
१६ असोज, कैनबरा (रासस/सिन्ह्वा)। ऑस्ट्रेलिया में रोजगार के लिए उपलब्ध रिक्त पदों की संख्या लगातार दूसरे त्रैमासिक अवधि में कम हुई है। इससे देश के श्रम बाजार के कुछ क्षेत्रों में कर्मचारियों की मांग में घटावट का संकेत मिलता है। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अगस्त तक के तीन महीनों में रोजगार के रिक्त पद 0.9 प्रतिशत कम हुए हैं। इस अवधि में कुल रिक्त पद 3 हजार की गिरावट के साथ 3 लाख 25 हजार रह गए। इससे पहले मई तक के तीन महीनों में भी रोजगार के रिक्त पद 2.2 प्रतिशत घट चुके थे। लगातार दो त्रैमासिक अवधियों में रिक्त पदों में कमी आने से ऑस्ट्रेलिया के रोजगार बाजार में मांग कमजोर होने का संकेत मिलता है।
निजी क्षेत्र में अधिक गिरावट: हालिया गिरावट मुख्य रूप से निजी क्षेत्र से आई है। अगस्त तक के तीन महीनों में निजी क्षेत्र के रिक्त पद 2 प्रतिशत अर्थात् 5 हजार 8 सौ कम हुए हैं। इसके विपरीत, सार्वजनिक क्षेत्र में रिक्त पदों की संख्या बढ़ी है। उसी अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के रिक्त पद 7.8 प्रतिशत अर्थात् 2 हजार 8 सौ द्वारा बढ़े हैं। यह निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के बीच रोजगार की मांग में विशिष्ट अंतर को दर्शाता है।
थोक व्यापार में भारी गिरावट: उद्योग के अनुसार देखें तो थोक व्यापार क्षेत्र में रोजगार के रिक्त पद सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है। इस क्षेत्र में रिक्त पदों में 18 प्रतिशत की गिरावट हुई है। इसी तरह, व्यावसायिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सेवा क्षेत्रों में भी 17.3 प्रतिशत की कमी आई है। इन क्षेत्रों में आई भारी कमी ने समग्र निजी क्षेत्र के रिक्त पदों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके विपरीत, खुदरा व्यापार क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खुदरा व्यापार में रिक्त पद 24.5 प्रतिशत बढ़े हैं, जो उद्योगगत दृष्टि से सबसे बड़ा इजाफा है।
वार्षिक स्थिति से तुलना करने पर, अगस्त तक के एक वर्ष के लिए भी ऑस्ट्रेलिया में रोजगार के रिक्त पद 1.3 प्रतिशत घटे हैं। ऑस्ट्रेलिया के नवीनतम रोजगार आंकड़ों से श्रम बाजार की असमान स्थिति स्पष्ट होती है। निजी क्षेत्र के विशेषकर थोक व्यापार और व्यावसायिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कर्मचारियों की मांग कम हुई है, जबकि खुदरा व्यापार, वित्तीय एवं बीमा सेवाओं तथा सार्वजनिक क्षेत्र में रिक्त पदों की संख्या बढ़ी है। इस कारण, संपूर्ण रूप से रोजगार के रिक्त पद कम होने के बावजूद सभी उद्योगों में समान रूप से मांग में कमजोरी नहीं आई है।





