सिप्री की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 तक चीन के पास लगभग 620 परमाणु वारहेड हैं। पिछले एक साल में चीन ने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने की दर को घटाकर वार्षिक लगभग 20 तक सीमित कर दिया है। चीन खुद ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति अपनाने का दावा करता है और अमेरिका तथा रूस के साथ त्रिपक्षीय परमाणु वार्ता में भाग लेने से इंकार करता आ रहा है। 15 असार, काठमाडौँ। चीन अपने परमाणु हथियार भंडार और रणनीति में हमेशा से पारदर्शी नहीं रहा है और इस विषय में कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं करता। चीन की आधिकारिक नीति के अनुसार, उसकी परमाणु नीति मुख्यतः आत्मरक्षा के लिए है। उसने ‘पहले परमाणु हमला न करने’ (नो फर्स्ट यूज) की नीति पर लगातार जोर दिया है। दूसरी ओर चीन अमेरिका और रूस के साथ त्रिपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण वार्ता में हिस्सा लेने से लगातार मना करता रहा है और पश्चिमी देशों की मांगें बार-बार अस्वीकार की हैं।
पश्चिमी विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल के वर्षों में चीन ने अपने परमाणु क्षमताओं का तेजी से आधुनिकीकरण किया है। अनुमान है कि 2023 से 2025 के बीच चीन ने प्रत्येक वर्ष लगभग 100 नए वारहेड जोड़े थे, लेकिन पिछले साल यह वृद्धि दर घटकर लगभग 20 वारहेड प्रति वर्ष रह गई है। पश्चिमी मीडिया के अनुसार, चीन ने अपने मिसाइल सैन्य शैलो प्रणाली को भी काफी मजबूत किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य चीन की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता को और प्रभावशाली बनाना है। बीजिंग ने अपनी परमाणु शक्ति के प्रदर्शन में कोई झिझक नहीं दिखाई है। 2024 में चीन ने बेअसैनिक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल प्रशांत महासागर में प्रहार की थी। साथ ही 2025 में द्वितीय विश्व युद्ध की विजय के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित परेड में चीन ने पहली बार अपने ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ का प्रदर्शन किया था, जिसमें जमीन, समुद्र और हवा से परमाणु हथियार प्रहार करने की क्षमता शामिल है।
चीन की न्यूनतम भंडारण और ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति भले ही स्पष्ट हो, लेकिन बीजिंग ने अपने परमाणु भंडार संबंधी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। फिर भी आधिकारिक तौर पर वह अपनी परमाणु नीति को ‘स्थिर, सुसंगत और व्यावहारिक’ बताता है। चीन इस नीति को मुख्यतः आत्मरक्षा के लिए आवश्यक मानता है। चीन के अनुसार, उसने अपने परमाणु हथियारों की संख्या हमेशा न्यूनतम स्तर पर रखी है, जो केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य है। इसके अलावा, चीन दावा करता है कि वह परमाणु हथियारों की होड़ में शामिल नहीं है और वैश्विक रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
