्र में फैला हुआ है। कावासाकी हैवी इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी और जापान की अग्रणी एयरोस्पेस विशेषज्ञ कंपनी ‘निप्पी कॉर्पोरेशन’ को भी यह प्रतिबंध लगाया गया है।
इससे पहले फरवरी में भी चीन ने जापान की कुछ बड़ी कंपनियों सहित 20 संस्थाओं को निर्यात नियंत्रण सूची में और अन्य 20 को निगरानी सूची में रखा था। टोक्यो पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और कुछ वस्तुओं के व्यापार पर कड़ी निगरानी रखने के लिए चीन ने यह रणनीति अपनाई है। यह कदम बीजिंग द्वारा जनवरी में ‘डुअल-यूज’ सामग्री के निर्यात नियंत्रण को सशक्त बनाने की घोषणा के बाद शुरू किया गया था।
