
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में अपनी अध्यक्षता के दौरान इरान पर तीव्र हमला किया है। मंगलवार को उन्होंने अपने संबोधन में इरान की नीतियों की कड़ी आलोचना की। ट्रम्प का कहना था कि अमेरिका ने लंबे समय तक इरान को शक्ति संचय करने की अनुमति दी, जिससे आतंकवाद फैलाने में मदद मिली, और अब इसे रोकने के लिए आक्रामक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने इरान के ‘बैलेस्टिक मिसाइल के आड़ में परमाणु बम विकसित करने की दौड़’ को अवरुद्ध किया है।
‘यदि वे सफल हो जाते, तो वह दुष्ट शासन हमेशा के लिए आतंक और मौत फैलाने के लिए स्वतंत्र हो जाता,’ ट्रम्प ने कहा। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि इरानी शासन पिछले ५१ वर्षों से रक्तपात और सामूहिक हत्याओं के माध्यम से सरकारी क्रियाकलाप कर रहा है, जिससे मध्य पूर्व और आसपास के क्षेत्रों में मौत, हिंसा और अराजकता फैली है। उन्होंने इरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देने की अपनी प्रतिबद्धता जताई।
ट्रम्प ने बताया कि राष्ट्रपति पद ग्रहण के तुरंत बाद उन्होंने इरान के साथ वार्ता शुरू की और परमाणु कार्यक्रम समाप्त करने तथा आतंकवाद के समर्थन को बंद करने की शर्त पर पूर्ण आर्थिक सहयोग का प्रस्ताव रखा, जिसे इरान ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने विश्व से अपील की कि इरान को आर्थिक रूप से पृथक किया जाए। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि जब तक इरान व्यवसायिक जलयान पर हमले बंद नहीं करता, परमाणु महत्वाकांक्षा त्याग नहीं करता और आतंकवाद का समर्थन रोकता नहीं, तभी आर्थिक प्रतिबंध जारी रहेंगे।
ट्रम्प ने कहा कि इरानी शासन की आक्रामकता विश्वास या ताकत की वजह से नहीं, बल्कि कमजोरी और निराशा के कारण है। उन्होंने प्रश्न उठाया, ‘क्या इरान के साथ समझौता किया जाए और उसे पुनर्निर्माण और समृद्धि का अवसर दिया जाए या इस्लामी गणराज्य को समाप्त किया जाए?’ उन्होंने पूछा, ‘क्या मैं उन्हें जीवित न रहने देकर नरक में धकेल दूं?’ लेकिन ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद इरान के साथ समझौता संभव है। नवंबर में आयोजित होने वाले चुनावों के परिणाम के बाद इरान इसे सोच रहा है। ‘वे समझ नहीं पा रहे कि मैं चुनाव लड़ नहीं रहा हूँ,’ ट्रम्प ने कहा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उन्होंने विशाल अंतर से राष्ट्रपति पद जीत लिया है और नवंबर के चुनाव उनके इरान नीति पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगे।





