
ढाका विश्वविद्यालय के संग्रहालय में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगने के बाद बांग्लादेश में इतिहास, राष्ट्रीयता, धर्म और भाषा से जुड़े विवाद बढ़ गए हैं। छात्रों ने तस्वीर को हटाकर फाड़ दिया, जिससे एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों ने जिन्ना पर भाषा संघर्ष और शेख मजीब की भूमिका को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। डियुसिएसयू ने तस्वीर को इतिहास से जुड़ी प्रदर्शनी का हिस्सा बताया है, लेकिन आलोचकों और छात्रों के बीच इसके औचित्य को लेकर मतभेद बने हुए हैं। 6 असोज, ढाका (रासस/एएफपी)।
पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर ढाका विश्वविद्यालय के नए संग्रहालय में लगने के बाद बांग्लादेश में इतिहास की व्याख्या, राष्ट्रीयता, धर्म और भाषा को लेकर विवाद बढ़ गया है। विश्वविद्यालय के छात्र आबू तैयब हाबिलदार ने कहा कि जिन्ना पाकिस्तान के संस्थापक जरूर थे, लेकिन उन्होंने बंगाली भाषा और अधिकारों का विरोध किया था, इसलिए बांग्लादेश में उनकी भूमिका को अलग नजरिए से देखना चाहिए। 1947 में भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान पूर्वी और पश्चिमी भागों में था, जहां पूर्वी पाकिस्तान बाद में सन् 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश के रूप में अलग हुआ। उस युद्ध में पाकिस्तानी सेना पर व्यापक अत्याचार करने के आरोप लगे थे।
जिन्ना की मुस्लिम राष्ट्र निर्माण की योजना के कारण उनकी विरासत बांग्लादेश में विवादस्पद बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषक अल्ताफ परवेज का कहना है कि इस्लामवादी राजनीति में नए प्रतीक खोजने के प्रयास से जिन्ना पर चर्चा बढ़ी है। ढाका विश्वविद्यालय केंद्रीय विद्यार्थी संघ (डियुसिएसयू) ने कहा है कि जिन्ना की तस्वीर विश्वविद्यालय के इतिहास के विभिन्न घटनाक्रम को कालानुक्रमिक रूप में दिखाने वाली प्रदर्शनी का हिस्सा है। संघ के नेता एसएम फरहाद ने कहा कि इतिहास की घटनाओं को दिखाना गलत नहीं है और तस्वीर को तोड़फोड़ करना आलोचनात्मक है।





