Skip to main content

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन

भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता नामावली के ‘स्पेशियल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) में पाई गई अनियमितताओं के विरोध में देशभर प्रदर्शन तीव्र हो गए हैं। ये प्रदर्शन अक्टूबर 2 (गांधी जयंती) से शुरू होकर शनिवार और रविवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहे। दिल्ली में पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और निषेधाज्ञा लागू की है, बावजूद इसके नागरिक, विद्यार्थी संगठन और विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए हैं। रविवार को ‘सिटिजन्स मार्च’ और नेताओं की गिरफ्तारी के बीच दिल्ली में आम जनता, सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र संगठन इंडिया गेट से जन्तरमंतर तक ‘सिटिजन्स मार्च’ आयोजित कर रहे थे, हालांकि पुलिस ने जन्तरमंतर तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी।

मार्च के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। नेहा बोरा ने गिरफ्तारी के समय पुलिस वाहन में महिला पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति का आरोप लगाया। प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को पुलिस ने उल्टा पकड़ा। भारद्वाज ने सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा, “ये हवा में लटक रहे जूते मेरे हैं। आज इंडिया गेट पर दिल्ली पुलिस ने मुझे उल्टा लटका दिया ताकि कैमरा मेरा चेहरा पकड़ न सके।”

इसी प्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव को भी पुलिस ने जन्तरमंतर की ओर जाते समय जबरदस्ती हिरासत में लिया। यादव ने कहा, “सिटिजन्स मार्च के दौरान आज भी निर्धारित प्रदर्शन स्थल जन्तरमंतर जाते हुए पुलिस ने जबरन हिरासत में लिया। यह केवल एक दिन का प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, यह लगातार जारी रहने वाला संघर्ष है जो तब तक चलेगा जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से हटाए नहीं जाते।” रविवार शाम को यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी जन्तरमंतर मार्ग पर धरना देकर प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस ने एक्स पर लिखा, “जन्तरमंतर को पुनः जनता के हवाले करने और ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हम जन्तरमंतर मार्ग पर धरने पर हैं।”

शनिवार को महिला पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप भी लगे। शनिवार को भी दिल्ली पुलिस ने जन्तरमंतर जाने वाले प्रदर्शनकारियों को केरला हाउस के पास रोककर हिरासत में लिया। प्रदर्शन में आइसा के कार्यकर्ताओं के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल थे। इस दौरान आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने महिला पुलिसकर्मियों द्वारा कुण्डी और नाखूनों से चोट पहुंचाए जाने का आरोप लगाया। दो महिला पत्रकारों और एक युवती प्रदर्शनकारी ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप भी लगाए। एक महिला पत्रकार के अनुसार, आइसा अध्यक्ष को गिरफ्तार करते समय एसपी विवेक भगत ने अपनी छाती से धक्का दिया। इस घटना के खिलाफ शनिवार और रविवार को पत्रकारों ने संसद सड़कों पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया।

मुंबई में ‘गर्जना मोर्चा’ और बॉलीवुड कलाकारों का समर्थन दिल्ली तक सीमित न रहकर मुंबई में भी व्यापक रूप से फैला है। रविवार को उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने संयुक्त रूप से ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का आयोजन किया। इस ऐतिहासिक मार्च में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे स्वयं शामिल हुए। इससे पहले अक्टूबर 2 को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजपूर्ण रिपोर्ट के बाद कर्नाटक जनता पार्टी (CJP) ने मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन किया था। हालांकि पुलिस ने अनुमति न दी, फिर भी हजारों लोग एकत्रित हुए। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार की अक्षमता के कारण दो महीने में दूसरी बार प्रदर्शन करना पड़ा। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू द्वारा दिए गए मतदान अधिकारों को सरकार के हस्तक्षेप से मुक्त करने की मांग की। मुंबई के प्रदर्शन में बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, अभिनेत्री शबाना आज़मी और संगीतकार विशाल ददलानी जैसे नामी हस्तियों ने भी एकजुटता दिखाई।

निर्वाचन आयोग के बचाव और नई योजना के बावजूद विरोध बढ़ने पर आयोग ने शुक्रवार सुबह एक्स पर सूचना जारी कर बताया कि ‘स्पेशियल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) में छूट गए नामों को शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। आयोग के अनुसार इस अभियान में बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाएंगे, युवा मतदाताओं को प्राथमिकता दी जाएगी और बूथ स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन कर फार्म-6 भरवाए जाएंगे। लेकिन आंदोलनकारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लेकर खड़े हैं।