
भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में १० भाद्र को आई भयानक बाढ़ ने पूरे नेपाल में दहशत फैला दी। जलविज्ञान तथा जलस्रोत अनुसन्धान केन्द्र के अनुसार, इस बाढ़ की घनता अत्यधिक थी और इसका वेग अत्यंत तीव्र रहा। केन्द्र के कार्यकारी निर्देशक सঞ্জिव बराल ने कहा कि बाढ़ की गति १८८ किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई, जो अत्यंत उच्च माना जाता है। कुछ विशेषज्ञों ने इसे ‘हिमालयन सुनामी’ तक कहा है, जबकि अन्य इसे एक हजार वर्षों में आने वाली बाढ़ के रूप में वर्णित कर रहे हैं।
लेकिन वास्तव में यह बाढ़ क्या थी? क्या यह जलवायु परिवर्तन का परिणाम है? और भविष्य में हम इससे क्या सीख सकते हैं? ये महत्वपूर्ण प्रश्न हमने सञ्जिव बराल से पूछे।





