नई दिल्ली। भारत के ‘ककरोच’ युवा आंदोलन ने विवादित मतदाता सूची संशोधन का विरोध करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए शुक्रवार को मुंबई में प्रदर्शन शुरू किया है। यह आंदोलन चुनावी प्रक्रिया, सरकारी जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थानों से जुड़े मुद्दों को भी अपनी मुहिम का हिस्सा बना रहा है।
ऑनलाइन अभियान के रूप में शुरू हुआ यह आंदोलन इससे पहले युवा बेरोजगारी और परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन कर चुका है, जिसके बाद शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दे दिया था। इसी बीच, विद्यार्थी और नागरिक समाज के समूह भी समान मांग के साथ नई दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
मतदाता सूची में ‘विशेष गहन संशोधन’ को लेकर निर्वाचन आयोग पर दबाव बढ़ रहा है। आलोचकों और विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए मतदाता सूची में बदलाव किया गया है। निर्वाचन आयोग और सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है।
पिछले महीने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने बताया था कि तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों ने मतदाता सूची संशोधन, पंजीकरण प्रक्रिया और डिजिटल प्रणाली से संबंधित कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। आयोग ने इसे कोई औपचारिक लिखित आपत्ति नहीं बल्कि आयुक्तों के बीच ‘भिन्न मत और चर्चा’ बताया था।
बिहार से शुरू हुआ मतदाता सूची संशोधन अब अधिकांश राज्यों और संघशासित क्षेत्रों में फैल रहा है। आलोचकों का कहना है कि आवश्यक दस्तावेज जुटाने में कठिनाई के कारण लाखों योग्य मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि इसका उद्देश्य दोहरे और अयोग्य नामों को हटाकर योग्य मतदाताओं को सूची में बनाए रखना है।
अभिजीत दीपके के नेतृत्व में प्रश्नपत्र लीक विरोधी आंदोलन से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले ककरोच आंदोलन ने अब शिक्षा क्षेत्र के अलावा निर्वाचन प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थानों से जुड़े मामलों को भी अपने अभियान में शामिल किया है।







प्रतिक्रिया 4