कक्रोच जनता पार्टी: दिल्ली में विरोध के बाद अभिजित दीप्के ने क्यों मांगी माफी

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कक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजित दीप्के ने अपने समर्थकों से माफी मांगी है।
दीप्के ने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों को बचाने के लिए वे बेहतर प्रयास कर सकते थे, इसलिए उन्होंने समर्थकों से माफी मांगी है।
सीजेपी ने दिल्ली में सोमवार को भारतीय संसद भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। हजारों समर्थक जन्तरमंतर क्षेत्र में एकत्रित हुए थे। पुलिस ने कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों पर लाठी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।
“मैं अपने सभी समर्थकों से माफी मांगता हूँ, विशेषकर उन युवतियों से जिन्हें पुरुष पुलिस अधिकारियों ने निर्दयता से पीटा। हम इससे बेहतर कर सकते थे। दिल्ली पुलिस की अमानवीय कार्रवाई से आपको बचाने मैं और बेहतर कर सकता था,” उन्होंने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा।
“21 छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार धर्मेन्द्र प्रधान को बचाने के लिए सरकार और अधिक युवाओं का खून बहाने को तैयार थी। यदि आपको चोट लगी है और आप इसे पढ़ रहे हैं तो मुझे सीधे संदेश भेजें, मैं व्यक्तिगत रूप से बात करके माफी मांगना चाहता हूँ।”
सीजेपी क्यों आन्दोलित है
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भारत में शिक्षा प्रणाली सुधार की मांग करते छात्र, अभिभावक, कार्यकर्ता और नेता सहित हजारों लोग जन्तरमंतर में इकट्ठा हुए थे।
सीजेपी के समर्थकों, 21 दिनों से अनशन पर बैठे अभियानकर्मी और शिक्षाविद सोनम वाङचुक को शनिवार को जबरन अस्पताल ले जाया जाने के बाद तनाव बढ़ गया। उन्होंने अस्पताल में ही अनशन जारी रखा है।
पार्टी होने के बावजूद सीजेपी कोई पंजीकृत राजनीतिक संस्था नहीं है। यह प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में व्यंग्यात्मक आंदोलन के रूप में पिछले मई महीने में ऑनलाइन शुरू हुआ समूह है।
इसके बाद सीजेपी को काफी समर्थन मिला है। शिक्षा क्षेत्र में अनियमितताओं की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान पर डालते हुए उनकी इस्तीफा देने की मांग की जा रही है।
लेकिन प्रधान ने सीजेपी और उसके समर्थकों को “उच्छृंखल तत्वों की बी-टीम” कहकर आलोचना की है।
‘संघर्ष जारी रहेगा’
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दीप्के ने कहा कि उनकी पार्टी संघर्ष को जारी रखेगी।
सोमवार के विरोध प्रदर्शन में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए थे।
अभिजित दीप्के ने उनमें से कई घायल समर्थकों से मुलाकात की है।
प्रदर्शन में पुलिस की जबरदस्त कार्रवाई दिखाने वाले कई वीडियो और तस्वीरें सार्वजनिक हुई हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया है।
हालांकि पुलिस की कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के बीच अलग-अलग दावे हैं।
सीजेपी ने जन्तरमंतर में अपने विरोध स्थल को पुलिस द्वारा तोड़े-फोड़े जाने और मंच हटाए जाने की बात कही है।
सीजेपी ने ‘एक्स’ पर लिखा है, “पुलिस ने प्रदर्शन के मंच को कब्जा कर सभी सामान तोड़-फोड़कर हटा दिया। वहां बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर, भारत के संविधान की एक प्रति, श्रीरामचरितमानस, बाइबिल और बाबासाहेब आंबेडकर की छोटी मूर्ति ही बची है, जिसे बड़े संघर्ष से बचाया गया। आज भारत में अत्यंत क्रूर हमला हुआ है।”
सीजेपी ने एक तस्वीर भी पोस्ट की है।
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सोनम वाङ्चुक का अनशन जारी
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17 जुलाई से अस्पताल में भर्ती सोनम वाङ्चुक ने अनशन जारी रखने की बात कही है।
भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वाङ्चुक के शरीर में ‘ब्लड शुगर’ की मात्रा कम हो गई है, पर अन्य अहम संकेत स्थिर हैं। उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।
उन्होंने कहा कि पुलिस की “अहिंसक प्रदर्शनकारियों के साथ” की गई “क्रूर व्यवहार” ने उन्हें यह निर्णय लेने पर मजबूर किया है।
सोमवार को उन्होंने ‘एक्स’ पर हस्तलिखित संदेश की तस्वीर भी पोस्ट की है।
उन्होंने कहा है कि जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में या स्वयं को अस्पताल में मिलने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक अनशन जारी रहेगा।
उन्होंने संसद मार्च में जुटे समर्थकों का धन्यवाद किया और भविष्य में इसी तरह के समर्थन की उम्मीद जताई।
पहले सीजेपी के मंच से सोनम वाङ्चुक की पत्नी डॉ. गीताञ्जली ने विपक्षी नेताओं और सांसदों से आश्वासन दिया था कि वे संसद में इस मांग को उठाएंगे, और अस्पताल में आकर रिपोर्ट देंगे तो अनशन समाप्त कर दिया जाएगा।
सोमवार को संसद मार्च शुरू होने के बाद तीन छात्रों ने अनशन समाप्त किया था। कुछ घंटों बाद अभिजित दीप्के ने भी अपना अनशन समाप्त किया।
मानवाधिकार संगठन की चिंता
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कक्रोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने चिंता व्यक्त की है।
एचआरडब्ल्यू ने भारतीय अधिकारियों से पुलिस कार्रवाई की जांच करने और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया है।
एचआरडब्ल्यू की सहायक एशिया निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, “दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हजारों छात्रों को हटाने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा लाठी और आंसू गैस इस्तेमाल करने के आरोपों की जांच होनी चाहिए।”
उन्होंने अधिकारियों से संयम बरतने और लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करने पर जोर दिया।





