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लेखक: space4knews

गिजाको उपचारको नयाँ विधि पत्ता लाग्यो – Online Khabar

गिजा रोग के लिए नई उपचार पद्धति का पता चला

मिनेसोटा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मुख के भीतर बैक्टीरिया के संचार में बाधा डालकर गिजा रोग नियंत्रण करने की नई विधि खोजी है। अध्ययन में दांत के प्लाक में बैक्टीरिया रासायनिक संकेतों के माध्यम से वृद्धि दर को संतुलित रखते हैं, और संचार रोकने पर हानिकारक बैक्टीरिया की संख्या कम होती है। सह-प्राध्यापक मिकेल इलियास ने बताया कि ‘ल्याक्टोनेज’ एंजाइम की मदद से बैक्टीरिया के संचार को रोका जा सकता है, जिससे मुँह के स्वास्थ्य को बिगड़ने से बचाया जा सकेगा। २५ वैशाख, काठमांडू।

वैज्ञानिकों ने हमारे मुख में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट करने की बजाय, उनके बीच ‘संचार’ में रुकावट डालकर गिजा रोग को नियंत्रित करने की एक अनोखी विधि खोजी है। मिनेसोटा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस नए अध्ययन में पाया गया कि दांत के प्लाक में मौजूद बैक्टीरिया रासायनिक संकेतों का उपयोग कर अपनी वृद्धि को नियंत्रित करते हैं। वैज्ञानिकों ने जब इन रासायनिक संकेतों को अवरुद्ध किया तो गिजा रोग उत्पन्न करने वाले हानिकारक सूक्ष्मजीवों की संख्या घट गई और स्वास्थ्यवर्धक बैक्टीरिया की वृद्धि हुई।

पहले एंटीबायोटिक्स या कीटाणुनाशक दवाएं खराब और अच्छे दोनों तरह के बैक्टीरिया को मारती थीं। लेकिन इस नई पद्धति से मुँह के स्वस्थ माइक्रोबायोम को संरक्षित करते हुए उपचार संभव हो पाया है। मुँह में लगभग ७०० प्रजातियों के बैक्टीरिया रहते हैं, जो एक-दूसरे से ‘कोरम सेंसिंग’ नामक प्रक्रिया द्वारा संदेश भेजते हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया कि गिजा के ऊपरी हिस्से (जहाँ ऑक्सीजन होता है) तथा गिजा के भीतरी हिस्से (जहाँ ऑक्सीजन नहीं होता) में बैक्टीरिया की संचार प्रक्रिया अलग-अलग होती है।

जहाँ ऑक्सीजन होता है, वहाँ बैक्टीरिया के संचार को रोकने पर स्वस्थ बैक्टीरिया की बढ़ोतरी हुई, जबकि जहाँ ऑक्सीजन नहीं था, संचार से रोग उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया सक्रिय हुए। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और सह-प्राध्यापक मिकेल इलियास के अनुसार दांत के प्लाक का पारिस्थितिक तंत्र जंगल के पर्यावरण की तरह विकसित होता है। प्रारंभ में आने वाले बैक्टीरिया हानिकारक नहीं होते, लेकिन बाद में आने वाले ‘रेड कॉम्प्लेक्स’ नामक बैक्टीरिया गिजा के गंभीर रोगों का कारण बनते हैं। इनका संचार ‘ल्याक्टोनेज’ नामक एंजाइम की मदद से रोका जा सकता है, जो मुँह की स्वास्थ्य खराब होने से बचाता है। इस खोज से भविष्य में दंत चिकित्सा के साथ-साथ शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाले संक्रमण के उपचार में भी महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। शरीर में बैक्टीरिया के असंतुलन से कैंसर जैसे रोग हो सकते हैं, इसलिए वैज्ञानिक बैक्टीरिया को मारने के बजाय उनके व्यवहार को नियंत्रित कर स्वस्थ अवस्था में वापस लाने की रणनीति को अधिक प्रभावी मानते हैं।

भारत में जानवरों के प्रति होने वाली क्रूरता की स्थिति अत्यंत गंभीर

⚠️ देख रहे लोगों के लिए चेतावनी: इस पोस्ट में जानवरों के प्रति होने वाली क्रूरता से संबंधित तस्वीरें हैं। जागरूकता और रिपोर्टिंग के लिए साझा किया गया। भारत में जानवरों के प्रति होने वाली क्रूरता की स्थिति अत्यंत गंभीर पाई गई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी की गई ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार जानवरों के प्रति होने वाली क्रूरता गम्भीर स्थिति में है। एनसीआरबी ने पहली बार जानवरों के खिलाफ होने वाले अपराधों का अलग आंकड़ा जारी किया है। उक्त रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर जानवरों के प्रति क्रूरता करने के कुल 9,039 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें शामिल 10,312 आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्तियों में से 99.5 प्रतिशत अर्थात् 10,257 वयस्क पुरुष हैं।
रिपोर्ट में उल्लेख है कि पुलिस ने जानवरों के प्रति अपराधों की जांच में सक्रियता दिखाई है। पुलिस ने 96.7 प्रतिशत मामलों में अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) प्रस्तुत कर दिया है। हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया में देरी भी बताई गई है। अदालत में लंबित मामलों में से 82.2 प्रतिशत अभी विचाराधीन हैं। कुछ मामलों का निर्णय 10 वर्षों से अधिक समय से लंबित है। लेकिन, फैसलों में 80.5 प्रतिशत मामलों में सजाया गई है और महानगर क्षेत्रों में सजाय की दर 93.3 प्रतिशत तक पहुंचती है। इसके अलावा, भारत में जानवरों की चोरी की घटनाएं भी उल्लेखनीय हैं। इसी वर्ष 8,660 जानवर चोरी के मामले दर्ज किए गए हैं। चोरी हुए जानवरों का कुल बाजार मूल्य लगभग 48 करोड़ 80 लाख रुपये आंका गया है। चोरी हुए जानवरों में से 44.9 प्रतिशत पुलिस द्वारा बरामद किए गए हैं, जो अन्य चोरी हुई संपत्तियों की तुलना में बेहतर बरामदगी दर है। अब जब भारत में राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़े उपलब्ध हैं, ऐसे मामलों की प्रकृति को समझना और अपराध रोकना आसान होगा।

प्रलोपाले सन्तोष परियार के अध्यक्षताव में एकता महाधिवेशन करने का निर्णय लिया

समाचार सारांश

  • प्रगतिशील लोकतान्त्रिक पार्टी ने अपना महाधिवेशन सन्तोष परियार के अध्यक्षताव में करने का निर्णय लिया है।
  • पार्टी अध्यक्ष परिषद ने सचिवालय का गठन करते हुए एकता महाधिवेशन के लिए वडाओं, पालिका और जिलों में भेला करने का निर्णय लिया है।

२५ वैशाख, काठमांडू । प्रगतिशील लोकतान्त्रिक पार्टी (प्रलोपा) ने अपना महाधिवेशन सन्तोष परियार के अध्यक्षताव में आयोजित करने का निर्णय लिया है।

गुरुवार को हुई पार्टी अध्यक्ष परिषद की बैठक में वैशाख ११ और १२ को आयोजित केन्द्रीय समिति के विस्तारित बैठक द्वारा दिए गए अधिकार के आधार पर अध्यक्ष परिषद ने कार्य का विभाजन करते हुए आगामी महाधिवेशन की नेतृत्व जिम्मेदारी परियार को सौंपी है।

साथ ही, बैठक में एकता महाधिवेशन के लिए सचिवालय का गठन करने का निर्णय भी लिया गया है।

सचिवालय में अध्यक्ष परिषद के सदस्य, प्रदेश इंचार्ज, विभाग प्रमुख एवं पार्टी निर्माण में सक्रिय अन्य सदस्य शामिल होंगे, ऐसा प्रलोपा ने बताया है।

प्रलोपा ने महाधिवेशन के लिए वडाओं, पालिका और जिलों में एकता भेला आयोजित करने तथा कमिटी गठन करने का निर्णय भी लिया है।

इसके अतिरिक्त, प्रलोपा के संरक्षक डॉ. बाबुराम भट्टराई ने कोई भी संगठनात्मक जिम्मेदारी न लेते हुए स्वतंत्र रहकर सहयोग का आश्वासन दिया है, जिसे पार्टी ने स्वीकार करते हुए नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

इन्डोनेसियामा ज्वालामुखी विस्फोट, २० जना पर्वतारोही बेपत्ता

इंडोनेशिया में ज्वालामुखी विस्फोट, 20 पर्वतारोही लापता

इंडोनेशिया के पूर्वी हलमहेरा द्वीप पर माउंट डुकोनो ज्वालामुखी के विस्फोट के कारण 20 पर्वतारोही लापता हो गए हैं। लापता लोगों में नौ सिंगापुर के नागरिक शामिल हैं और इस विस्फोट से लगभग 10 किलोमीटर के क्षेत्र में धुआं फैला है। बचाव अधिकारियों ने AFP को बताया कि लापता व्यक्तियों में नौ सिंगापुर नागरिक हैं।

अधिकारियों ने कहा है कि बचाव दल राहत कार्यों में जुटा है, लेकिन घायल लोगों के बारे में अभी कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। स्थानीय बचाव अधिकारी इवान रामदानी ने रिपोर्टों के आधार पर पुष्टि की है कि लापता 20 लोगों की तलाश जारी है। वैज्ञानिकों ने हाल के दिनों में इंडोनेशिया में ज्वालामुखीय गतिविधि में वृद्धि की चेतावनी दी थी, जिसके कारण 17 अप्रैल से यह क्षेत्र आगंतुकों के लिए बंद कर दिया गया था।

इंडोनेशिया के भू-विज्ञान विभाग के प्रमुख लाना सारियाले ने पुष्टि की है कि विस्फोट का प्रभाव उत्तरी मालुक प्रांत के माउंट डुकोनो की चोटी से लगभग 10 किलोमीटर दूर तक फैला है। उन्होंने बताया कि विस्फोट की राख उत्तर दिशा में काफी फैल गई है और उस क्षेत्र के आवासीय इलाकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। इंडोनेशिया एक विशाल द्वीपसमूह राष्ट्र है और इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण यहां प्रायः भूकंपीय और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं।

मानव के साथ सह-अस्तित्व ने कुत्ते के मस्तिष्क में लाया बड़ा बदलाव, अध्ययन में क्या कहा गया?

पालतू बनने के दौरान कुत्ते के मस्तिष्क का आकार लगभग ४६ प्रतिशत तक घट गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनकी बुद्धिमत्ता में कमी आई है, ऐसा वैज्ञानिकों ने बताया है। इंसान और कुत्ते के बीच हजारों वर्षों पुराना रिश्ता माना जाता है। जंगली भेड़िये के वंशज माने जाने वाले कुत्ते आज इंसान के सबसे करीबी साथी हैं। घर की सुरक्षा, शिकार, पशुपालन से लेकर भावनात्मक साथी तक के अनेक रोल में कुत्ता खुद को स्थापित करता आ रहा है। लेकिन इंसान के साथ इस निकटता ने न केवल उनके शारीरिक और व्यवहारिक तौर-तरिके, बल्कि मस्तिष्क में भी बड़े परिवर्तन लाए हैं, ऐसा एक नए अध्ययन ने दिखाया है। वर्तमान में रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार पालतू बनाए गए कुत्तों के मस्तिष्क का आकार करीब ४६ प्रतिशत तक छोटा पाया गया है। हालांकि शोधकर्ताओं ने इसे सीधे बुद्धिमत्ता में गिरावट के साथ जोड़ने से इंकार किया है।

‘नियोलिथिक युग’ के बाद नजर आए इस बड़े परिवर्तन को लेकर विज्ञान ने लंबे समय से यह सवाल उठाया है कि जब कुत्ते इंसान के साथ रहने लगे, तो उनके सोचने की क्षमता, व्यवहार और मस्तिष्क में क्या-क्या बदलाव आए? इस सवाल का जवाब खोजने के लिए फ्रांस के वैज्ञानिकों ने व्यापक शोध किया। उन्होंने आधुनिक कुत्तों, डिंगो और भेड़ियों समेत २०७ कपालों का अध्ययन किया, जिनमें २२ प्रागैतिहासिक नमूने भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने सीटी स्कैन तकनीक का उपयोग कर खोपड़ी के अंदर की संरचना का वर्चुअल मॉडल तैयार किया, जिससे मस्तिष्क आकार का भरोसेमंद डेटा प्राप्त हुआ। अध्ययन में पाया गया कि लगभग १५ हजार साल पहले इंसानों ने कुत्तों को पालतू बनाना शुरू किया था, पर उस शुरुआती दौर में कुत्तों का मस्तिष्क भेड़िये जैसा बड़ा था। असली बदलाव नियोलिथिक युग में शुरू हुआ।

नियोलिथिक युग वह ऐतिहासिक काल है जब इंसानों ने घुमंतू जीवनशैली छोड़कर स्थायी कृषि करना शुरू किया। गांव और बस्तियों में बसने लगे, तब कुत्तों की भूमिका भी बदलने लगी। पहले जंगली परिवेश में जटिल निर्णय लेने पड़ते थे, लेकिन अब कुत्ते इंसानों के आसपास रहते, बस्ती की रक्षा करते और भोजन पर निर्भर रहते थे। शोधकर्ताओं के अनुसार जीवनशैली में इस बदलाव ने कुत्ते के मस्तिष्क की संरचना पर प्रभाव डाला होगा। अध्ययन के मुख्य लेखक थोमस चुची कहते हैं, ‘पालतू बनाना मूर्खता नहीं लाता, बल्कि इंसान को समझने की क्षमता बढ़ाता है।’ ‘आज के कुत्ते अपनी बुद्धिमत्ता का पूरा उपयोग शायद न कर पाएं, लेकिन वे बेहद चतुर हैं। पालतू बनाने से उनकी बुद्धिमत्ता कम नहीं हुई, बल्कि इंसानों को समझने और संवाद करने में उन्हें और अधिक कुशल बनाया गया है।’

सरकार कृषि अनुसंधान के लिए बजट की कमी नहीं होने देगी

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्रालय के सचिव डॉ. राजेंद्रप्रसाद मिश्र ने कृषि अनुसंधान के लिए सरकार बजट की कमी नहीं होने का आश्वासन दिया।
  • सचिव मिश्र ने कहा कि कृषि अनुसंधान के लिए जब भी ठोस प्रस्ताव आएगा, सरकार तुरंत बजट उपलब्ध कराएगी।
  • सरकार कृषि मंत्रालय की रिक्त पदों की पूर्ति और पुनर्गठन के लिए नीति एवं कानूनी कार्य आगे बढ़ा रही है, सचिव मिश्र ने बताया।

२५ वैशाख, काठमांडू। कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्रालय के सचिव डॉ. राजेंद्रप्रसाद मिश्र ने कहा है कि कृषि अनुसंधान के लिए सरकार बजट की कमी नहीं होने देगी।

जहाँ कृषि क्षेत्र में बजट की कमी बनी हुई थी, वहाँ अब सरकार इस क्षेत्र के लिए बजट की कोई कमी नहीं होने का संकल्प व्यक्त कर रही है।

शुक्रवार को ललितपुर में आयोजित नेपाल कृषि अनुसंधान परिषद के ३५वें वार्षिकोत्सव समारोह में संवाद करते हुए सचिव मिश्र ने दावा किया कि सरकार कृषि अनुसंधान को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है।

कृषि अनुसंधान के लिए ठोस प्रस्ताव आने पर सरकार तुरंत बजट की व्यवस्था करेगी, सचिव मिश्र ने आश्वासन दिया।

उन्होंने कहा कि बजट की कमी से प्रभावित कृषि अनुसंधान कार्यक्रम के लिए सरकार कभी भी आवश्यक बजट की व्यवस्था कर सकती है।

सचिव मिश्र ने कहा, ‘रिक्त पद इस वर्ष से भरने शुरू हो गए हैं। नियमावली आ गई है। पुनर्गठन का काम शुरू हो गया है। कानून संशोधन के लिए कार्यदल भी गठित किया गया है। नेपाल सरकार कृषि अनुसंधान को अत्यंत प्राथमिकता दे रही है।’

सचिव मिश्र ने यह भी बताया कि सरकार कृषि मंत्रालय के रिक्त पदों को नीतिगत और कानूनी रूप से भरने के प्रयास कर रही है ताकि जनशक्ति की कमी न हो।

परराष्ट्र मन्त्रालय – Online Khabar

इरान के कब्जे में रहे अमृत झा को नेपाल लाने का कार्य जारी: विदेश मंत्रालय

समाचार सारांश

  • सरकार ने इरान के नियंत्रण में रहे अमृत झा को नेपाल लाने की प्रक्रिया जारी रखी है।
  • विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोकबहादुर पौडेल ने कानूनी प्रक्रिया इरान की विषम परिस्थितियों के कारण शेष होने की बात कही।
  • अमृत झा को हर्मुज क्षेत्र के अब्बास बंदरगाह से इरानी सेना ने हिरासत में लिया था।

२५ वैशाख, काठमाडौँ। सरकार ने इरान के नियंत्रण में रहे अमृत झा को नेपाल लाने की प्रक्रिया जारी रखी है। विदेश मंत्रालय ने नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वे अभी भी इरानी सेना के नियंत्रण में हैं और कानूनी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

मंत्रालय के प्रवक्ता लोकबहादुर पौडेल ने कहा, ‘इरानी नियंत्रण में रहे अमृत झा की रिहाई की प्रक्रिया चल रही है। इरान की वर्तमान विषम परिस्थितियों के कारण कानूनी प्रक्रिया अभी बाकी है।’

उन्होंने बताया कि वे संबंधित अधिकारियों और परिवार के संपर्क में हैं और रिहाई के प्रयास निरंतर जारी हैं।

इरान में ईंधन लेकर लौटने के दौरान, हर्मुज क्षेत्र के अब्बास बंदरगाह से फ़ारसी खाड़ी के होर्मुज स्ट्रेट में उन्हें इरानी रिवोल्यूशन गार्ड ने हिरासत में लिया था।

इजरायल, अमेरिका और इरान के बीच संभावित युद्ध शुरू होने से पहले ईंधन लाने के लिए वे इरान गए थे। दुबई की एक जलयान कंपनी में कप्तान के रूप में काम कर रहे झा को तेल लेकर दुबई लौटते वक्त हिरासत में लिया गया।

 

नैनसिंह महर के विचार

२५ वैशाख, डडेल्धुरा । नेपाली कांग्रेस के नेता नैनसिंह महर ने कहा है कि जनता को डराकर घरों को गिराने जैसा अमानवीय कार्य तुरंत ही सरकार द्वारा रोका जाना चाहिए। नेपाल प्रेस यूनियन डडेल्धुरा द्वारा शुक्रवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने कहा कि देश के लिए जमीन और जनता दोनों अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, फिर भी सरकार जनजीविका के प्रति संवेदनशीलता धीरे-धीरे कम करती जा रही है।

नेता महर ने संसद अधिवेशन छोड़कर अध्यादेश के माध्यम से शासन चलाने को संसद की सर्वोच्चता पर प्रत्यक्ष हमला करार दिया। उन्होंने आगे कहा कि कार्यपालिका सरकार शक्ति संतुलन की अवधारणा के खिलाफ न्यायालय की स्वतंत्रता और परंपरा पर नियंत्रण लगाने का प्रयास कर रही है।

पार्टी की आंतरिक राजनीति से संबंधित संचारकर्मी के प्रश्न का उत्तर देते हुए महर ने कहा कि वे गुटबंदी से ऊपर उठकर एक मजबूत, गतिशील और रूपांतरित कांग्रेस के निर्माण में विश्वास रखते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि आगामी कांग्रेस को लोकतंत्र, संसदीय सर्वोच्चता और प्रेस स्वतंत्रता के संरक्षण में और भी कड़ा भूमिका निभानी चाहिए।

सुनसरीबाट लागुऔषधसहित एकजना पक्राउ – Online Khabar

सुनसरी में लगुऔषध सहित एक व्यक्ति गिरफ्तार

पुलिस ने सुनसरी के इटहरी उपमहानगरपालिका-१९ ब्रह्मपुर से ३८ वर्षीय चक्रबहादुर जिमी को २४ ग्राम ४४ मिलीग्राम ब्राउन सुगर के साथ गिरफ्तार किया है। इलाका प्रहरी कार्यालय इटहरी और गैसार सामुदायिक पुलिस बिट की टीम ने लगुऔषध कारोबार की सूचना पर उन्हें गिरफ्तार किया।

जिमी के पास से पुलिस ने एक मोटरसाइकिल, १९,९८० रुपये नकद और एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है। इस मामले में पुलिस अतिरिक्त जांच कर रही है। २५ वैशाख को हुई यह घटना सुनसरी में लगुऔषध कारोबार में बढ़ोतरी के संकेत देती है।

स्थानिय स्तर पर कानूनी विरुद्ध शुल्क वसूलने वाले विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई जिम्मेदारी स्थानीय सरकारों की होगी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों द्वारा कानूनी रूप से अस्वीकृत नामांकन और वार्षिक शुल्क वसूलने के मामले में कार्रवाई की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी स्थानीय सरकारों की होगी। सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने बताया कि शिक्षा नियमावली के अनुसार एक ही स्तर पर एक से अधिक बार नामांकन शुल्क वसूलना मना है और नई नियमावली अभी लागू नहीं हुई है। सरकार ने स्थानीय सरकारों को कार्रवाई में सहयोग देने का आश्वासन दिया है तथा इन शुल्क वसूलने संबंधी शिकायतों को स्थानीय सरकारों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की है। २५ वैशाख, काठमांडू।

विद्यालयों द्वारा गैरकानूनी रूप से नामांकन और वार्षिक शुल्क वसूलने के मामले में सरकार ने निगरानी और कार्रवाई की मुख्य जिम्मेदारी स्थानीय सरकारों को सौंप दी है। ऐसे विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई में संघीय सरकार और प्रशासन भी स्थानीय सरकारों को पूरा समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पोखरेल ने पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर में विद्यालय शुल्क और छात्र आंदोलनों से संबंधित सरकार के दृष्टिकोण को साझा किया।

पोखरेल ने कहा, ‘नियमावली के अनुसार, एक ही स्तर पर एक बार से अधिक नामांकन शुल्क लेना प्रतिबंधित है।’ उन्होंने वार्षिक शुल्क के नाम पर हो रही वसूली पर निरंतर निगरानी की जानकारी दी। यदि किसी विद्यालय ने निर्धारित शुल्क से अधिक या गैरकानूनी रूप से शुल्क वसूला है, तो कक्षा १२ तक की निगरानी और नियमन करने वाली संस्था स्थानीय सरकारें ही होंगी।

स्थानीय सरकारों के जनप्रतिनिधियों ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई का संकल्प व्यक्त किया है। पोखरेल ने कहा, ‘हमें मिली शिकायतें स्थानीय सरकारों को भेजी जाती हैं। कार्रवाई में यदि संघीय सरकार से सहयोग की आवश्यकता होगी तो हम तत्पर हैं।’

भक्तपुरमा २५ लाख बढीका गरगहना चोरी – Online Khabar

भक्तपुर में 25 लाख से अधिक मूल्य की आभूषण चोरी

भक्तपुर के चांगुनारायण नगरपालिका–4, प्रगतितोल क्षेत्र में 25 लाख 77 हजार रुपये के आभूषण और नकद चोरी की घटना हुई है। चोरी में शामिल व्यक्ति अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं। 25 वैशाख, काठमाडौं। भक्तपुर के चांगुनारायण नगरपालिका–4, प्रगतितोल क्षेत्र में 25 लाख रुपये से अधिक मूल्य की आभूषण चोरी हुई है। इस क्षेत्र में रहने वाले सन्ध्या तामाङ, जगमाया फुयाल, जय तामाङ और आनन्द कुमार के कमरे से बिहीवार शाम सुन के विविध आभूषण और नकद मिलाकर लगभग 25 लाख 77 हजार रुपये के धन-सम्पत्ति चोरी होने की सूचना पुलिस ने दी है। चोरी में संलग्न व्यक्तियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

अलास्का मेगासुनामी: अब तक दर्ज सबसे बड़े दूसरे घटना

‘५०० मीटर ऊँचा लहर’: अलास्का में घटित मेगासुनामी अब तक दर्ज सबसे बड़े मेगासुनामी में दूसरी सबसे बड़ी घटना है। पिछले वर्ष अलास्का के एक पर्वत के धंसने से समुद्र में ५०० मीटर ऊँची लहर उत्पन्न हुई थी। वैज्ञानिकों ने इस ‘मेगासुनामी’ को अभिलेखों में दर्ज दूसरी सबसे बड़ी घटना बताया है। इस घटना को जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनद पिघलने से होने वाले खतरे का एक स्पष्ट उदाहरण माना जा रहा है।

गत वर्ष हुई इस घटना पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई थी। लेकिन नए वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चला है कि छोटे भूकंपों के कारण पहाड़ टूट गया और ६.४ करोड़ घन मीटर चट्टान एक साथ पानी में गिर गई। इस चट्टान की मात्रा २४ विशाल पिरामिड जितनी मापी गई है।

ईश्वर जिसी: खेल क्षेत्र को उद्योग में बदलने का लक्ष्य

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद संरचित।

  • नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ की एसोसिएट कार्यसमिति सदस्य के रूप में चुने गए ईश्वर जिसी ने खेल क्षेत्र को उद्योग के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
  • ईश्वर जिसी नेपाल प्रीमियर लीग में लुम्बिनी लायन्स के अध्यक्ष के रूप में खेल क्षेत्र में सक्रिय हैं।
  • उद्योग वाणिज्य महासंघ में सदस्य बनने के बाद जिसी ने खेल क्षेत्र को व्यवस्थित और स्थायी उद्योग बनाने की योजना बनाई है।

२५ वैशाख, काठमाडौं । नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ की एसोसिएट कार्यसमिति सदस्य के रूप में निर्वाचित ईश्वर जिसी ने खेल क्षेत्र को उद्योग के रूप में विकसित करने का स्पष्ट लक्ष्य व्यक्त किया है।

उद्योग-व्यवसायियों के शीर्ष संगठन नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ की चुनाव में एसोसिएट कार्यसमिति सदस्य के पद पर विजयी होने वाले जिसी वर्तमान में नेपाल प्रीमियर लीग (एनपीएल) के माध्यम से खेल क्षेत्र से भी जुड़े हुए हैं।

एनपीएल में लुम्बिनी लायन्स के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत वह खेल क्षेत्र में भी योगदान दे रहे हैं। लुम्बिनी लायन्स ने एनपीएल के दूसरे संस्करण का खिताब जीत रखा है।

उन्होंने कहा, ‘स्वास्थ्य पर्यटन, खेल और उत्पादन आधारित कंपनियों के नेतृत्व का अनुभव मुझे मनोरंजन और खेल क्षेत्र के महत्व को बेहतर समझने में मदद मिला है।’

जिसी ने बताया कि खेल क्षेत्र केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है बल्कि यह पर्यटन के विकास से लेकर अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। ‘खेल क्षेत्र केवल मनोरंजन के लिए सीमित नहीं रहकर समग्र व्यावसायिक चक्र को एकठ्ठा करते हुए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर सकता है,’ उन्होंने कहा। ‘यह पर्यटन, रोजगार, उत्पादन, सेवा एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सकारात्मक प्रभाव डालते हुए देश को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।’

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ की एसोसिएट कार्यसमिति सदस्य बनने के बाद वह खेल क्षेत्र को व्यवस्थित करने और एक स्थायी उद्योग के रूप में स्थापित करने के लिए पहल करेंगे। ‘खेल क्षेत्र को व्यवस्थित, पेशेवर और स्थायी उद्योग के रूप में स्थापित करना मेरी नई और प्राथमिक योजना होगी,’ उन्होंने कहा।

कर्मचारी झर्केर बोल्छन्, परीक्षण गर्न निजीमा पठाउँछन् – Online Khabar

कर्मचारी झुंझलाते हैं, परीक्षण निजी में भेजे जाते हैं – स्वास्थ्य मंत्रालय में शिकायतों का घनघोर दोहराव

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा पश्चात तैयार।

  • स्वास्थ्य मंत्रालय की हेलो हेल्थ सेवा के माध्यम से प्रतिदिन १०० से अधिक अस्पताल कर्मियों के व्यवहार, औषधि की कमी तथा सेवा व्यवस्था सम्बन्धी शिकायतें आ रही हैं।
  • स्वास्थ्य बीमा बोर्ड ने सेवा प्रदाताओं को १६ अरब से अधिक भुगतान करने से वापस रखा है, जिसके कारण कई अस्पतालों ने बीमा सेवा बंद करनी शुरू कर दी है।
  • अस्पताल सुधार कार्यविधि–२०८२ लागू होने के बाद शिकायतों में सुधार देखा गया है और गंभीर शिकायतों को संबंधित निकायों को भेजा जा रहा है।

२५ वैशाख, काठमांडू। स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय के ‘हेलो हेल्थ’ में देश के विभिन्न हिस्सों से शिकायतें आ रही हैं। कुछ लोग अस्पतालों की लंबी कतारों की समस्या बताते हैं, तो कुछ औषधि की कमी और कर्मचारियों के खराब व्यवहार की व्यथा साझा करते हैं।

मंत्रालय के सूचना अधिकारी डॉ. भक्तबहादुर केसी के मोबाइल पर मंगलवार को नुवाकोट से ऐसी ही एक शिकायत आई।

फोन करने वाले की ७० वर्षीय माँ को उच्च रक्तचाप और हृदय रोग है। वह लंबे समय से वीर अस्पताल में इलाज करा रही हैं। पहले स्वास्थ्य बीमा से दीर्घ रोगियों को तीन महीने तक की औषधि दी जाती थी और परिवार डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन लेकर उसे हासिल कर सकता था।

पर अब अस्पताल ने नया नियम लागू किया है – अब केवल एक महीने की औषधि दी जाएगी और मरीज को स्वयं उपस्थित होना होगा। वृद्ध महिला को काठमांडू लाने में एम्बुलेंस किराया, रहने खाने का खर्च आदि आ जाते हैं, जो औषधि की कीमत से ज्यादा हैं।

फोन करने वाले ने शिकायत की, “बीमार को वीर अस्पताल ले जाना कठिन है। काठमांडू आना भारी खर्चीला है। नजदीक कहीं औषधि उपलब्ध कराने का विकल्प होना चाहिए।”

डॉ. केसी ने स्थानीय अस्पताल से समस्या हल करने का आश्वासन दिया।

एक सप्ताह पहले स्वास्थ्य सेवा विभाग (टेकेयू) में कॉल सेंटर (१११५) के कर्मचारियों के खराब व्यवहार की भी शिकायत आई थी।

त्रिवि शिक्षण अस्पताल के बिल काउंटर पर कार्यरत कर्मचारियों द्वारा महिला को धक्का देने का आरोप लगा। महिला ने कहा, ‘काउंटर के कुछ कर्मचारियों ने आवश्यक जानकारी नहीं दी, उल्टे फोन पर झुंझलाया। डॉक्टर से पूछने पर भी झुंझलाने का सामना करना पड़ा।’

ऐसे कर्मचारियों के व्यवहार से सेवा लेने वाले असहज महसूस कर रहे हैं। महिला ने स्वास्थ्य मंत्रालय से कर्मचारी प्रबंधन में सुधार कर सेवाग्राही-मित्र व्यवहार सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

स्वास्थ्य मंत्रालय में हेलो हेल्थ, कॉल सेंटर, फोन, हेलो सरकार, ईमेल और व्हाट्सएप पर प्रतिदिन १०० से अधिक शिकायतें आती हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में स्वास्थ्य सेवा, बीमा, अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारी व्यवहार संबंधी शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सिर्फ चैत्र में ही ४ हजार से अधिक लोगों ने शिकायत की है, जबकि जनवरी में मात्र १०० शिकायतें दर्ज हुई थीं।

सावन में ७४, भाद्र में ८८, आश्विन में ८४, कार्तिक में ९१, मंसिर में १०५, पौष में ८३, माघ में ९३ और फाल्गुन में १०४ सेवाग्राहियों ने स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें की थीं। स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने प्रतिदिन बढ़ते फोन कॉल के कारण सभी कॉल न उठाए जा पाने को स्वीकार करते हुए व्हाट्सएप से शिकायतें भेजने का आग्रह किया था, जिससे शिकायतों में वृद्धि हुई है।

‘सबसे अधिक शिकायत कर्मचारी व्यवहार पर है’

मंत्रालय के सूचना अधिकारी डॉ. केसी के अनुसार सबसे अधिक शिकायतें अस्पताल कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर हैं। ‘कर्मचारी गुस्से में बोलते हैं, झुंझलाते हैं, जवाब नहीं देते, धक्का मारते हैं जैसी कई शिकायतें हैं। हम इन्हें इकट्ठा करके संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को सुधार के लिए पत्र भेजते हैं।’

टिकट, टोकन तथा भीड़ प्रबंधन करने वाले कर्मचारियों के संबंध में भी शिकायतें अधिक आती हैं। पहली संपर्क में ही समस्या नजर आती है।

अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी गंभीर समस्या बन गई है। कुछ अस्पतालों में वीडियो एक्स-रे कराने वाले चिकित्सकों की कमी की शिकायत दर्ज हुई है।

पाटन अस्पताल की समस्या लेकर कुछ दिन पूर्व मंत्रालय में एक सेवाग्राही ने भी शिकायत की थी।

उन्होंने बताया, ‘मेरी बेटी के गले में समस्या थी, इसलिए पाटन गए थे। डॉक्टर ने वीडियो एक्स-रे कराने को कहा, लेकिन १० दिन बाद आने को कहा गया। सामान्य वीडियो एक्स-रे के लिए सप्ताहों तक इंतजार करना पड़ता है, मरीज की हालत क्या होगी?’

पैथोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट के कार्यालय समय में अनुपस्थिति, कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों की लंबी छुट्टियां या अन्य कारणों से अनुपस्थिति की भी शिकायतें मिल रही हैं।

सबसे अधिक शिकायतें वीर अस्पताल से आ रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वीर, पाटन और त्रिवि शिक्षण अस्पतालों में अधिक भीड़ के कारण शिकायतें ज्यादा आती हैं।

राष्ट्रीय ट्रॉमा सेंटर, निजामती अस्पताल, प्रसूति गृह, शहीद गंगालाल राष्ट्रीय हृदय केंद्र, कांती बाल अस्पताल, बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, कर्णाली स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, भक्तपुर कैंसर अस्पताल, भरतपुर अस्पताल, शहीद धर्मभक्त राष्ट्रीय प्रत्यारोपण केंद्र सहित अन्य स्थानों से भी शिकायतें प्राप्त होती हैं।

कुछ सेवाग्राही यह भी शिकायत करते हैं कि डॉक्टर अपनी बात स्पष्ट रूप से समझाते नहीं हैं।

गंगालाल अस्पताल गई एक सेवाग्राही ने बताया, ‘बड़े इंतजार के बाद पिता के ऑपरेशन का समय मिला, लेकिन सुबह से भूखा रखा गया, १० हजार रुपये की दवाएं खरीदने को कहा गया। दोपहर तक ऑपरेशन नहीं हुआ, अगले दिन शिफ्ट कर दिया गया। डॉक्टरों के ऐसे व्यवहार ने मरीज को शारीरिक और मानसिक दर्द बढ़ाया है।’

अस्पताल के भीतर कर्मचारियों के बीच समन्वय और संवाद की कमी भी समस्या के रूप में उभर रही है। कई सेवाग्राहियों को अस्पताल में कहाँ जाना है और कौन सी सेवा कहाँ उपलब्ध है, इसकी सामान्य जानकारी नहीं होती। संवाद कौशल की कमी के कारण भी शिकायतें बढ़ती हैं।

मरीज की पीड़ा को धैर्यपूर्वक सुनकर सरल तरीके से समझाना आवश्यक है। डॉक्टर के साथ संक्षिप्त या कमजोर संवाद उपचार को प्रभावित करता है।

सबसे अधिक अविश्वास चिकित्सकों के प्रति होता है। मरीज, परिजन तथा चिकित्सक के बीच लगातार संवाद या काउंसिलिंग कमजोर होने के कारण अविश्वास बढ़ता है।

लेकिन डॉक्टर यदि मरीज की बात ध्यान से सुनते हैं तो मरीज की पीड़ा आधी हो जाती है। ऐसा माहौल रोग की जल्दी पहचान और उपचार खर्च तथा अस्पताल में रहने का समय कम करता है।

डॉ. केसी कहते हैं, ‘अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा सौहार्दपूर्ण और पारदर्शी संवाद से कई समस्याओं का समाधान संभव है। अधिकांश शिकायतें कर्मचारियों के खराब व्यवहार से जुड़ी होती हैं।’

‘बीमा के तहत सेवा प्राप्त नहीं हो पा रही है’

स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम से जुड़ी शिकायतें भी बहुत हैं। कई अस्पतालों ने भुगतान न मिलने के कारण सेवा में कटौती या बंद कर दी है, जिससे मरीजों को सीधे परेशानी हो रही है।

स्वास्थ्य बीमा बोर्ड ने अब तक सेवा प्रदाताओं को १६ अरब से अधिक भुगतान बकाया रखा है। डॉ. केसी के अनुसार सरकार द्वारा अस्पतालों को भुगतान न कर पाने के कारण बीमा सेवाएं रुकी हुई हैं।

‘राशि भुगतान नहीं होने से कई अस्पतालों ने सेवा बंद की है, तो कई ने कम कर दी है। बीमा से सेवा न मिलने की शिकायतें बहुत हैं।’ डॉ. केसी कहते हैं।

कई सेवाग्राहियों को बीमा कैसे इस्तेमाल करना है, कहाँ जाना है और क्या सेवा मिलेगी, इसकी जानकारी नहीं है।

‘बहुत से लोग नहीं जानते कि बीमा जरूरी है, कैसे लेना है यह भी पता नहीं है। रोगी को खर्च, प्रक्रिया और सेवा के बारे में स्पष्ट जानकारी दिए जाने से शिकायतें कम हो सकती थीं।’

मशीन खराबी, औषधि की कमी और सफाई में कमजोरी

अस्पतालों के उपकरण खराब होने, मशीनों के काम न करने, औषधि की कमी और सफाई कमजोर होने की शिकायतें भी नियमित आती रहती हैं। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त औषधि की कमी अधिक है।

कुछ ने अस्पताल में भोजन की गुणवत्ता खराब होने, शौचालय गंदे रहने और वातावरण अस्वस्थ होने की भी शिकायत की है।

स्वास्थ्य मंत्रालय में केवल अस्पताल से ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित शिकायतें भी आ रही हैं। स्थानीय क्षेत्रों में उद्योगों से उत्पन्न धूल, धुआं, पानी और ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि को लेकर निगम में शिकायत की जाती है।

‘उद्योग से निकलने वाली धूल और गंदगी ने वातावरण को नष्ट किया है, पानी प्रदूषित हो रहा है’ ऐसी शिकायतें आती हैं, डॉ. केसी कहते हैं।

सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों द्वारा मरीजों को अनावश्यक रूप से निजी डायग्नोस्टिक सेंटर या अन्य अस्पतालों में भेजने की भी शिकायतें अधिक हैं।

मधेश विज्ञान प्रतिष्ठान में भी इस प्रकार की शिकायतें आई हैं। एक सेवाग्राही ने कहा, ‘छेद से पसीना आ रहा है, अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिलते। मशीन क्लिनिक भेजता है जहाँ ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। क्या डॉक्टर नजदीक होकर काम नहीं कर सकता?’

मंत्रालय ने बताया है कि हाल ही में ‘अस्पताल सुधार कार्यविधि–२०८२’ लागू की गई है और इसके बाद सुधार देखने को मिला है। शिकायतें आने पर संबंधित निकाय को पत्राचार और फोन द्वारा लिखा जाता है।

‘फोन और पत्र भेजकर निगरानी बढ़ाई है और सुधार हुआ है,’ डॉ. केसी कहते हैं। ‘कुछ मामलों में अस्पताल ने जवाब लिखकर सुधार करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।’

भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता या गंभीर लापरवाही से जुड़ी शिकायतें सुशासन तथा जांच एजेंसियों को भेजी जाती हैं।

डा. केसी कहते हैं, ‘हम स्वास्थ्य सेवा सुधार और गंभीर प्रकरणों पर अधिक ध्यान देते हैं और संबंधित पक्षों को भेजते हैं।’

महासचिव शङ्कर पोखरेल ने संसद् अधिवेशन स्थगन और प्रधानन्यायाधीश सिफारिश पर की आलोचना

नेकपा एमाले के महासचिव शङ्कर पोखरेल ने संसद् अधिवेशन को स्थगित कर अध्यादेश के माध्यम से प्रधानन्यायाधीश की सिफारिश को संवैधानिक परिषद के निर्णय का नतीजा बताया है। पोखरेल ने कहा कि सरकार द्वारा वरिष्ठ न्यायाधीशों की अनदेखी कर प्रधानन्यायाधीश की सिफारिश की गई है, जो न्यायालय को अपनी प्रभावक्षेत्र में रखने का प्रयास है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कदम से संसदीय लोकतंत्र में शक्ति संतुलन कमजोर होगा और देश अधिनायकवादी मार्ग पर प्रवेश करने का जोखिम बढ़ाएगा। २५ वैशाख, काठमाडौं।

पोखरेल ने कहा कि पहले से आह्वान किए गए संसद् अधिवेशन को स्थगित कर अध्यादेश के माध्यम से निर्णय लेना केवल प्रक्रिया के विषय नहीं बल्कि इसके उद्देश्य पर भी सवाल उठता है। उन्होंने कहा, ‘इसका स्पष्ट संकेत संवैधानिक परिषद के निर्णय में परिलक्षित हुआ।’ न्यायालय जैसी गरिमामय संस्था में तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की अनदेखी कर प्रधानन्यायाधीश की सिफारिश असामान्य घटना है। यह दर्शाता है कि सरकार न्यायालय को स्वतंत्र निकाय की बजाय अपने प्रभाव के तहत रखने की कोशिश कर रही है।

‘पिछले दिनों जब न्यायालय पर राजनीतिकरण का आरोप लगता रहा, तब न्यायिक सक्रियता अधिकतर सरकार के विरुद्ध दिखी,’ पोखरेल ने कहा, ‘शायद वर्तमान सरकार अब न्यायालय में अपने पक्ष में न्यायिक पक्षपात स्थापित करने की कोशिश कर रही है।’ उन्होंने कहा कि इससे संसदीय लोकतंत्र में शक्ति संतुलन कमजोर होगा और देश अधिनायकवादी पथ पर फंसने का खतरा बढ़ेगा। वे पिछले राजनीतिक घटनाक्रम को याद करते हुए बोले, ‘भाद्र २३ और २४ की गलत प्रवृत्तियों के खिलाफ समय रहते दृढ़ता से खड़ा न हो पाने के कारण समाज और राष्ट्र को इसका दुख अभी भी भुगतना पड़ रहा है।’