Skip to main content

लेखक: space4knews

युकी आङदेम्बे: क्रिकेट छोड़कर एमएमए में सफल नेपाली फाइटर

नेपाली मिक्स मार्शल आर्ट्स (एमएमए) फाइटर युकी आङदेम्बे ने भारत में आयोजित मेट्रिक्स फाइट नाइट (एमएफएन)-१८ में भारत के मन्दिप प्रजापती को पहले राउंड में नॉकआउट करते हुए हराया है। ग्रेटर नोएडा के विजय सिंह पाठिक इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शनिवार की रात हुए फाइनल मुकाबले में युकी ने २ मिनट ३१ सेकंड में मन्दिप को पटखनी दी, जिससे घरेलू समर्थक चुप रह गए। २७ वर्षीय युकी, जो नेपाल में जन्मे और ब्रिटेन में पले-बढ़े हैं, इस जीत के साथ नेपाल का रैंक बढ़ाने में सफल रहे।

युकी ने कहा कि एमएमए में शारीरिक साथ-साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी है और दबाव को ऊर्जा से भरपूर प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं को अपनी मेहनत और प्रेरणा का अनुसरण करने की सलाह देते हुए कहा, “यह खेल सिर्फ शारीरिक ताकत से नहीं चलता। यदि मानसिक रूप से कमजोर हो तो शारीरिक प्रदर्शन भी प्रभावित होता है।” युकी ने एमएमए के लिए पढ़ाई और खेल को साथ लेकर चलने में कठिनाइयाँ भी महसूस कीं।

युकी ने बचपन में क्रिकेट खेला, लेकिन पीठ की चोट के कारण उसे जारी नहीं रख पाए और बाद में एमएमए की ओर रुख किया। उन्होंने बताया, “स्कूल के दौरान मैं क्रिकेट खेलता था। फिर जिम जाने के बाद एमएमए में रुचि बढ़ी।” युकी के अनुसार नेपाल में एमएमए का क्रेज तेज़ी से बढ़ रहा है और नेपाली फाइटर्स का स्तर काफी बेहतर हो रहा है। उन्होंने कहा, “नेपाल में यह खेल काफी विकसित हो चुका है। नेपाली लोगों की डीएनए में लड़ाई होती है।”

युकी ने कहा कि वे अपने कार्य पर फोकस रखते हुए रोल मॉडल बनने के बजाय अपने फोकस को बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “जो भी आपकी मेहनत हो, उसे पूरी लगन से करना चाहिए और कठिन परिश्रम करना चाहिए।” युकी ने यह भी बताया कि इस खेल में बढ़ती दिलचस्पी से वे खुद को भाग्यशाली महसूस करते हैं।

सुशीला कार्की – Online Khabar

सुशीला कार्की ने डॉ. मनोज शर्मा की नियुक्ति को असंगत बताया

पूर्व प्रधानमंत्री तथा पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की ने प्रधान न्यायाधीश सिफारिश में चौथे नंबर पर रहे डॉ. मनोज शर्मा की नियुक्ति को गलत बताया है। कार्की ने कहा कि वरिष्ठतम न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल सक्षम हैं और महिला प्रधान न्यायाधीश को रोकना सरकार की गलती है। उन्होंने न्यायाधीश की नियुक्ति योग्यता के अनुसार होनी चाहिए और सपना प्रधान मल्ल ने महिलाओं से जुड़े कानूनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। २४ वैशाख, काठमांडू।

संवैधानिक परिषद ने गुरुवार को किए गए प्रधान न्यायाधीश नियुक्ति सिफारिश पर पूर्व प्रधानमंत्री एवं पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की ने गंभीर असहमति जताई है। उनसे बातचीत में उन्होंने कहा कि विधि और परंपरा के विपरीत चौथे वरीयता वाले न्यायाधीश डॉ. मनोज शर्मा को प्रधान न्यायाधीश के लिए सिफारिश करना गलत है। संवैधानिक परिषद तथा अन्य सभी प्रधान न्यायाधीशों में कार्यरत वरिष्ठतम न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल ही सक्षम हैं, उनका तर्क है।

कार्की ने पूछा, ‘इतिहास में इतनी योग्य और सक्षम महिला, उसमें क्या कमी थी?’ उन्होंने कहा, ‘इसका परिणाम यह सरकार बाद में भोगेगी।’ योग्य और सक्षम महिला को रोकना सरकार की बड़ी भूल है और इसके नतीजे वर्तमान सरकार को भुगतने होंगे।

उन्होंने कहा, ‘राज्य की तीन संस्थाएं हैं, सभी की अपनी प्रतिष्ठा और गंभीरता होती है। पुलिस में नियुक्ति कैसे होती है? पहले चयनित होकर ही आता है। एक साधारण सैनिक भी धीरे-धीरे प्रमोशन पाकर ऊपर पहुंचता है।’ उन्होंने जारी रखा, ‘न्यायाधीशों की भी इसी तरह प्रमोशन होता है। सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति योग्यता के अनुसार होनी चाहिए। यदि कुछ योग्यता नहीं है तो उसे बाहर किया जा सकता है।’ कार्की ने यह भी कहा कि जब वे प्रधान न्यायाधीश थीं, तब उन्हें दुनिया की तीसरी महिला प्रधान न्यायाधीश कहा गया था और वर्तमान सरकार ने बिना सोच-विचार निर्णय लिया है।

‘अभी जो सपना प्रधान मल्ल हैं, वे किसी अयोग्य व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने लंबे समय तक वकालत की है। उन्होंने आईएनजीओ और एनजीओ के बीच भी वकालत की है। उन्होंने कानून बनाने में भी सहयोग दिया है,’ उन्होंने कहा। कार्की ने कहा कि देश में महिलाओं से संबंधित कानून लाने में सपना प्रधान मल्ल जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

सरकारी बैंक के अध्यक्षों ने अपने पद से दिया इस्तीफा

सरकारी निवेश वाले सभी बैंक के अध्यक्षों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सरकार द्वारा सार्वजनिक पदों पर राजनीतिक नियुक्ति प्राप्त व्यक्तियों को बर्खास्त करने के बाद बैंक के अध्यक्षों ने यह कदम उठाया है। राष्ट्रीय वाणिज्य बैंक, कृषि विकास बैंक और नेपाल बैंक के अध्यक्षों ने इस्तीफा दिया है। २४ वैशाख, काठमांडू।

सरकार के सार्वजनिक संस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियों को बर्खास्त करने के फैसले के पश्चात बैंक के अध्यक्षों ने इस्तीफा दिया है। अर्थ मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय वाणिज्य बैंक के अध्यक्ष सहित सभी संचालक मंडल के सदस्यों ने इस्तीफा दिया है। कृषि विकास बैंक और नेपाल बैंक में केवल अध्यक्षों ने ही इस्तीफा दिया है।

राष्ट्रीय वाणिज्य बैंक के अध्यक्ष के पद पर नेपाल राष्ट्र बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक देवकुमार ढकाल थे। अन्य संचालकों में थानप्रसाद पँगेनी, लक्ष्मण घिमिरे, प्रा. डॉ. रामप्रसाद ज्ञवाली, रोमिला ढकाल उप्रेती, डॉ. सूर्यबहादुर राणा और हरिकुमार सिलवाल शामिल थे। कृषि विकास बैंक के अध्यक्ष डिमप्रसाद पौडेल थे जबकि नेपाल बैंक में प्रा. डॉ. डिल्लीराज शर्मा पद पर थे। सरकार द्वारा सार्वजनिक पदों पर राजनीतिक नियुक्त पदधारकों को पदमुक्त करने के लिए लाया गया अध्यादेश नेपाल राष्ट्र बैंक और सरकारी बैंक के लिए बाध्यकारी नहीं था, लेकिन इन बैंक के अध्यक्षों और संचालकों ने सरकार की नीति का समर्थन करते हुए इस्तीफा दे दिया है।

हुम्लामा काठ की गोलिया लगने से एक बालक की मृत्यु

२४ वैशाख, हुम्ला। हुम्ला के सर्केगाड गाँवपालिका-८ फुचामा ऊपर से गिराए गए लकड़ी के गोलिया के लगने से एक बालक की मृत्यु हो गई है। धौलापानी सामुदायिक वन में बकरियां चराने गये सर्केगाड गाँवपालिका-८ के १४ वर्षीय कविन्द बुढाथोकी की मृत्यु हुई है। सर्केगाड गाउँपालिका-७ के ३९ वर्षीय धनराज शाही और २८ वर्षीय सुकवीर सार्की ने साल के लकड़ी काटकर ऊपर से नदी में फेंका था। वह गोलिया बकरियां चराने वन में गए कविन्द को लगी, जिससे उनकी मृत्यु हो गई, ऐसा जिला पुलिस कार्यालय हुम्ला ने बताया।

भारत ने लिपुलेक मुद्दे पर अपनी स्थिति फिर से स्पष्ट की

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि लिपुलेक क्षेत्र से होकर कैलाश मानसरोवर यात्रा कोई नया मामला नहीं है और यह 1954 से निरंतर संचालित हो रही है। नेपाल ने भारत और चीन को कूटनीतिक नोट के माध्यम से लिपुलेक क्षेत्र से यात्रा संचालन न करने का विरोध जताया है। 1816 के सुगौली संधि के अनुसार महाकाली नदी का पूर्वी भाग नेपाल के क्षेत्र में आता है। 24 वैशाख, काठमांडू। नेपाली भूमि में आने वाले लिपुलेक मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा के विषय में भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी स्पष्ट स्थिति दोहराई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने कहा, ‘यह मामला नया नहीं है, हमने पहले ही प्रेस नोट द्वारा जानकारी दी है। कैलाश मानसरोवर यात्रा 1954 से निरंतर जारी है।’ पिछले कुछ दिनों में भारत और चीन ने लिपुलेक मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू की है, जिसके बाद नेपाल ने विरोध व्यक्त करते हुए दोनों देशों को कूटनीतिक नोट भेजा था। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे नया विवाद न बताते हुए कहा था कि नेपाल से बातचीत के लिए तैयार हैं। 2015 में भारत और चीन के बीच लिपुलेक मार्ग से व्यापार और तीर्थयात्रु आवागमन के लिए समझौता हुआ था, जिस समय नेपाल ने कूटनीतिक नोट भेजा था लेकिन दोनों देशों ने औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी। इस बार भी चीन ने नेपाल को कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 1816 में नेपाल और ब्रिटिश भारत के बीच हुई सुगौली संधि में काली (महाकाली) नदी के पूर्वी भाग को नेपाल का भू-भाग माना गया है, और लिम्पियाधुरा महाकाली नदी का स्रोत है।

अझै २ वर्ष एकभन्दा धेरै सहकारी संस्थाको सदस्य हुन पाइने 

सहकारी ऐन २०७४ के तहत सदस्यता अवधि दो वर्ष तक बढ़ाई गई

सहकारी ऐन २०७४ के अनुसार एक वर्ष में केवल एक संस्थान में सदस्यता रखने का प्रावधान अब दो वर्ष तक बढ़ा दिया गया है। सहकारी क्षेत्र में दोहरी सदस्यता और संचालक पद की समस्या अभी भी बनी हुई है, और ऐन का पूर्ण रूप से कार्यान्वयन नहीं हो पाया है। सरकार ने सहकारी अध्यादेश २०८३ के माध्यम से दोहरी सदस्यता की अवधि दो वर्ष कर दी है, लेकिन दोहरी पद की कार्रवाई के बारे में स्पष्टता उपलब्ध नहीं है। २४ वैशाख, काठमांडू। सहकारी संस्थाओं के सदस्य अब भी दो वर्ष तक कई संस्थाओं की सदस्यता रख सकते हैं। सहकारी ऐन २०७४ लागू होने पर सदस्यता को एक वर्ष के भीतर एक संस्थान तक सीमित करने का नियम था, जिसे अब अतिरिक्त दो वर्ष की अवधि दी गई है। सहकारी ऐन २०७४ लागू होने के समय एक व्यक्ति कई सहकारी संस्थाओं का सदस्य हो सकता था, किंतु उसे नियंत्रण में रखने के लिए केवल एक संस्थान का सदस्य बने रहने की व्यवस्था थी। इसके लिए २०७४ कार्तिक में लागू हुए सहकारी ऐन ने एक वर्ष की अवधि दी थी। लेकिन ऐन लागू होने के लगभग आठ वर्षों बाद, पुनः बहु संस्थाओं में सदस्यता रखने वाले व्यक्तियों को एक संस्थान में ही सदस्यता रखने के लिए दो वर्ष की अवधि दी गई है।

सहकारी ऐन के प्रभावी कार्यान्वयन न होने के कारण सहकारी क्षेत्र में अनेक समस्याएं उपस्थित हैं, ऐसा सहकारी कार्यकर्ता बताते हैं। ऐन में एक से अधिक संस्थाओं में सदस्य तथा संचालक नहीं होने देने का प्रावधान है, परन्तु इसका सही कार्यान्वयन नहीं हो पाया है। ‘ऐन लागू हुए लगभग आठ वर्ष हो गए हैं,’ उन्होंने कहा, ‘फिर भी बहु संस्थाओं में सदस्यता और दोहरी संचालक पद की स्थिति बनी हुई है।’ सहकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐन को केवल कागजी दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने के कारण समस्या जटिल हुई है। ऐन के सबसे सामान्य प्रावधान भी यदि लागू नहीं किए गए तो सहकारी संस्थाओं में सुशासन की कमी होना स्वाभाविक है। ऐन लागू होने पर एक वर्ष की अवधि दी गई थी, जबकि सरकार द्वारा लाए गए सहकारी ऐन संशोधन अध्यादेश २०८३ में इसे दो वर्ष कर दिया गया है। सरकार द्वारा दो वर्ष की गई यह व्यवस्था केवल बहु संस्थाओं में एक ही व्यक्ति की सदस्यता पर लागू होती है। दोहरी पद के संदर्भ में अध्यादेश में कोई स्पष्टता प्रदान नहीं की गई है।

सिरहामा छोटी भन्सार कार्यालय बन्द गर्ने निर्णयविरुद्ध प्रशासनलाई ज्ञापनपत्र बुझाइयो

सरकारले सिरहाको बरियारपट्टीस्थित छोटी भन्सार कार्यालय बन्द गर्ने निर्णयविरुद्ध स्थानीयवासी तथा व्यवसायीहरूले जिल्ला प्रशासन कार्यालयमा ज्ञापनपत्र बुझाएका छन्। स्थानीयवासी र व्यवसायीहरूले २४ वैशाखमा पाँच घण्टा हुलाकी मार्ग अवरुद्ध गरी सरकारविरुद्ध प्रदर्शन गरिएको थियो। जिल्ला प्रशासन कार्यालयले बालबालिकालाई राजनीतिक उद्देश्यका लागि आन्दोलनमा प्रयोग नगर्न सार्वजनिक सूचना जारी गर्दै उल्लंघन भए कडा कारबाहीको चेतावनी दिएको छ।

सरकारको उक्त निर्णयले सिरहाको बरियारपट्टीका सीमावर्ती क्षेत्रको व्यापार, राजस्व संकलन तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधिमा प्रत्यक्ष असर पर्ने हुँदा स्थानीयवासी तथा व्यवसायीहरूले ज्ञापनपत्र मार्फत विरोध प्रकट गरेका छन्।

छोटी भन्सार कार्यालय बन्द गर्ने निर्णयको विरोध स्वरूप बिहीबार स्थानीयहरूले पाँच घण्टा हुलाकी मार्ग अवरुद्ध गरी सरकारविरुद्ध प्रदर्शन गरेका थिए। बरियारपट्टी गाउँपालिकाका अध्यक्ष सन्तोष महतोले उक्त निर्णयविरुद्ध भोलि शुक्रवारदेखि चरणबद्ध आन्दोलन सञ्चालन गर्ने संकेत दिएका छन्।

उनका अनुसार २५ वैशाख बिहान ७ बजेदेखि ११ बजेसम्म सडक चक्काजाम गर्ने, २६ वैशाखमा र्‍यालीसहित कोणसभा गर्ने, २७ वैशाखमा दिनभर बजार बन्द र मासाल जुलुस प्रदर्शन गर्ने र २८ वैशाखदेखि अनिश्चितकालीन आमहड्तालका लागि बृहत् छलफल गरिने छ। आन्दोलनमा सहभागी स्थानीयवासी तथा व्यवसायीहरूले बिहीबार बिहान ८:३० बजेदेखि बरियारपट्टी गाउँपालिका–३ स्थित बरियारपट्टी चोक सडकको बीच भागमा बेन्च राखेर हुलाकी राजमार्ग अवरुद्ध गरेका थिए।

सडक अवरुद्ध हुँदा पूर्व–पश्चिम आवागमन प्रभावित बनेको थियो। यसैबीच जिल्ला प्रशासन कार्यालय सिरहाले राजनीतिक उद्देश्यका लागि बालबालिकालाई आन्दोलन, हड्ताल, बन्द, चक्काजाम, धर्ना वा जुलुसमा प्रयोग नगर्न सार्वजनिक सूचना जारी गरेको छ। सहायक प्रमुख जिल्ला अधिकारी चेतराज बरालद्वारा जारी सूचनामा बालबालिका सम्बन्धी ऐन, २०७५ को दफा ६६(२)(६) अनुसार राजनीतिक उद्देश्य पूर्तिका लागि बालबालिकाको प्रयोग कानुनविपरीत रहेको उल्लेख गरिएको छ। प्रशासनले सूचनाको उल्लंघन गरी बालबालिकालाई आन्दोलनमा प्रयोग गरेको पाए कडा कानुनी कारबाही गरिने चेतावनी दिएको छ।

भारत ने नेपाल को निरंतर मल और ईंधन आपूर्ति की प्रतिबद्धता जताई

भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल और भारत के बीच बहुआयामी संबंधों पर जोर देते हुए पेट्रोलियम उत्पादों और रासायनिक मल की निरंतर आपूर्ति की प्रतिबद्धता दोहराई है। प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने बताया कि नेपाल में पेट्रोलियम उत्पाद और रासायनिक मल आपूर्ति संबंधी समझौते के अनुसार निरंतर आपूर्ति हो रही है। नेपाल ने भारत के साथ रासायनिक मल की खरीद के लिए सरकार-से-सरकार समझौता किया है जबकि पेट्रोलियम के लिए दशकों से व्यावसायिक संबंध स्थापित हैं। २४ वैशाख, काठमांडू।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत बताया। नेपाल में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से संबंधित प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात प्रक्रिया लगातार जारी है।

‘नेपाल और भारत के बीच पेट्रोलियम उत्पादों के संदर्भ में जो सहयोग समझौता है उसके अनुसार हम ईंधन की आपूर्ति कर रहे हैं,’ उन्होंने कहा। ‘यह प्रक्रिया आने वाले दिनों में भी यथावत जारी रहेगी।’ नेपाल के लिए संवेदनशील माने जाने वाले रासायनिक मल के मामले में भारत ने सकारात्मक रुख दिखाया है, उन्होंने बताया। ‘नेपाल में आवश्यक रासायनिक मल की आपूर्ति हम करेंगे,’ उन्होंने कहा। हाल ही में नेपाल ने भारत के साथ रासायनिक मल खरीद के लिए ‘जीटूजी’ (सरकार-से-सरकार) समझौता किया है। इसके अतिरिक्त, पेट्रोलियम पदार्थों के लिए नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के बीच दशकों पुराना व्यावसायिक संबंध स्थापित है।

तमिलनाडु में विजय थलापति की पार्टी को सरकार गठन में कठिनाई का सामना

भारत के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर द्रविड़ पार्टियों की दशकों पुरानी विरासत को तोड़ दिया है। लेकिन, २३४ सदस्यीय विधानसभा में टीवीके ने १०८ सीटें हासिल की हैं। संसद की सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद थलापति को सरकार बनाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। २३४ सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए कम से कम ११८ सीटें चाहिए होती हैं। चुनावी परिणाम आने के तीन दिन बाद भी वे अभी तक सरकार बनाने के लिए बहुमत प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाए हैं। तमिलनाडु राजभवन (राज्यपाल कार्यालय) ने गुरुवार को एक बयान जारी कर बताया कि टीवीके अभी तक विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाई है।

‘तमिलनाडु के माननीय राज्यपाल थिरु राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने आज (७ मई) टीवीके के अध्यक्ष थिरु सी. जोसेफ विजय (विजय थलापति) को चेन्नई स्थित लोक भवन में बुलाकर उनसे मुलाकात की है। इस दौरान माननीय राज्यपाल ने सरकार गठन के लिए आवश्यक तमिलनाडु विधानसभा बहुमत के समर्थन स्थापित न होने की जानकारी दी है,’ राज्यपाल के बयान में कहा गया है। १०८ सीटों वाली टीवीके को बहुमत सिद्ध करने के लिए अभी और १० सीटों की आवश्यकता है। कांग्रेस ने पांच सीटें हासिल कर सहयोग का वादा किया है, लेकिन अभी भी पांच सीटें जुटानी बाकी हैं। टीवीके बहुमत में सफल न हो पाने के कारण राज्यपाल आर्लेकर ने अभी तक विजय थलापति को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है। चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी को राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए क्यों नहीं बुलाया, इस विषय पर तमिलनाडु में तीव्र बहस छिड़ी हुई है।

विजय के सामने सीमित विकल्प हैं। जब कोई भी दल या गठबंधन स्पष्ट बहुमत नहीं पाता है, ऐसी विधानसभा को ‘हंग एसेम्बली’ या ‘त्रिशंकु संसद’ कहा जाता है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भी ऐसी त्रिशंकु संसद बनी है, जिसने सबसे बड़ी पार्टी टीवीके के लिए सरकार गठन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे हालात में राज्यपाल का बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका न देना कई सवाल पैदा करता है। साथ ही, टीवीके को दरकिनार करके परंपरागत प्रतिद्वंदी डीएमके और एआईएडीएमके के गठबंधन से सरकार बनने की संभावना की चर्चा भी हो रही है। टीवीके अभी भी सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहा है।

इस तरह टीवीके प्लस की संख्या ११९ तक पहुंचने की संभावना है, जो बहुमत के लिए आवश्यक संख्या से अधिक है। टीवीके का दूसरा विकल्प अल्पमत सरकार बनाना हो सकता है। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल टीवीके को सरकार बनाने के लिए बुला सकते हैं। सरकार बनने के बाद टीवीके अन्य पार्टियों को अपने पक्ष में लाने की रणनीति अपना सकता है। विजय की जीत से चुनौती बढ़ी? टीवीके बहुमत से १० सीटें पीछे है, लेकिन सरकार बनाने के लिए कम से कम १२ अतिरिक्त विधायक चाहिए। क्योंकि १०८ सीटों में से दो सीटें तिरुचिरापल्ली ईस्ट और पेराम्बुर हैं, जहाँ विजय थलापति स्वयं जीते हैं। नियम के अनुसार उन्हें एक सीट खाली करनी पड़ेगी, जिससे टीवीके की सीट संख्या १०७ रह जाएगी। इसके अलावा एक सभापति का भी चुनाव होगा। विश्वासमत के समय सभापति मतदान नहीं करता, इसलिए टीवीके के मतदान करने वाले सांसदों की संख्या १०६ हो जाएगी।

सर्वोच्च न्यायालय: मनोजकुमार शर्मा को नया प्रधान न्यायाधीश के रूप में सिफारिश

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पद के लिए मनोजकुमार शर्मा को सिफारिश की गई है। गुरुवार शाम प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह ‘बालेन’ की अध्यक्षता में हुई संवैधानिक परिषद की बैठक में उन्हें इस पद पर नियुक्ति के लिए सिफारिश की गई, इसकी जानकारी परिषद के दो सदस्यों ने दी है। अब संसदीय सुनवाई समिति की मंजूरी मिलने के बाद ही वे नेपाल के प्रधान न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हो सकेंगे।

सिफारिश के निर्णय में वरिष्ठता का पालन न होने पर राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायणप्रसाद दाहाल और मुख्य विपक्षी दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे ने अलग मत व्यक्त किया है, जबकि बैठक के अन्य प्रतिभागियों ने यह बताया है। नेपाल के संविधान की धारा २८४ के अनुसार, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बनने वाली सदस्यीय संवैधानिक परिषद प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए सिफारिश करती है।

कानूनी प्रबंधन परिषद में प्रधान न्यायाधीश, प्रतिनिधि सभा के सभामुख, राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष, प्रतिनिधि सभा के विपक्षी दल के नेता और प्रतिनिधि सभा के उपसभामुख सदस्य होते हैं। हालांकि प्रधान न्यायाधीश नियुक्ति की सिफारिश करते समय संवैधानिक परिषद में नेपाल सरकार के कानून और न्याय मंत्री भी सदस्य होते हैं, ऐसे में गुरुवार की बैठक में मंत्री सोबिता गौतम भी उपस्थित थीं।

विशेषज्ञों ने बताया है कि संवैधानिक परिषद आम तौर पर वरिष्ठता के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय के श्रेष्ठ न्यायाधीश को प्रधान न्यायाधीश के पद के लिए सिफारिश करती है, लेकिन इस बार यह परंपरा टूटी है। प्रधान न्यायाधीश और अन्य सर्वोच्च न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

सर्वोच्च अदालतका न्यायाधीश शर्मा प्रधानन्यायाधीशमा सिफारिस

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. मनोज शर्मा प्रधान न्यायाधीश के रूप में सिफारिश

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. मनोज शर्मा को प्रधान न्यायाधीश के रूप में सिफारिश की गई है। न्याय परिषद की गुरुवार की बैठक में शर्मा को प्रस्तावित प्रधान न्यायाधीश के रूप में आगे बढ़ाया गया। शर्मा वरिष्ठतम न्यायाधीशों में चौथे क्रम पर रहते हुए प्रधान न्यायाधीश के रूप में सिफारिश पाने वाले पहले व्यक्ति हैं।

२४ वैशाख, काठमांडू। नेपाल के न्यायिक इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि वरिष्ठतम न्यायाधीशों के क्रम में चौथे नंबर पर मौजूद न्यायाधीश को प्रधान न्यायाधीश के रूप में सिफारिश मिली है। संसदीय सुनवाई समिति द्वारा नाम की मंजूरी मिल जाने पर वे ३३वें प्रधान न्यायाधीश बनेंगे। ६ वैशाख २०७६ को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त होने वाले शर्मा, संसदीय अनुमोदन मिलने पर पूरे कार्यकाल अर्थात् ६ वर्ष तक प्रधान न्यायाधीश के पद पर रहेंगे।

कानून व्यवसायी सपना प्रधान मल्ल सहित वरिष्ठ न्यायाधीश कुमार रेग्मी और हरि फुयाल को पीछे छोड़ते हुए चौथे वरिष्ठता क्रम में उपस्थित शर्मा को संवैधानिक परिषद ने प्रधान न्यायाधीश के रूप में प्रस्तावित किया है। ४ असार २०२७ को पर्सा में जन्मे शर्मा ३ असार २०९२ को ६५ वर्ष के हो जाएंगे। प्रजातंत्र पुनर्स्थापना के बाद किसी भी प्रधान न्यायाधीश ने ६ वर्ष का पूरा कार्यकाल नहीं निभाया है। अगर वे ६ वर्ष का कार्यकाल पूरा करते हैं तो वैशाख २०८९ तक प्रधान न्यायाधीश बने रहेंगे।

नेपाल लॉ क्याम्पस से कानून में स्नातक और भारत के पुणे विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने वाले शर्मा ने श्रम कानून से संबंधित विषय में विद्यावारिधि की है। वे पुनरावेदन अदालत के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और अस्थायी न्यायाधीश की व्यवस्था समाप्त होने के बाद अवकाश ग्रहण किया था। बाद में, चोलेन्द्रशम्सेर जबरा के प्रधान न्यायाधीश रहने के दौरान वे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए सिफारिश किए गए और संसदीय सुनवाई प्रक्रिया से अनुमोदन प्राप्त किया।

आँबुखैरेनी–मुग्लिन मार्ग अवरुद्ध हुआ

आँबुखैरेनी गाउँपालिका–४ के पावर हाउस के पास सुखी भूस्खलन के कारण आँबुखैरेनी–मुग्लिन सड़क अवरुद्ध हो गई है। जिले के पुलिस कार्यालय के प्रहरी नायब उपरीक्षक श्रवणकुमार विक ने बताया कि भूस्खलन को हटाकर राजमार्ग को फिर से संचालित करने का प्रयास जारी है। २४ वैशाख, दमौली (तनहुँ)। आँबुखैरेनी गाउँपालिका–४ के ‘पावर हाउस’ के नजदीक सुखी भूस्खलन गिरने से यह सड़क अवरुद्ध हो गई है। जिले के पुलिस कार्यालय के प्रहरी नायब उपरीक्षक श्रवणकुमार विक के अनुसार, भूस्खलन हटाकर राजमार्ग को पुनः संचालित करने का प्रयास जारी है।

रोशी नदी में बाढ़ में फंसे यात्रियों के उद्धार के लिए ५ सशस्त्र पुलिसकर्मियों को सम्मान

सशस्त्र पुलिस बल नेपाल संख्या १५ गण ने २१ वैशाख की वर्षा के बाद रोशी नदी में फंसे ८९ यात्रियों को बचाने के कार्य में सहयोग देने वाले पांच पुलिसकर्मियों को नकद पुरस्कार सहित सम्मानित किया है। सशस्त्र पुलिस उप महानिरीक्षक अंजनीकुमार पोखरेल ने २४वें वार्षिकोत्सव समारोह के दौरान संगठन की अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा की भावना को मजबूत करने के लिए सभी को जिम्मेदार बनने की अपील की। प्रमुख जिल्ला अधिकारी गोपालकुमार अधिकारी और रोशी गाउँपालिका के अध्यक्ष दिनेश लामा ने विपत्ति की घड़ी में सशस्त्र पुलिस की भूमिका को महत्वपूर्ण और प्रशंसनीय बताया। यह कार्यक्रम २४ वैशाख, काभ्रेपलाञ्चोक में आयोजित किया गया।

२१ वैशाख की रात हुई भारी वर्षा के कारण उत्पन्न बाढ़ की स्थिति में बीपी राजमार्ग अंतर्गत रोशी-७ लास्कोट और घुमाऊँने नदी के बीच फंसे यात्रियों को बचाने वाले सशस्त्र पुलिस बल को नकद पुरस्कार सहित सम्मानित किया गया है। सशस्त्र पुलिस बल नेपाल संख्या १५ गण के मुख्यालय काभ्रेपलाञ्चोक के २४वें वार्षिकोत्सव समारोह में रोशी नदी में फंसे पांच माइक्रोबसों के ८९ यात्रियों को जोखिम उठाकर बचाने वाले सहायक निरीक्षक भरत न्यौपाने, हवलदार श्रीकृष्ण कार्की, हवलदार बुद्धि खड्का, सहायक हवलदार किरण कुँवर और अशोकजंग दनुवार को सम्मानित किया गया।

इन सभी को संगठन की छवि को उच्च बनाने के लिए साहसिक और व्यावसायिक कौशल दिखाकर बचाव कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कराने पर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त पाँचखाल चौकी के प्रभारी प्रशांत तामांग और इलाका प्रहरी कार्यालय देवीटार के प्रभारी इन्द्रबहादुर राउत को भी सम्मानित किया गया। २१ वैशाख की शाम से शुरू हुई लगातार वर्षा से बढ़े नदी के बहाव के कारण रोशी-७ लास्कोट और घुमाउने नदी के मध्य फंसे पांच माइक्रोबस के ८९ यात्रियों को सशस्त्र पुलिस बल नेपाल संख्या १५ गण के गणपति सशस्त्र पुलिस उपरीक्षक माधव रेग्मी के नेतृत्व में तैनात बचाव दल द्वारा बचाया गया।

२४वें वार्षिकोत्सव समारोह सशस्त्र पुलिस बल नेपाल संख्या १५ गण के मुख्यालय काभ्रेपलाञ्चोक में मनाया गया। सशस्त्र पुलिस उप महानिरीक्षक अंजनीकुमार पोखरेल ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा, विपत्ति प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा में सशस्त्र पुलिस बल की निभाई जा रही भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा की भावना को और भी मजबूत करने तथा संगठन को और प्रभावशाली बनाने की दिशा में सभी के जिम्मेदार बनने पर बल दिया। प्रमुख जिल्ला अधिकारी गोपालकुमार अधिकारी ने जिले में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ विपत्ति के समय नागरिकों के बचाव तथा राहत में सशस्त्र पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। रोशी गाउँपालिका अध्यक्ष दिनेश लामा ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा निकायों के बीच सहयोग से नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचने की बात कही। उन्होंने कहा कि विपत्ति और आपातकालीन परिस्थितियों में सशस्त्र पुलिस बल की भूमिका अत्यंत प्रशंसनीय रही है।

बेलायत में स्थानीय चुनाव शुरू, नेपाली मूल के डेढ़ दर्जन से अधिक उम्मीदवार मैदान में

२४ वैशाख, लंदन। ७ मई गुरुवार (आज) बेलायत के चार राष्ट्रों में से तीन इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में स्थानीय चुनाव शुरू हो गए हैं। १३६ विभिन्न स्थानीय काउंसिलों में कुल ५,०१४ सीटों के लिए मतदान जारी है। इस चुनाव के माध्यम से स्कॉटलैंड और वेल्स के मतदाता अपनी राष्ट्रीय संसद के प्रतिनिधि चुनेंगे, जबकि इंग्लैंड के ३० काउंसिलों में काउंसिलर और मेयर चुने जाएंगे। इसके साथ ही, इंग्लैंड के क्रॉइडन, हैकनी, लुइसेम, न्यूहैम, टॉवर हैमलेट्स और वाटफोर्ड समेत ६ स्थानीय निकायों में मेयर पद के लिए भी चुनाव हो रहे हैं। मतदान सुबह ७ बजे से शुरू होकर रात १० बजे तक चलेगा। अधिकांश क्षेत्रों के परिणाम शुक्रवार के दिन उपलब्ध होने की उम्मीद है। इस चुनाव को वर्तमान प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के लिए एक तरह के जनमत सर्वे के रूप में देखा जा रहा है।

कंजरवेटिव पार्टी के १४ वर्षों के शासन के अंत के बाद बड़ी उम्मीदों के साथ सत्ता में आए स्टार्मर की लोकप्रियता अब घटती दिख रही है। सरकार में आने के बाद किए गए कई नीतिगत फेरबदल, आर्थिक चुनौतियां और जनता की अपेक्षाओं को पूरा न कर पाने से उनकी छवि कमजोर हुई है। आमतौर पर स्थानीय चुनाव सड़क, सफाई और स्थानीय सेवाओं पर केंद्रित होते हैं, लेकिन इस बार का चुनाव राष्ट्रीय राजनीति से सीधे जुड़ा हुआ है। मतदाता इस चुनाव में सरकार के प्रति संतुष्टि या असंतुष्टि व्यक्त करेंगे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि लेबर पार्टी को कई महत्वपूर्ण सीटें हारना पड़ सकती हैं, जो स्टार्मर के नेतृत्व पर सवाल उठा सकती हैं। वहीं, रिफॉर्म यूके जैसे दक्षिणपंथी और ग्रिन जैसे वैकल्पिक दलों के उदय से बेलायत की पारंपरिक दो-दलीय प्रणाली कमजोर होती जा रही है।

इस बार के स्थानीय चुनावों में नेपाली मूल के दर्जनों उम्मीदवार भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार कंजरवेटिव पार्टी से कम से कम एक दर्जन नेपाली मूल के उम्मीदवार मैदान में हैं। सत्ता में मौजूद लेबर पार्टी, लिबरल डेमोक्रेट, ग्रिन और जेरेमी कोर्बिन के नेतृत्व वाली योर पार्टी से भी नेपाली मूल के उम्मीदवार हैं, जिससे कुल संख्या डेढ़ दर्जन से अधिक हो सकती है। नेपाली मूल के उम्मीदवारों के बीच कुछ रोचक घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। कई बरो में नेपाली दंपती काउंसिलर पद के उम्मीदवार हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में नेपाली उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा भी है।

उदाहरण के लिए, लंदन के रॉयल बरो ऑफ ग्रीनविच में पूर्व मेयर जित रानाभाट प्लमस्टिड एंड ग्लिन्डन वार्ड से उम्मीदवार हैं, जबकि उनकी पत्नी गौमाया गुरुङ उसी बरो के एबिउड वार्ड से उम्मीदवार हैं। दोनों लेबर पार्टी से हैं। प्लमस्टिड एंड ग्लिन्डन वार्ड में लेबर पार्टी के पूर्व नेता जेरेमी कोर्बिन के नेतृत्व वाली योर पार्टी के समर्थन में नरेंद्र क़ंडेल भी उम्मीदवार हैं। इसी तरह, ऑल्डरसट के वेलिंगटन वार्ड में कंजरवेटिव पार्टी से डॉ. विशाल गुरुङ और लेबर पार्टी से उत्तरबहादुर गुरुङ उम्मीदवार हैं। इनमें से हर वार्ड से तीन-तीन काउंसिलर चुने जाएंगे, इसलिए तकनीकी रूप से दोनों नेपाली उम्मीदवार चुने जाने की संभावना है, हालांकि मत बंटवारे के कारण एक का जीतना और दूसरे का हारना भी संभव है।

पूर्व डीएसपी शिवजी श्रेष्ठ भी लेबर पार्टी से बेजिंगस्टोक के ब्राइटनहिल वार्ड में चुनावी मैदान में हैं। ज्ञानप्रसाद गुरुङ कंजरवेटिव पार्टी से स्विंडन के पार्क साउथ में चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि प्रतीक्षा गुरुङ लेबर पार्टी से बैटल वार्ड, रीडिंग से चुनावी मुकाबला कर रही हैं। इंद्राहांग लिम्बु फेल्थम में कंजरवेटिव उम्मीदवार हैं।

सरकारले तोक्यो स्वास्थ्य प्रतिष्ठान र अस्पतालमा निमित्त जिम्मेवारी (नामसहित)

सरकार ने स्वास्थ्य प्रतिष्ठान और अस्पतालों में कार्यवाहक नेतृत्व की नियुक्ति की

सरकार ने स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान एवं अस्पतालों में पूर्णकालीन नेतृत्व चयन न होने तक कार्यवाहक जिम्मेदारी सौंप दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने पाटन, पोखरा, कर्णाली सहित अन्य प्रतिष्ठानों में प्रो.डा. और डॉक्टरों को अल्पकालीन जिम्मेदारी सौंपी है। मंत्रालय ने जल्द ही खुली प्रतिस्पर्धा और मेरिट के आधार पर पूर्णकालीन नेतृत्व चयन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है।

२४ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान और कुछ अस्पतालों में कार्यवाहक जिम्मेदारी सौंपी है। स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहताकी सचिवालय के अनुसार, कार्यवाहक नियुक्ति आवश्यक कार्यों में रुकावट न आए इस उद्देश्य से अस्थायी रूप से की गई व्यवस्था है। पूर्णकालीन नेतृत्व चयन न होने तक मंत्रालय ने पाटन स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान में प्रो.डा. समिता पंत, पोखरा स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान में डा. नरेन्द्र विक्रम गुरुङ, कर्णाली स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान में सह-प्रो.डा. विनम्र विष्ट को कार्यवाहक जिम्मेदारी दी है।

इसी प्रकार, बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान (धरान) में सह-प्रो.डा. इन्द्र लिम्बू, राप्ति स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान में सह-प्रो.डा. सुरेश रसाइली, बीपी कोइराला मेमोरियल कैंसर अस्पताल में डा. उमेश नेपाल, शहीद गंगालाल राष्ट्रीय हृदय केंद्र में सह-प्रो.डा. रविन्द्रभक्त तिमलालाई जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में भी शकुंतला प्रजापतिलाई कार्यवाहक जिम्मेदारी दी गई है, यह जानकारी मंत्री मेहताकी सचिवालय ने दी है।

सचिवालय के अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाने और योग्य नेतृत्व चुने जाने के लिए कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जल्द ही खुली प्रतियोगिता का आयोजन कर मेरिट के आधार पर पूर्णकालीन नेतृत्व चयन की प्रक्रिया तेज की जाएगी। सरकार की स्पष्ट नीति और निर्देश है कि नेतृत्व चयन केवल खुली प्रतिस्पर्धा और मेरिट के आधार पर होगा। हाल ही में जारी सार्वजनिक पदाधिकारियों के पदमुक्ति सम्बन्धी विशेष प्रावधानों के अध्यादेश के कारण ये स्वास्थ्य निकाय नेतृत्वविहीन रह गए थे। नेतृत्व न होने से रोगियों के उपचार, दैनिक सेवा प्रवाह और प्रशासनिक कार्यों में कोई व्यवधान न आए, इसके उद्देश्य से मंत्रालय ने तत्काल कार्यवाहक प्रमुखों की नियुक्ति की है।