तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास की अनुपस्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
अमेरिका द्वारा महमूद अब्बास के वीजा आवेदन को अस्वीकार किए जाने के बाद वे महासभा में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क नहीं पहुँच सके।
एर्दोगान ने कहा, ‘हमारे फिलिस्तीनी भाइयों और बहनों के साथ किया गया यह अन्याय मानवता की अंतरात्मा को गहरा आघात पहुंचाता है।’
इसी संदर्भ में एर्दोगान ने पश्चिमी तट पर इज़राइल द्वारा बस्तियों के विस्तार पर भी आपत्ति जताई और बताया कि वहां की हिंसा और आतंक अब सबसे भयावह स्थिति में पहुँच गया है।
उन्होंने दावा किया कि जेरूसलम में मुस्लिमों और क्रिश्चियनों को पवित्र धार्मिक स्थलों में प्रवेश करने से भी रोका जा रहा है।
एर्दोगान ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में गाजा में इज़राइली सेना की कार्रवाइयों में कम से कम 74 हजार लोग मारे गए हैं और तुर्की इसे ‘राज्य आतंकवाद’ के रूप में देखता है।
उन्होंने आगे कहा, ‘गाजा के लोग अभी भी अपने घरों के मलबे के नीचे अपने प्रियजनों की खोज में लगे हुए हैं। वे अपने पतियों-पत्नियों, बच्चों या माता-पिताओं के शव निकाल रहे हैं।’







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