बृहस्पतिवार से भारी बारिश की संभावना से बढ़ी चिंताएं, मौसम विज्ञानी और संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया क्या है?

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असोज ८ से नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में ‘भारी से अति भारी’ बारिश होने की संभावना मौसम विशेषज्ञों द्वारा जताई गई है, लेकिन मौसम और आपदा संबंधित सरकारी विभागों के अधिकारियों ने स्थिति की निगरानी जारी रखने और फिलहाल कोई चिंताजनक परिस्थिति न होने की बात कही है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में विकसित एक मौसमी प्रणाली नेपाल पर प्रभाव डाल सकती है और यदि यह पश्चिमी वायुमंडलीय प्रणाली से जुड़ती है तो इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
नेपाल इस समय बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है, ऐसे में मौसम विशेषज्ञों की यह चेतावनी आम जनता में चिंता का कारण बनी हुई है।
विशेष रूप से, ज्यादा बारिश से स्थानीय नदियां और नाले उफान पर आ सकते हैं, इसलिए जोखिम प्रबंधन और पूर्व तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मौसम और आपदा संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया
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संभावित मौसमी प्रणाली के संबंध में विभिन्न पूर्वानुमान सार्वजनिक हो रहे हैं, लेकिन जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने अभी इसके प्रभाव के बारे में कोई निश्चित निर्णय न लेने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में मौसमी स्थिति का विकास क्रम और संभावित मार्ग स्पष्ट होते जाएंगे।
जल तथा मौसम विज्ञान विभाग की प्रवक्ता विभूति पोखरेल ने रविवार दोपहर कहा, “बंगाल की खाड़ी में एक न्यूनचापीय क्षेत्र विकसित हो रहा है, जिसे विभिन्न मौसम मॉडल दिखा रहे हैं, लेकिन हम अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं।”
उन्होंने कहा, “बारिश तो होगी, लेकिन उसकी मात्रा और प्रभाव के बारे में अभी ठोस कोई बात करना जल्दी होगा। अभी समय है, इसलिए अनावश्यक डरने की जरूरत नहीं।”
इसी तरह, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारी भी जोखिम का विस्तार से अध्ययन कर रहे हैं तथा आवश्यक तैयारी और प्रतिक्रिया के कदम समय अनुसार उठाएंगे।
प्राधिकरण के प्रमुख धर्मराज उप्रेती ने रविवार को कहा, “हम जल तथा मौसम विभाग के साथ निरंतर समन्वय कर रहे हैं और उक्त मौसमी प्रणाली के मार्ग पर नजर रखे हुए हैं। सोमवार को इसकी पहली आधिकारिक धारणा जारी करेंगे।”
मौसम विज्ञानी क्या कहते हैं?
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले बृहस्पतिवार तक गंडकी प्रदेश के पश्चिमी भाग समेत कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा हो सकती है।
उनके अनुसार बंगाल की खाड़ी में बनने वाला न्यूनचापीय क्षेत्र यदि और मजबूत हुआ तो यह चक्रवात का रूप ले सकता है।
चक्रवात नेपाल में सीधे न भी आए, उसका प्रभाव अवश्य पड़ सकता है और अगर यह पश्चिमी वायुमंडलीय प्रणाली के साथ जुड़ता है तो बहुत अधिक वर्षा हो सकती है।
त्रिभुवन विश्वविद्यालय के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के सहप्राध्यापक मदन सिग्देल ने कहा, “सुदूर पश्चिम के कुछ स्थानों को छोड़कर अधिकांश जगहों पर अच्छी बारिश होने की संभावना है। हर जगह प्रभाव समान नहीं होगा, कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।”
जल और मौसम विज्ञान विभाग दिन की बारिश को २५ मिलीमीटर (मिमी) से कम होने पर हल्की, २५ से ५० मिमी मध्यम, ५० से १०० मिमी भारी, १०० से २०० मिमी बहुत भारी और २०० मिमी से अधिक को अति भारी वर्षा के रूप में वर्गीकृत करता है।
सिग्देल ने कहा, “चक्रवात के विभिन्न चरण होते हैं। हम अभी पूर्व-विकास की अवस्था में हैं, इसके बाद यह विकसित होता है और अंतिम चरण में पहुंचता है। इसका ट्रैक पूर्व से मध्य होते हुए पश्चिम तक देखा गया है।”
प्रवक्ता विभूति पोखरेल ने कहा कि ट्रैक दिख तो रहा है, फिर भी प्रभाव के बारे में निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कुछ और समय चाहिए।
उन्होंने कहा, “ट्रैक देख कर हम इसे नजरअंदाज नहीं करते, इसे गंभीरता से लेते हैं। लेकिन ट्रैक में बदलाव आते रहते हैं, कभी कमजोर होता है तो कभी तेज भी। हम सभी दिशा से नई जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।”
त्रिविका सिग्देल भी मानते हैं कि कुछ दिनों में ट्रैक में बदलाव संभव है।
जोखिम
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मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान स्थिति में यदि २४ घंटे में १०० मिलीमीटर बारिश होती है तो बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
त्रिविका सिग्देल ने कहा, “जमीन पहले ही अधिक नमी से संतृप्त है, अब पानी का प्रवाह कम होने के कारण नदियां उफान पर आ सकती हैं, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।”
“चाड-पर्व का समय है, इसलिए सही जानकारी लेकर ही यात्रा करनी चाहिए। कुछ स्थानों में बाढ़ व भूस्खलन की समस्या है, बढ़ती बारिश से खतरा और बढ़ सकता है। इसलिए सावधानी बरतने से नुकसान कम किया जा सकता है,” उन्होंने सुझाव दिया।
पिछले वर्ष भी बंगाल की खाड़ी में विकसित ‘मोन्था’ चक्रवात ने नेपाल के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़-भूस्खलन की स्थिति पैदा की थी।
सावधानी
मौसम विभाग की पोखरेल ने संभावित प्रतिकूल स्थिति के लिए जनता को जागरूक और सतर्क बनाने के लिए आपदा प्राधिकरण के साथ चर्चा में होने की जानकारी दी।
उन्होंने कहा, “फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है कि तुरंत कदम उठाने की जरूरत हो। आवश्यकतानुसार समय रहते उपाय किए जाएंगे।”
प्राधिकरण प्रमुख उप्रेती ने कहा कि सरकार अनावश्यक भय फैलाने से रोकने के लिए सतर्कता बढ़ा रही है।
“हम स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और खेती-बाड़ी पर संभावित प्रभाव का भी विश्लेषण कर रहे हैं,” उन्होंने बताया।
“साथ ही, मानसून लौटने की प्रक्रिया में है, इसलिए यह भी देख रहे हैं कि क्या प्रणाली पश्चिम की ओर जाएगी, और उसका वातावरण कैसे बनेगा।”
सीमित प्रभाव के मूल्यांकन के बाद सोमवार को सावधानी का संदेश भी जारी किया जा सकता है।
“हम संभावित स्थिति का बहुपक्षीय अध्ययन कर रहे हैं और सोमवार को ही आधिकारिक राय जारी करेंगे,” उन्होंने कहा।
मौसम संबंधी सूचनाओं को नियमित देखना नागरिकों से अनुरोध किया गया है। जल एवं मौसम विज्ञान विभाग इससे संबंधित सूचनाएं प्रदान करता रहता है।
आवश्यक होने पर विभाग और प्राधिकरण से ‘एसएमएस अलर्ट’ समेत अन्य सूचना एवं चेतावनी संबंधी उपाय भी किए जाएंगे।
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