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चीन और अमेरिका की वार्ता के मुख्य बिंदु सार्वजनिक

चीन ने सोमवार को पिछले सप्ताह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत की सहमतियों के बारे में विस्तार से जानकारी सार्वजनिक की है।

इससे पता चलता है कि बातचीत से कुछ ठोस नतीजे सामने आए हैं, हालांकि दोनों देशों ने संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं किया और वार्ता से कोई बड़ा उपलब्धि नहीं मिली।

इसके बजाय दोनों सरकारों ने अपने-अपने विवरण प्रस्तुत किए।

यह व्हाइट हाउस के दौरे और संबंधों में नजदीकी लाने की प्रतिबद्धता के बावजूद वाशिंगटन और बीजिंग के बीच सतर्कता बनी रहने का संकेत देता है।

इस वार्ता से चार मुख्य पहलू सार्वजनिक हुए हैं, हालांकि कुछ सवाल अभी भी अस्पष्ट हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर नई बातचीत शुरू करने का समझौता

बीजिंग के अनुसार चीन और अमेरिका कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में नई चरण की बातचीत आरंभ करने पर सहमत हुए हैं। अगली बैठक नवंबर के अंत में होगी।

दोनों देश आधुनिक एआई विकास में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और एआई का उपयोग व्यापार से लेकर सैन्य योजना निर्माण तक बढ़ रहा है।

नई बातचीत से दोनों पक्षों को इस तकनीक के लिए सुरक्षा मानकों को निर्धारित करने की आवश्यकता महसूस हुई है।

दोनों पक्ष एक संपर्कमंत्रण प्रणाली बनाने पर सहमत हुए हैं ताकि एआई से संबंधित घटनाओं की नियमित जानकारी साझा की जा सके, जिससे किसी अनचाहे या गलतफहमी से उत्पन्न संघर्ष को रोका जा सके।

वार्ता में एआई से जुड़ी सहमति की संभावना ने लोगों को उत्सुक किया, खासकर अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा एआई विकास की गति को धीमा करने की मांग के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसी बीच, ओपनएआई पर आरोप लगे हैं कि उसने बिना अनुमति ऑस्ट्रेलिया सहित विभिन्न देशों की सरकारी वेबसाइटों तक पहुंच बनाई और कुछ अमेरिकी सरकारी वेबसाइटों में हस्तक्षेप किया।

व्यापारिक समझौते का विस्तार, लेकिन कई प्रश्न अभी बाकी

चीन के सरकारी मीडिया ने सोमवार को पहली बार पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच अस्थायी व्यापार समझौते को 10 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है।

यह छोटा विस्तार इस बार के अंत में होने वाले दो अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों में दोनों नेताओं की पुनः बैठक को सुनिश्चित करता है।

ट्रंप नवंबर में चीन के शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे जबकि शी ​​जिनपिंग दिसंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए मियामी जाएंगे।

विश्व की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं का इतनी कम अवधि में बार-बार मिलना सामान्य घटना नहीं है।

चीन दीर्घकालीन आधार पर व्यापार समझौते को बढ़ाना चाहता था, इसलिए इस दो महीने के विस्तार को सीमित उपलब्धि माना जा रहा है।

चीन ने अमेरिका को 30 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात पर टैरिफ कटौती दी है और बदले में चीन से भी अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ में कमी की उम्मीद की जा रही है।

अमेरिका में निर्यात होने वाले चीनी खिलौनों, छोटे घरेलू उपकरणों और क्रिसमस सजावट की वस्तुओं पर कम टैरिफ लागू होगा।

ट्रंप प्रशासन ने चीन की योजना को भी सार्वजनिक किया है जिसका अनुसार चीन वर्ष 2027 और 2028 में प्रति वर्ष कम से कम एक करोड़ मीट्रिक टन कोयला खरीदेगा।

हालांकि, समझौते के विषयों के बाहर कई मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया।

चीन से अमेरिका जाने वाली दुर्लभ खनिजों के निर्यात में वृद्धि का कोई समाधान नहीं निकला और अमेरिकी सेमीकंडक्टर पर लगे प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं आई।

अमेरिका ने ताइवान का उल्लेख नहीं किया, चीन ने इसे महत्वपूर्ण बनाया

व्हाइट हाउस द्वारा जारी बैठक विवरण में ताइवान का कोई उल्लेख नहीं था, लेकिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए यह विषय बेहद महत्वपूर्ण था।

चीन की सार्वजनिक वार्ता विवरण के मुताबिक शी ने ट्रंप से कहा कि अमेरिका को औपचारिक रूप से ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करना चाहिए और इस मामले में पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।

पिछले मई में हुई पूर्व वार्ता में ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने भी शी से पूछा था कि यदि चीन ताइवान पर हमला करता है तो क्या अमेरिका रक्षा में हस्तक्षेप करेगा या नहीं।

ट्रंप ने कहा था, ‘इसका जवाब केवल एक व्यक्ति को पता है और वह मैं हूं।’

उस समय उन्होंने ताइवान विवाद में अमेरिकी सेना के 9,500 मील दूर जाने की उपयुक्तता पर भी सवाल उठाया था।

लेकिन इस बार उन्होंने इतने विवरण नहीं दिए।

ट्रंप ने कहा, ‘हमने इस विषय पर काफी बात की है। अब सब ठीक है और बातें अपने रास्ते पर आगे बढ़ रही हैं। उन्हें मेरी राय अच्छी तरह समझ में है।’

यह मौनता काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।

ट्रंप ने पहले ताइवान को दिए जाने वाले 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को चीन के साथ बातचीत में एक ‘अच्छा सौदा’ कहते थे।

हालांकि यह हथियार पैकेज कुछ महीनों से रुका हुआ है।

चीन के लिए अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू ने एक बार फॉक्स न्यूज को बताया था कि शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने शी को हथियार बेचने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे ठुकरा दिया था।

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है जबकि दुनिया के कई राष्ट्रों ने ताइवान को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं दी है।

हालांकि अमेरिका और अन्य देशों ने ताइवान पर बल प्रयोग कर नियंत्रण करने के प्रयासों का विरोध किया है और ताइवान को सैन्य सहायता देने का वचन भी दिया है।

क्या चीन विदेशी निवेश के लिए दरवाजे खोल रहा है?

चीन ने अमेरिका समर्थित बैंकों, निवेश कंपनियों और बीमा कंपनियों को चीन में कारोबार करने और कार्यालय खोलने के लिए आवेदन करने की अनुमति दी है।

हालांकि ये आवेदन चीन के कानून और नियमों के अनुसार ही मान्य होंगे।

यह निर्णय महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन व्यापार के लिए दरवाजे खोल रहा है, लेकिन किसे अनुमति देनी है यह निर्णय अपने हाथ में रखना चाहता है।

विदेशी वित्तीय कंपनियां चीन में नियमों की बाधाओं, अनुमति प्रक्रियाओं की जटिलताओं और देश छोड़ने पर प्रतिबंध जैसे जोखिमों की शिकायत करती रही हैं।

बीजिंग ने कहा है कि चीन और अमेरिका के बीच उड़ान संख्या बढ़ाने के बारे में बातचीत जारी है, लेकिन इस पर कोई विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

चीन ने 75 से अधिक देशों के नागरिकों को बिना वीजा प्रवेश की सुविधा दी है, लेकिन अमेरिकी नागरिकों को यह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने चीन यात्रा के लिए ‘लेवल-2’ सावधानी के साथ यात्रा की सलाह जारी रखी है।

यह चीन का दौरा करने वालों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने का सुझाव देता है।

अमेरिका ने नियमों के मनमाने क्रियान्वयन, देश छोड़ने पर रोक और हिरासत में लिए जाने के जोखिम को इसकी वजह बताया है।

दोनों देश व्यापार और यात्रा के विस्तार के इच्छुक हैं, फिर भी कुछ बड़े बाधाएं अभी बनी हुई हैं।

वार्ता से क्या पता चला?

इस वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है, लेकिन अभी कुछ बड़े निर्णायक बदलाव नजर नहीं आ रहे।

आधुनिक तकनीक से लेकर ताइवान जैसे विवादित मुद्दे अभी सुलझाए नहीं गए हैं।

यह नतीजे दोनों नेताओं के लिए नई बात नहीं हैं; दोनों पक्ष संवाद के नए तरीके अपनाने, आर्थिक छूट देने और संबंधों को स्थिर रखने के लिए प्रयासरत हैं।

दोनों नेता संबंधों में स्थिरता चाहते हैं, लेकिन किसी भी महाशक्ति को महत्वपूर्ण समझौता करने के लिए तैयार करना बहुत चुनौतीपूर्ण है। –बीबीसी से