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प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह का संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन

प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह ‘बालेन’ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भोटेकोशी-त्रिशूली नदी की बाढ़ से हुए नुकसान, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जलवायु न्याय से जुड़े मुद्दों को उठाया। न्यूयॉर्क में स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित महासभा में उन्होंने गुरुवार को स्थानीय समयानुसार अपने भाषण में बताया कि भोटेकोशी-त्रिशूली की विनाशकारी आपदा सिर्फ स्थानीय त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है। “क्या हमने इस चेतावनी को सच में सुना?” प्रधानमंत्री शाह ने प्रश्न किया।

लगभग तीन साल पहले जलवायु संकट के विषय पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने नेपाल से सचेत किया था, लेकिन विश्व के नेतृत्व ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, इस बात पर उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की। पिछले महीने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ की घटना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा प्रदान किए गए सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के विषय पर उन्होंने कहा, “नेपाल का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन विश्व में न्यूनतम है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पाकिस्तान ने ज्यादा अनुभव किए हैं।”

प्रधानमंत्री शाह ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से प्रभावित देशों को मामूली सहायता या ऋण से समस्या का समाधान संभव नहीं बताया और पर्याप्त अनुदान और सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। “हम पर्याप्त अनुदान आधारित सहयोग चाहते हैं। लस एंड डैमेज फंड, ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी सहित वित्तीय तंत्र अब तक अपर्याप्त हैं,” उन्होंने कहा।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन संकट को ध्यान में रखते हुए नेपाल, भारत और चीन की संयुक्त नेतृत्व में एक नया तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया, “इस तंत्र के माध्यम से भू-उपग्रह डेटा और तकनीकी ज्ञान साझा करें, जोखिम वाले हिमतालों की संयुक्त निगरानी करें।” शाह ने यह भी बताया कि वे 10 असोज को स्वदेश लौटेंगे।