नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस में ड्रोन संचालन संरचना को मजबूत करने की सरकार की नीति

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सरकार ने विपदा पश्चात खोज और बचाव, दंगा नियंत्रण जैसे जिम्मेदारियों को सौंपते हुए नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल को अधिक मानवरहित हवाई उपकरण ‘ड्रोन’ उपलब्ध कराने और इससे जुड़ी अतिरिक्त प्रशिक्षण प्राप्त जनशक्ति तैयार करने के कार्य करने की सूचना दी है।
गृह मंत्रालय के चालू वित्तीय वर्ष की नीति एवं कार्यक्रम में सीमा नाकों पर अवैध गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए ‘ड्रोन’ और ‘नाइट विजन कैमरा’ का प्रयोग करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।
मंत्रालय द्वारा प्रकाशित बजट संबंधी पुस्तिका में ड्रोन और ड्रोन विरोधी उपकरणों के लिए बजट आवंटित किया गया है।
पुस्तिका में पूरे देश में CCTV ग्रिड का विस्तार करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) विश्लेषण क्षमता को मजबूत करने के शीर्षक के तहत भी धनराशि आवंटित की गई है।
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा निकायों की मूलभूत जिम्मेदारियों में प्रौद्योगिकी का अधिकतम इस्तेमाल और आवश्यकतानुसार विशेष संरचना बनाने पर चर्चा जारी है।
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र और प्रदेश स्तर पर पुलिस संगठन में ड्रोन संचालन कर सकने वाले 88 सदस्य हैं और भविष्य में केंद्र, प्रदेश, जिला एवं क्षेत्रीय स्तर तक हवाई सुरक्षा और सहायता इकाई स्थापित करने का लक्ष्य है।
बजट में क्या है?
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अर्थ मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बजट पेश करने से पहले संसद में प्रस्तुत नीति कार्यक्रम में वन, आग और सीमा चौकसी से जुड़े विषयों को उठाया था।
साथ ही विपदा जोखिम मानचित्रण, खोज और बचाव में निजी क्षेत्र के साथ सहयोग कर ड्रोन और हेलीकॉप्टर का उपयोग तथा सीमा नाकों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकने के लिए ड्रोन और नाइट विजन कैमरा उपयोग करने की बात कही गई थी।
बजट में ‘पुलिस पैट्रोलिंग’ ड्रोन के लिए 2 करोड़ रुपये, ‘हेवी लिफ्टिंग’ ड्रोन के लिए 1 करोड़ 90 लाख रुपये, ‘सर्च एंड रेस्क्यू’ ड्रोन के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये और ‘एंटी ड्रोन’ उपकरणों के लिए 4 करोड़ 50 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।
सशस्त्र पुलिस ने सुरक्षा प्रणाली और उपकरणों के लिए लगभग 30 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि स्रोत, जनशक्ति आवश्यकताओं आदि विषयों पर सुरक्षा निकाय गृहकार्य कर रहे हैं तथा एक निर्देशिका निर्माण का काम भी जारी है।
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता आनंद काफ्ले ने कहा, “प्रौद्योगिकी में आये परिवर्तनों के साथ हम विपदा प्रबंधन और सुरक्षा निकायों की मूलभूत जिम्मेदारियों में ड्रोन के उपयोग को व्यवस्थित कर आगे बढ़ रहे हैं।”
उन्होंने आगे बताया, “हम ड्रोन का उपयोग कहां और कैसे करना है, सुरक्षा निकायों के पास न्यूनतम कितने ड्रोन होने चाहिए, इनके रखरखाव और जनशक्ति विकास की योजनाएं बना रहे हैं।”
नेपाल पुलिस ड्रोन का उपयोग किन क्षेत्रों में करती है?
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नेपाल पुलिस ने सन 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद ‘UAV’ कहलाने वाली ड्रोन तकनीक का उपयोग शुरू किया था।
वर्तमान में संगठन में 26 प्रकार के मानवरहित हवाई उपकरण हैं और सात उपकरण मर्मत रेखा में हैं, यह जानकारी नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अविनारायण काफ्ले ने दी।
“सुरक्षा प्रबंधन, अपराध जांच, यातायात प्रबंधन, खोज और बचाव, सीमा निगरानी, राजमार्ग सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और निगरानी, आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में हम ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।
पुलिस ने केंद्र, प्रदेश, जिला और क्षेत्रीय स्तर पर हवाई सुरक्षा और सहायता इकाई स्थापित करने के उद्देश्य से कार्यप्रणाली बनाकर इसे लागू किया है।
ड्रोन की मरम्मत, संचालन और आंकड़ा विश्लेषण के लिए नेपाल पुलिस के भीतर विशेष जनशक्ति तैयार करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
पुलिस ने साल 2082 में ड्रोन और एंटी-ड्रोन उपयोग कार्यविधि लागू की और अनधिकृत ड्रोन उड़ान नियंत्रण में भी भूमिका निभाई, अधिकारीयों ने बताया।
गृह मंत्रालय द्वारा साल 2075 में जारी मानवरहित हवाई उपकरण (ड्रोन) संबंधी कार्यविधि में नागरिक उड्डयन प्राधिकरण में पंजीकरण कराने का प्रावधान शामिल है।
ड्रोन के प्रकार के अनुसार गृह मंत्रालय, स्थानीय प्रशासन या पुलिस से लिखित या मौखिक सहमति लेकर ड्रोन उड़ाने का प्रावधान भी उसी कार्यविधि में किया गया है।
कार्यविधि ने मानवरहित हवाई उपकरण की उड़ान को पांच श्रेणियों में विभाजित किया है, जिसमें सैन्य और सुरक्षा उद्देश्यों को भी शामिल किया गया है।
साथ ही अध्ययन, अनुसंधान, आपदा प्रबंधन, सेवा वितरण, विकास प्रबंधन, कला, साहित्य, मनोरंजन और जनसंचार संबंधित कार्यों में भी ड्रोन का उपयोग किया जा सकता है।
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वर्तमान में चुनाव आयोग के रूप में कार्यरत पूर्व पुलिस उपमहानिरीक्षक राजीव सुब्बा ने कहा कि मानवरहित हवाई उपकरण का उपयोग कर सुरक्षा निकाय जनहित में अनेक कार्य कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, “आपदा प्रबंधन में UAV तकनीक बेहद उपयोगी है। यह खोज और बचाव में, खतरनाक क्षेत्रों की पहचान में भी सहायक है। त्यौहार, महामारी, तथा कर्फ्यू के दौरान ड्रोन का उपयोग कर सार्वजनिक सूचना भी सार्वजनिक की जा सकती है।”
इसी तरह विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था करने और दंगा नियंत्रण में भी यह तकनीक उपयोगी साबित होती है, अधिकारी बताते हैं।
सुनसरी के देवानगंज में संप्रदायिक तनाव के बाद नेपाल पुलिस ने सुरक्षा निगरानी के लिए ड्रोन का परिचालन किया था और इसके लिए काठमांडू से ड्रोन लाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
नेपाल पुलिस के संचार निदेशालय ड्रोन तकनीक की नियमित निगरानी करता है। पुलिस के संचार प्रणाली, CCTV ग्रिड, जैमर, ड्रोन और रोबोटिक्स की जिम्मेदारी संभालने वाले इस विभाग में 1,200 से अधिक तकनीकी कर्मचारी हैं।
पुलिस की योजना
इस वर्ष पुलिस ने शरीर पर पहनने वाले कैमरे के लिए 4 करोड़ रुपये, CCTV ग्रिड के लिए 6 करोड़ रुपये और सुरक्षित डेटाबेस मशीन के लिए 18 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
पुलिस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए 50 करोड़ 49 लाख रुपये और मोबाइल फोन के एंड्रॉइड व iOS पहुँच प्रणाली के लिए 5 करोड़ 50 लाख रुपये व्यवस्थित किए हैं।
इस वर्ष मार्च में पुलिस मुख्यालय के अन्वेषण, योजना एवं विकास निदेशालय के अधीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत विश्लेषण सेल (AI-AAC) का गठन किया गया था।
इस संरचना में शुरुआत में 5 डेस्क बनाए गए और काफी सॉफ़्टवेयरों के जरिए निगरानी शुरू हुई, जिसमें शुरुआत में 6 कर्मचारी थे।
“यह सेल सामाजिक मीडिया तथा डिजिटल माध्यमों पर निगरानी के दौरान प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रूप से संग्रहित, भंडारण और प्रबंधन कर रहा है,” पुलिस प्रवक्ता काफ्ले ने बताया।
प्रारंभिक चरण में SP कमांड में 16 पद सृजित कर पूर्ण स्तर पर काम करने तथा धीरे-धीरे प्रदेश स्तर पर विस्तार करने का लक्ष्य है, नेपाल पुलिस प्रवक्ता ने पहले बताया था।





