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भारत निर्वाचन आयोग में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाने को लेकर विवाद

भारत के निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच विशेष सघन संशोधन (एसआईआर) अभियान की निर्णय प्रक्रिया को लेकर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज होने का खुलासा हुआ है। आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फार्म 6 में हुए परिवर्तनों, ईसीआईनेट के केंद्रीकरण, पश्चिम बंगाल के पुनरीक्षण और कार्यविभाजन आदेश को गैरकानूनी बताया है। जांच रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी, इस्तीफा या महाभियोग के साथ-साथ पुनः चुनाव की मांग की है।

अक्टूबर 2025 से शुरू किए गए विशेष कड़े संशोधन (एसआईआर) अभियान के तहत देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच गंभीर मतभेद उभरे हैं। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की पत्रकार ऋतिका चौधरी द्वारा किए गए विशेष जांच रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयोग की तीन सदस्यीय टीम में दो आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निर्णय प्रक्रिया और कार्यशैली पर लिखित आपत्ति जताई थी।

16 अप्रैल को आयुक्त संधू ने वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया था कि कई संचार सामग्री आयोग के नाम पर प्रकाशित हो रही हैं, लेकिन आयोग की स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने फरवरी 2023 के कानून के अनुसार अब सभी पत्राचार और निर्णयों में आयोग की पूर्ण मंजूरी आवश्यक होने की चेतावनी भी दी थी। इस घटना ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के प्रति उसकी संवेदनशीलता को चुनौती दी है।