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होर्मुज जलसंधि खोलने के लिए 80 देशों का संयुक्त आह्वान

समाचार सारांश समीक्षा पूरी हुई। बहरीन के नेतृत्व में 80 देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को ध्यान में रखते हुए होर्मुज जलसंधि को तत्काल और पूरी तरह से खोलने का आह्वान किया है। बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल लतीफ अल-जायनी ने संयुक्त राष्ट्र संघ की 81वीं महासभा में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने का आग्रह किया। संयुक्त बयान में ईरान से आए हमले, हुती गतिविधियों और लाल सागर तथा बाब-अल-मंदब जलसंधि में अवरोधों से व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और विश्व अर्थव्यवस्था पर बढ़ते खतरे की चेतावनी दी गई है। 9 अक्तूबर, न्यूयॉर्क (रासस/एएनआई)।

बहरीन के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र संघ के 80 सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रणनीतिक महत्व की होर्मुज जलसंधि को तत्काल और पूरी तरह से खोलने, तथा वहां जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल लतीफ अल-जायनी ने संयुक्त राष्ट्र संघ की 81वीं महासभा के दौरान न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल देशों की ओर से यह आह्वान किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलसंधि में अवरोध अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

बहरीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अल-जायनी ने मार्च में पारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 को पूरी तरह लागू करने की अपील की। उन्होंने ओमान के तट पर जहाजों पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत और हुती समूह द्वारा सऊदी अरब की ओर छह बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने की घटनाओं पर चिंता जताई और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। 80 देशों के संयुक्त बयान में ईरान से पड़ोसी देशों पर कथित हमलों, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बाधाओं तथा ऊर्जा सुरक्षा और विश्व अर्थव्यवस्था पर बढ़ते जोखिम पर चिंता व्यक्त की गई है।

भाग लेने वाले देशों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज जलसंधि को तुरंत खोलने और किसी भी अवैध शुल्क या अवरोध के बिना जहाजों की सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। बयान में यमन के हुती समूह की गतिविधियों, सऊदी अरब के खिलाफ हमलों और लाल सागर में हुए हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। बाब अल-मंदब जलसंधि के आसपास की बढ़ती गतिविधियों से अंतर्राष्ट्रीय समुद्री आवागमन और वैश्विक व्यापार पर खतरा बढ़ने की चेतावनी दी गई है।