तमिलनाडु सरकार ने सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले शिशुओं को सुन की अंगूठी भेंट करने की योजना शुरू की

१४ असोज, काठमांडू। भारत के तमिलनाडु सरकार ने सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को सुन की अंगूठी उपहार स्वरूप देने की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन्मे प्रत्येक शिशु को २२ कैरेट की १ ग्राम वजन की सुन की अंगूठी दी जाएगी। योजना के शुभारंभ अवसर पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कुछ नवजात शिशुओं को स्वयं अपनी हाथों से सुन की अंगूठी पहनाई। मुख्यमंत्री विजय ने सोमवार को मदुरै स्थित सरकारी राजाजी अस्पताल में ‘थाई मामन थंगा मोतिरम’ नामक योजना की शुरुआत की। तमिल भाषा में ‘थाई मामन थंगा मोतिरम’ का अर्थ है ‘मामा की सुन की अंगूठी।’
खाना मामा या भाई को ‘मामा’ कहा जाता है, ठीक उसी तरह तमिल समाज में मामा संबंध को विशेष महत्व दिया जाता है। तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री अरुणराज के अनुसार बच्चा जन्म लेने पर सबसे पहले पहुंचने वाले रिश्तेदारों में मामा भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि दिदी-बहन की खुशी में शामिल होकर परिवार को सहारा देने की परंपरा को सरकार इस योजना के माध्यम से सम्मानित करना चाहती है।
इस सुन की अंगूठी उपहार योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य क्या है? तमिलनाडु सरकार ने बताया है कि इस योजना का मूल उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर नागरिकों का विश्वास बढ़ाना और अस्पताल में सुरक्षित प्रसूति को बढ़ावा देना है।
सरकार के अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसूति कराने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करने से मां और नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही बाल कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित होती है। सरकारी अस्पतालों में प्रसूति कराने वाले परिवारों को सुन की अंगूठी उपहार देने से सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं के प्रति नागरिकों का भावनात्मक संबंध भी मजबूत होने की संभावना है।
विपक्षी दलों ने योजना का स्वागत किया, लेकिन प्रश्न उठाए – विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी इस योजना का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने नवजात शिशु को सुन की अंगूठी देने की बजाय परिवारों के लिए आवश्यक पोषण और सरकारी अस्पतालों की गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया है।
भाजपा नेता तमिलिसाई सौंदर्यराजन ने सामाजिक मीडिया माध्यम से व्यक्त करते हुए कहा कि नवजात शिशु को सुन की अंगूठी देने का प्रयास स्वागत योग्य है, लेकिन परिवार के लिए तत्काल आवश्यक दैनिक पोषण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले शिशुओं को सुन की अंगूठी देने में बड़ा खर्च होता है, इसलिए अस्पतालों में पर्याप्त स्वास्थ्य पूर्वाधार, चिकित्सक और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता के लिए बजट आवंटित किया जाना चाहिए।
भारत के सरकारी अस्पतालों में कौन-कौन सी समस्याएं हैं? भारत में आर्थिक रूप से सक्षम लोग उपचार के लिए प्राय: निजी अस्पतालों को प्राथमिकता देते हैं। सरकारी अस्पतालों में अधिक भीड़-भाड़, सीमित बिस्तर, चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की कमी, लंबा प्रतीक्षा समय और कमजोर पूर्वाधार इसके मुख्य कारण हैं।
इसी पृष्ठभूमि में तमिलनाडु सरकार ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूति करने वाले परिवारों को प्रोत्साहन स्वरूप सुन की अंगूठी देने की योजना पेश की है। सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसूति दर बढ़ाना और नागरिकों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास को मजबूत बनाना है। अब योजना के क्रियान्वयन के साथ ही सरकारी अस्पतालों में प्रसूति करने की प्रवृत्ति और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जनविश्वास में पड़ने वाले प्रभाव महत्वपूर्ण होंगे।




