
१२ असोज, नई दिल्ली (राससएएफपी)। भारत में मतदाता सूची में विशेष गहन संशोधन (एसआइआर) प्रक्रिया में अनियमित्ताओं के आरोप लगने के बाद चुनाव आयोग पर जांच के लिए दबाव तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और सर्वोच्च न्यायालय की अध्यक्षता में जांच की मांग की है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की पिछले सप्ताह की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, एसआइआर से जुड़े कुछ अहम फैसले तीन में से दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना लिए गए पाए गए हैं। चुनाव आयोग ने अपने सभी निर्णय सर्वसम्मत और कानूनी मान्य होने का दावा करते हुए आरोपों को खारिज कर दिया है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि एसआइआर प्रक्रिया में लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को लाभ हो सकता है, और वे इस पर लंबे समय से सवाल उठा रहे हैं। उक्त दैनिक के अनुसार पिछले १० महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने एसआइआर के महत्वपूर्ण फैसलों के संबंध में कम से कम १४ बार औपचारिक असहमति जताई है और बताया गया है कि एक करोड़ ३० लाख मतदाता इससे छुट गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि एसआइआर का उद्देश्य धोखाधड़ी से पंजीकृत मतदाताओं की पहचान कर योग्य मतदाताओं को सूची में बनाए रखना है।
आयोग ने कहा है कि ‘विदेशी अवैध आव्रजकों’ को मतदान से रोकना भी इसका उद्देश्य है। आलोचकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया ने सीमांत और अल्पसंख्यक समुदायों को असमान रूप से प्रभावित किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत सहमति से हुए हैं। हालांकि, दो आयुक्तों द्वारा आपत्ति जताए गए विशेष आदेश किसने मंजूर किए, इस विषय में आयोग ने सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। कांग्रेस के पवन खेड़े ने कहा है कि यदि दो आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना एसआइआर से संबंधित फैसले लिया गया तो वह निर्णय और पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से अवैध होगी। युवा नेतृत्व वाली ककरोच जनता पार्टी ने भी चेतावनी दी है कि कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो २ अक्टूबर से सड़क आंदोलन किया जाएगा।





