
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने फ्रंटियर एआई को अंतरराष्ट्रीय मानकों और निगरानी के तहत रखने के लिए फिनलैंड और नॉर्वे की पहल का स्वागत किया है। इस पहल ने एआई में मानक, प्रमाणीकरण और क्षमता सीमाओं के उल्लंघन पर अंतरराष्ट्रीय संस्था निर्माण की संभावनाओं की खोज के लिए सदस्य राष्ट्रों से आग्रह किया है। गुटेरेस ने एआई के सुरक्षित विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए वैश्विक सहयोग और मानवाधिकारों पर आधारित सुरक्षा व्यवस्था को अनिवार्य बताया है।
६ असोज, न्यूयॉर्क (रासस/एएनआई)। गुटेरेस ने तीव्र गति से विकसित हो रहे “फ्रंटियर एआई” मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मानकों और निगरानी के अंतर्गत रखने के लिए फिनलैंड और नॉर्वे द्वारा आरंभ की गई पहल का स्वागत किया है। उन्होंने एआई के सुरक्षित विकास और उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टुब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल ने संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तंत्र को मजबूत करते हुए एआई के लिए मानक निर्धारण, प्रमाणीकरण और क्षमता सीमाओं के उल्लंघन पर राष्ट्रों को एक मंच पर लाकर अंतरराष्ट्रीय संस्था निर्माण की संभावनाओं की खोज करने का आग्रह किया है।
महासचिव गुटेरेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से पहल का स्वागत करते हुए एआई से संबंधित संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल द्वारा पहला विषयगत रिपोर्ट जारी किए जाने पर भी खुशी व्यक्त की है। उन्होंने फ्रंटियर एआई प्रयोगशाला और सुरक्षा संस्थान सहित बाहरी विशेषज्ञों से पैनल के साथ सहयोग करने का अनुरोध किया है। इस पहल ने एआई को मानव निर्देशन, निगरानी एवं नियंत्रण में रहना आवश्यक बताया है और इसके विकास एवं उपयोग को अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत करने पर जोर दिया है।
यह पहल बताती है कि एआई मानव जीवन में सुधार, विज्ञान के विकास और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे सकता है, लेकिन इसके तीव्र विकास में उचित प्रबंधन की कमी सुरक्षा और संरक्षण के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है। इसने एआई विकसित करने वाली कंपनियों को आवश्यक पूर्व-परीक्षण, स्वतंत्र मूल्यांकन और पारदर्शी सुरक्षा प्रणाली विकसित करने के साथ ही योग्य मूल्यांकनकर्ताओं को जोखिम परीक्षण के लिए आवश्यक पहुंच देने का आग्रह किया है। साथ ही सरकारों और क्षेत्रीय संस्थानों से साझा मानक विकसित करने, गंभीर सुरक्षा घटनाओं की रिपोर्टिंग और वैज्ञानिक क्षमताओं तथा विश्वसनीय मूल्यांकन में सभी देशों की पहुंच सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है।
इस पहल का समर्थन ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, आयरलैंड, नेदरलैंड्स, सिंगापुर, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, टर्की सहित अन्य देशों के नेताओं और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेएन ने भी किया है। संयुक्त राष्ट्र के ८१वें महासभा में एआई प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है। १६ सितंबर को महासचिव गुटेरेस ने एआई, जलवायु संकट और बढ़ती असमानता को मानवता के सामने तीन अस्तित्वगत खतरों के रूप में चिन्हित किया था। उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जलवायु जैसे क्षेत्रों में एआई की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन इसका विकास मानव जोखिम की समझ से तेज़ी से हो रहा है।
महासचिव गुटेरेस ने सरकारों से अपने नागरिकों को एआई के खतरों से सुरक्षा करने का आग्रह किया है और वैश्विक सहयोग को अपरिहार्य बताया है। उन्होंने एआई को सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए मानव मर्यादा को केंद्र में रखकर सुरक्षा व्यवस्थाएं जरूरी बताई हैं। संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल ने २१ सितंबर को एआई एजेंट, विसंगतियां और मानवीय नियंत्रण खोने के जोखिम संबंधी पहला विषयगत रिपोर्ट जारी किया है। महासचिव गुटेरेस मंगलवार को अपनी अंतिम महासभा संबोधन देने वाले हैं। उनका महासचिव कार्यकाल समाप्त होने वाला है। ८१वें महासभा का मुख्य विषय “विश्वास की पुनर्स्थापना, रूपांतरण की निगरानी: सभी के लिए परिणाम आधारित संयुक्त राष्ट्र” रखा गया है।





