
१२ असोज, काठमाडौं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडलों के तेजी से विकास ने तकनीक और नीति निर्माण के बीच की खाई को इतिहास की सबसे व्यापक बना दिया है। एआई की तेज़ रफ्तार को नीति निर्माण पकड़ नहीं पा रहा है, जिससे विश्व भर में नीति संबंधी खालीपन देखने को मिल रहा है। इसी साउन महीने की ४ तारीख को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेय ने ब्रसेल्स के बाहर एक बैठक आयोजित कर २७ राष्ट्रों की प्राथमिकताएं और एआई के जोखिमों पर चर्चा की थी। लेकिन, १६ सितंबर को दिए गए ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन में वॉन डेर लेय ने कहा, ‘एआई संभावनाएँ और जोखिम दोनों लाता है। इन जोखिमों का समाधान किए बिना हम एआई की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर सकते।’
यूरोपीय संघ (ईयू) ही नहीं, विश्व के अनेक सरकारें वर्तमान में नियंत्रण करने या नवप्रवर्तन को बढ़ावा देने के विषय में असमंजस में हैं। वर्ष २०२४ में यूरोप ने विश्व का पहला व्यापक ‘एआई कानून’ पारित किया, जिसे नियमन का उत्कृष्ट उदाहरण माना गया था। लेकिन, दो वर्षों में ही यह कानून चेतावनी के रूप में बदल गया है। तकनीकी बदलाव की तीव्र गति, प्रशासनिक सुस्ती और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता घटने के डर के कारण इसके कार्यान्वयन में काफी मंदी आई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने चेतावनी देते हुए कहा था, ‘यदि हम अमेरिकी और चीनी कंपनियों को आगे बढ़ने देते हैं, तो चाहे हमारे पास सर्वोत्तम नियम हों, नियमन के लिए कुछ नहीं बचेगा।’
कानून बनाने की प्रक्रिया में सोचे से अलग नए एआई स्वरूपों (जैसे, बिना मानवीय निगरानी के कार्य करने वाले ‘एआई एजेंट’) का सामना करना पड़ रहा है। पिछले जुलाई में ओपनएआई के मॉडलों ने परीक्षण पर्यावरण से बाहर निकलकर ‘हगिंग फेस’ नामक स्टार्टअप कंपनी को हैक किया था। हालांकि, ऐसे घटनाएं ईयू के कानून की अस्पष्ट सीमाओं में आती हैं। अमेरिकी कांग्रेस में भी एआई सुरक्षा से जुड़े विधेयक अटके हुए हैं। एन्थ्रोपिक ने अपने नए मॉडल ‘माइथोस’ से साइबर सुरक्षा जोखिम का हवाला देते हुए डेमोक्रेट सांसद लॉरी ट्राहान और रिपब्लिकन सांसद जे ओबर्नोल्ट ने एआई सुरक्षा परीक्षण से संबंधित विधेयक तैयार किया था, लेकिन व्यापारिक दबाव और राजनीतिक विवाद के कारण वह अभी तक आगे नहीं बढ़ पाया है।
सांसद टेड लियू ने एआई मॉडलों को नियंत्रण से बाहर होने पर ‘किल स्विच’ का उपयोग करने का विधेयक प्रस्तावित किया था। उन्होंने कहा, ‘मैं अब २०२३ की तुलना में ज्यादा भयभीत हूँ।’ वहीं, पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने अधिक नियमों के नवाचार में बाधा पहुंचाने और चीन को लाभ देने का तर्क दिया है। कुछ महीने पहले वाशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ट्रम्प के बीच एआई पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस सुरक्षा समझौता नहीं हो सका। सरकारों की धीमी प्रतिक्रिया के चलते एन्थ्रोपिक, ओपनएआई और गूगल डीपमाइंड जैसी कंपनियां अपने स्व-नियमन के लिए मजबूर हैं। लेकिन, उन्हीं कंपनियों के प्रमुख सरकारों से अनुरोध कर रहे हैं कि वे एआई विकास को कुछ हद तक धीमा करें और सख्त नियमन लागू करें। केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एआई शोधकर्ता सन् ओ हेगर्टी ने कहा, ‘ऐसा भ्रम है कि इस विषय पर निर्णय लेने वाला परिपक्व नेतृत्व या निकाय मौजूद है, लेकिन वास्तव में कोई नहीं है। यही बात सबसे ज्यादा चिंता पैदा करती है।’
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारें वर्षो में जो निर्णय लेती हैं, वही एआई विकास सप्ताहों और महीनों में हो रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो एआई मानव नियंत्रण से बाहर जाकर अपरिवर्तनीय नुकसान पहुंचाने का खतरा और बढ़ जाएगा।





