
१६ असोज, काठमाडौं। अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य उपस्थिति और मजबूत कर रहा है। लगभग ९ हजार सैनिकों के साथ अमेरिकी युद्धपोत थियोडोर रुजवेल्ट भी इस क्षेत्र में भेजा गया है। अब तक USS जॉर्ज डब्ल्यू बुश और USS जॉर्ज वाशिंगटन वहां तैनात हैं। रुजवेल्ट के आगमन के साथ, अक्टूबर के अंत तक पश्चिम एशिया में तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर सक्रिय रहेंगे। इस कदम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उस समय उठाया है जब इरान पर नए हमले के संकेत मिल रहे हैं। ट्रम्प ने ३ नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद इरान पर हमला होने की संभावना व्यक्त की है। उन्होंने पहले ही इरान के युद्धविराम प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।
ट्रम्प के आदेश की प्रतीक्षा में अमेरिकी सेना, अल जज़ीरा के अनुसार, नवंबर के अंत तक इरान के आसपास तीन अमेरिकी युद्धपोत और दो मरीन यूनिट तैनात हो सकते हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा इरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दिए जाने पर अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है। ट्रम्प ने टाइम मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा कि इरान के युद्धविराम प्रस्ताव को उन्होंने खारिज कर दिया है। इरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन ट्रम्प के अनुसार यह अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं था।
उस प्रस्ताव के अस्वीकृत होने के बाद, ट्रम्प ने कहा था कि नवंबर ३ के चुनाव के बाद इरान पर हमले की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। गत सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी ट्रम्प ने कहा था कि वह चाहे तो इरान को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं। अमेरिका ने इरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध का मुख्य उद्देश्य बताया है। इरान ने युद्ध समाप्ति के लिए सात दिनों का प्रस्ताव अमेरिका को दिया था, जिसमें होर्मुज जलडमर्रे को फिर से खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता शुरू करने का आश्वासन था, लेकिन अमेरिका ने इसे अस्वीकार कर दिया।
इरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची के अनुसार, इरान समझौते के तहत होर्मुज जलडमर्रे खोलने को तैयार है, लेकिन विदेशी नाकाबंदी में रोकी गई संपत्तियों और धन को मुक्त करने तथा तेल बिक्री की अनुमति मिलने को शर्त बना रहा है। उन्होंने इस मांग को जून के महीने में हुई अस्थायी युद्धविराम समझौते के समान बताया। हालांकि दोनों पक्षों के हमलों के बाद वह समझौता टूट गया था।
२८ फरवरी से अमेरिका – इरान युद्ध का विस्तार शुरू हुआ है। अमेरिका और इजरायल ने २८ फरवरी को इरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, जबकि इरान ने जवाब में इजरायल और अमेरिकी सैन्य क्षेत्रों पर हमला किया। अमेरिका का उद्देश्य इरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है, जबकि इरान शांति पूर्ण परमाणु कार्यक्रम और तकनीक के उपयोग का अधिकार दावा करता है।





