आईसीसीले अद्यावधिक गरेको ओडीआई ब्याटिङ रैंकिङको शीर्ष १०० मा कुनै पनि नेपाली ब्याट्सम्यान समावेश गरिएको छैन। अलराउन्डर दीपेन्द्रसिंह ऐरी ३१औँ स्थानमा र बलर सन्दीप लामिछाने ४३औँ स्थानमा रहेका छन्। नेपाली ब्याट्सम्यानहरूले निरन्तर प्रदर्शन गर्न नसक्दा शीर्ष १०० मा पर्न सकेका छैनन्। २३ वैशाख, काठमाडौं।
हालसालै आईसीसीले अद्यावधिक गरेको एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय (ओडीआई) ब्याटिङ रैंकिङमा नेपाली ब्याट्सम्यानहरू शीर्ष १०० मा स्थान बनाउन सकेका छैनन्। बलिङ र अलराउन्डर रैंकिङमा नेपाली खेलाडीहरूले राम्रो स्थान हासिल गरिसकेका भए पनि ब्याटिङ भागमा कुनै नेपाली खेलाडी शीर्ष १०० मा समावेश छैनन्। नेपाली ब्याट्सम्यानहरूले नियमित रूपमा प्रभावशाली प्रदर्शन गर्न नसक्दा यो स्थिति बनेको छ।
घरेलु मैदानमा सम्पन्न लिग २ श्रृंखलामा मात्र अलराउन्डर दीपेन्द्रसिंह ऐरीले राम्रो प्रदर्शन गरेका छन्, जबकि अन्य ब्याट्सम्यानले त्यस्तै स्तर कायम गर्न सकेका छैनन्। ओपनर आसिफ शेख पहिलो खेलमा ड्रप भएपछि मंगलबार ९४ रन बनाए। यद्यपि, उनले त्यसअघि ७ र १९ रन बनाएर अर्को खेलबाट टिमबाट बाहिरिनुपर्ने अवस्था आयो। अर्का ओपनर कुशल भुर्तेलले पहिलो खेलमा १ र दोस्रो खेलमा शून्य रन बनाएपछि तेस्रो र चौथो खेलमा अवसर पाउन सकेका छैनन्।
दीपेन्द्रसिंह ऐरीले यूएईविरुद्ध पहिलो खेलमा ७५ रन र ओमानविरुद्ध खेलमा ६० रन बनाए, अनि यूएईविरुद्ध दोस्रो खेलमा शतक समेत जमाएको छ। ओमान विरुद्ध दोस्रो खेलमा ३३ रन बनाए। उनको प्रदर्शन प्रायः अलराउन्डर भूमिकामा केन्द्रित छ। ब्याटिङ रैंकिङमा सुधार ल्याउन निरन्तरता र स्थिर प्रदर्शन अनिवार्य छ, जुन हालका नेपाली ब्याट्सम्यानहरूले देखाउन सकेका छैनन्।
२४ वैशाख, काठमांडू। सांसदों को अन्य नागरिकों से अलग करते हुए प्रतिनिधि सभा नियमावली बनाने की खबर ने राजनीतिक क्षेत्र में बड़ा हड़कंप मचा दिया है। सत्तारूढ़ दल रास्वपा की इच्छा के अनुसार प्रस्तुत किए जाने वाले प्रतिनिधि सभा नियमावली के इस नए प्रावधान को लेकर विपक्षी दलों ने विभिन्न प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम २५९ में कहा गया है, ‘प्रचलित कानून में जो भी लिखा हो पर सभा, समिति…
२४ वैशाख, काठमाडौं। नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा आज निर्धारित विदेशी मुद्राओं के विनिमय दर के अनुसार अमेरिकी डलर, पाउण्ड स्टर्लिङ्ग और स्विस फ्रैंक के मूल्य में कमी आई है। वहीं, ऑस्ट्रेलियाई डलर और यूरो के भाव में वृद्धि हुई है। आज अमेरिकी डलर की खरीद दर १५१ रुपैयाँ ८ पैसा प्रति एक और बिक्री दर १५१ रुपैयाँ ६८ पैसा निर्धारित की गई है। कल अमेरिकी डलर की खरीद दर १५२ रुपैयाँ १६ पैसा तथा बिक्री दर १५२ रुपैयाँ ७६ पैसा थी।
यूरो के मूल्य में आज वृद्धि देखी गई है। आज यूरो की खरीद दर १७८ रुपैयाँ ५ पैसा और बिक्री दर १७८ रुपैयाँ ७५ पैसा है। कल इसकी खरीद दर १७७ रुपैयाँ ९२ पैसा और बिक्री दर १७८ रुपैयाँ ६२ पैसा थी। इसी प्रकार, पाउण्ड स्टर्लिङ्ग का मूल्य आज घटा है। पाउण्ड स्टर्लिङ्ग की खरीद दर आज २०६ रुपैयाँ ४ पैसा प्रति एक और बिक्री दर २०६ रुपैयाँ ८६ पैसा है। कल यह खरीद दर २०६ रुपैयाँ ११ पैसा और बिक्री दर २०६ रुपैयाँ ९२ पैसा थी।
स्विस फ्रैंक के भाव में भी आज गिरावट दर्ज हुई है। स्विस फ्रैंक की खरीद दर १९४ रुपैयाँ २० पैसा और बिक्री दर १९४ रुपैयाँ ९७ पैसा निर्धारि्त की गई है, जबकि कल इसकी खरीद दर १९४ रुपैयाँ २२ पैसा और बिक्री दर १९४ रुपैयाँ ९८ पैसा थी। वहीं, ऑस्ट्रेलियाई डलर का मूल्य आज बढ़ा है। ऑस्ट्रेलियाई डलर की खरीद दर १०९ रुपैयाँ ७० पैसा और बिक्री दर ११० रुपैयाँ १३ पैसा है। कल की खरीद दर १०९ रुपैयाँ १५ पैसा और बिक्री दर १०९ रुपैयाँ ५८ पैसा थी।
राष्ट्र बैंक ने बताया है कि यह विनिमय दर आवश्यकतानुसार किसी भी समय संशोधित की जा सकती है। वाणिज्य बैंक द्वारा घोषित विनिमय दर में कुछ अंतर हो सकता है एवं अद्यतन विनिमय दर केंद्रीय बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
नेपाल क्रिकेट संघ ने एशियन गेम्स चयन प्रतियोगिता और एसीसी महिला प्रीमियर कप के लिए नेपाली महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की घोषणा की है। टीम की कप्तान इन्दु बर्मा और उपकप्तान पूजा महतो चुनी गई हैं। सोनी पाख्रिन और सीता रानामगर लंबे समय बाद फिर से राष्ट्रीय टीम में लौट आई हैं। 23 वैशाख, काठमाडौं।
एशियन गेम्स चयन मलेशिया में 23 मई से 31 मई तक आयोजित होगा जबकि प्रीमियर कप 1 जून से 13 जून तक चलेगा। टीम में रुबी पोद्दार, कविता जोशी, सीता रानामगर, अनु कठायत, सोनी पाख्रिन, सिमाना केसी, बिंदु रावल, सम्झना खड्का, कविता कुँवर, रिया शर्मा, मनीषा उपाध्याय और रुबिना छेत्री शामिल हैं।
सोनी पाख्रिन ने लंबे समय बाद सीनियर राष्ट्रीय टीम में वापसी की है। इसी तरह, राइजिंग स्टार्स महिला एशिया कप में खेल चुकीं और रुवांडा में हुई श्रृंखला में हिस्सा नहीं लेने वाली सीता रानामगर भी टीम में पुनः शामिल की गई हैं। सावित्री धामी, सोमु बिष्ट, सना प्रवीण और लक्ष्मी साउद को वैकल्पिक खिलाड़ियों के रूप में रखा गया है।
पेरिस सेंट-जर्मेन ने बायर्न म्यूनिख के साथ १–१ ड्रा खेलकर कुल मिलाकर ६–५ से जीत दर्ज करते हुए यूरोपीय चैंपियंस लीग के फाइनल में जगह बनाई है। फाइनल मैच ३० मई को बुडापेस्ट में आयोजित होगा, जहां पीएसजी उपाधि के लिए आर्सनल के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा।
खेल के इंजुरी टाइम में हैरी केन ने गोल किया, लेकिन वह गोल बायर्न को फाइनल में पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं था। २४ वैशाख, काठमांडू। पूर्व विजेता फ्रेंच क्लब पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) ने यूरोपीय चैंपियंस लीग के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। पिछले रात सेमीफाइनल के दूसरे चरण में बायर्न म्यूनिख के साथ १–१ की बराबरी के बाद पीएसजी ने कुल स्कोर ६–५ से अपनी ट्रॉफी की रक्षा के सफर को जारी रखा है।
म्यूनिख के एलियान्ज एरिना में खेले गए मुकाबले में पेरिस सेंट-जर्मेन के उस्मान देम्बेले ने मात्र तीसरे मिनट में गोल किया। विचा भरात्शकेलिया की उत्कृष्ट रन और पास पर देम्बेले ने शक्तिशाली शॉट लगाकर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। घरेलू टीम बायर्न इसके बाद खेल में वापसी के लिए लगातार प्रयासरत रही।
हैरी केन को पेरिस की रक्षा में अधिकांश समय नियंत्रित रखा गया। पहले हाफ में बायर्न ने पेनाल्टी की मांग की थी, जिसे रेफरी ने अस्वीकार कर दिया। दूसरे हाफ में भी पेरिस सेंट-जर्मेन ने कुछ बेहतरीन मौके बनाए। डिज़ायर दुये ने शॉट लगाया, लेकिन बायर्न के गोलकीपर मैनुएल नॉयर ने शानदार बचाव किया। खेल के इंजुरी टाइम में हैरी केन ने अल्फोंसो डेविस के पास पर गोल करते हुए स्कोर १–१ कर दिया। लेकिन उस गोल से बायर्न के लिए फाइनल तक पहुंचना संभव नहीं था। इसके साथ ही पेरिस सेंट-जर्मेन अब उपाधि के लिए आर्सनल के खिलाफ मुकाबला करेगा।
२४ वैशाख, काठमांडू। पश्चिम बंगाल के पर्यगना जिले के मध्यमग्राम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनिर्वाचित सांसद शुभेन्दु अधिकारी के व्यक्तिगत सहायक चन्द्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। मंगलवार रात दोहरिया क्षेत्र में मोटरसाइकिल पर आए हमलावरों ने अधिकारी के पीए चन्द्रनाथ पर गोली चलाकर हत्या कर दी। लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के नेता ममता बनर्जी के निकट सहयोगी रहे शुभेन्दु अधिकारी ने हाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा में शामिल होकर ममता को हराया था।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने २०६ सीटों के साथ दो-तिहाई बहुमत हासिल कर राज्य में पहली बार सरकार बनाने की तैयारी की है। इसी समय चर्चित नेता अधिकारी के पीए की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अधिकारी के पीए चन्द्रनाथ रथ की सवार कार पर अंधाधुंध गोलीबारी हुई। गंभीर रूप से घायल उन्हें अस्पताल ले जایا गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, भारतीय मीडिया ने बताया है। घटना में उनके चालक बुद्धदेव बेरास भी घायल हुए हैं। उनकी स्थिति गंभीर बताई गई है और उन्हें कोलकाता के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चार मोटरसाइकिलों पर सवार लगभग आठ हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से हमला किया था। घटना के बाद भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं में तीव्र आक्रोश फैल गया है। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और मामले की जांच जारी है।
सरकारले आगामी जेठदेखि सहकारीबाट प्रभावित बचतकर्ताहरूलाई रकम फिर्ता गर्ने प्रक्रिया सुरु गर्ने घोषणा गरेसँगै साना बचतकर्ताहरूमा राहतको आशा जागेको छ। तर, केही ठूला बचतकर्ताहरूले भने आफ्नो पैसा फिर्ता हुनेबारे विश्वासको आधार नदेखिएको प्रतिक्रिया दिएका छन्। भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरिबी निवारण मन्त्री प्रतिभा रावलले मङ्गलवार जेठको पहिलो साताबाट बचतकर्ताहरूको रकम फिर्ता गर्ने बताएकी थिइन्।
समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिका अनुसार करिब ७६ हजार बचतकर्ताहरूको करिब ४६ अर्ब रुपैयाँ फिर्ता गरिनुपर्ने देखिएको छ। समितिले साना बचतकर्ताहरूलाई प्राथमिकतामा राखेर रकम फिर्ता गर्ने योजना बनाइरहँदा, केही ठूला बचतकर्ताहरूले सरकारद्वारा प्रस्तुत कार्ययोजनाले “सबैलाई राहत दिने स्पष्टता नदेखिएको” बताएका छन्। सहकारी बचतकर्ता संरक्षण राष्ट्रिय अभियानका अध्यक्ष कुश्लभ केसीले भने, “सरकारले साना र ठूला बचतकर्तालाई भेदभाव गर्नु हुँदैनथ्यो।”
समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिका अध्यक्ष डिल्लीराज आचार्यले भने, “सरकारको कार्ययोजना अस्पष्ट नभए पनि यसको बुझाइमा फरक हुन सक्ने” बताएका छन्। उनले साना बचतकर्तालाई प्राथमिकता दिने प्रक्रिया अवलम्बन गरिने जानकारी दिएका छन्। ठूला बचतकर्ताहरूका लागि भने, “सरकारले सबै सहकारी पीडितहरूलाई न्याय उपलब्ध गराउनै पर्छ,” केसीले जोड दिएका छन्।
सरकारले समस्याग्रस्त घोषणा गरेको सहकारीहरूमा फसेका ठूला बचतकर्ताहरूले भने, “यो योजना केही फरक विषयहरू थपेर जटिल बनाउने र काम लम्ब्याउने जस्तो लागेको” धारणा व्यक्त गरेका छन्। समितिका अध्यक्ष आचार्यले कर्जा असुलीमा चुनौतीहरू भएको र कर्जा असुली नगरी बचत रकम फिर्ता गर्नु कानुनी रूपमा सम्भव नभएको बताएका छन्।
कोहलपुर रेसिङ सहारा क्लब ने चौथे कोहलपुर गोल्डकप फुटबॉल के फाइनल में जगह बनाई। पहले हाफ में रेसिङ के निराजन खत्री और ओम प्रकाश चौधरी ने गोल किए। दूसरे हाफ में रोशन छन्त्याल ने गोल किया, लेकिन लालीगुराँस एसोसियसन क्लब पोखरा जीत हासिल करने में सफल नहीं हो सका। 23 वैशाख, काठमाडौं।
बाँकेको कोहलपुर में जारी चौथे कोहलपुर गोल्डकप–2083 के तहत, कोहलपुर रेसिङ सहारा क्लब ने फाइनल यात्रा तय की है। बुधवार को हुआ पहले सेमीफाइनल मुकाबले में आयोजनकर्ता क्लब ने लालीगुराँस एसोसियसन क्लब पोखरा को 2-1 के गोल अंतर से हराकर फाइनल स्थल सुरक्षित किया। विजयी गोल के लिए पहले हाफ के 16वें मिनट में निराजन खत्री ने गोल किया। और पहले हाफ के 38वें मिनट में ओम प्रकाश चौधरी ने उत्कृष्ट हेडर गोल करते हुए स्कोर 2-0 कर दिया।
दूसरे हाफ में लालीगुराँस एसोसियसन क्लब पोखरा ने प्रतिस्पर्धात्मक वापसी की कोशिश की। दूसरे हाफ के 68वें मिनट में रोशन छन्त्याल ने गोल किया, फिर भी वह जीत के लिए पर्याप्त नहीं था। फिनिशिंग में गलती के कारण पोखरा की लालीगुराँस एसोसियसन क्लब प्रतियोगिता से बाहर हो गई है। प्रतियोगिता के इस चौथे संस्करण में लगातार दो मैचों में जीत हासिल करते हुए कोहलपुर रेसिङ सहारा क्लब पहली फाइनल टीम बन गई है। खेल के मैन ऑफ द मैच कोहलपुर रेसिङ सहारा क्लब के ओम प्रकाश चौधरी घोषित किए गए हैं। प्रतियोगिता आगामी 26 वैशाख तक जारी रहेगी।
२४ वैशाख, काठमाडौं। प्रधानन्यायाधीश नियुक्ति के लिए सिफारिस करने के उद्देश्य से आज संवैधानिक परिषद की बैठक होगी। यह बैठक आज शाम ५ बजे शुरू होगी। बैठक का मुख्य एजेंडा “प्रधानन्यायाधीश की नियुक्ति सिफारिस” बताया गया है, जिसे परिषद के अध्यक्ष एवं प्रधानमंत्री बालेन शाह के सचिवालय ने प्रकाशित किया है। प्रकाशमानसिंह राउत ६५ वर्ष की उम्र सीमा पूरी करने पर गत चैत १८ गते प्रधानन्यायाधीश पद से अवकाश ग्रहण कर चुके हैं, जिसके बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल कार्यवाहक (का.मु.) प्रधानन्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।
रिक्त प्रधानन्यायाधीश पद पर सिफारिस के लिए आयोजित किए जा रहे बैठक में सभामुख डोल प्रसाद अर्याल, राष्ट्रिय सभा अध्यक्ष नारायण प्रसाद दाहाल, कानून, न्याय एवं संसदीय मामला मंत्री सोबिता गौतम, प्रतिनिधि सभा के विपक्षी दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे तथा प्रतिनिधि सभा की उपसभामुख रुवी कुमारी को ही आमंत्रित किया गया है। इस बैठक में कार्यवाहक प्रधानन्यायाधीश सदस्य के रूप में उपस्थित रहना संविधान द्वारा अनिवार्य है।
सरकार की दूसरी सिफारिस के बाद मंगलवार को राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने संवैधानिक परिषद से संबंधित अध्यादेश जारी किया, जिससे संवैधानिक पदों पर नियुक्ति का मार्ग खुल गया है। वर्तमान में प्रधानन्यायाधीश, प्रमुख निर्वाचन आयुक्त और अन्य संवैधानिक पदाधिकारी पद रिक्त हैं। साथ ही राष्ट्रीय प्राकृतिक स्रोत तथा वित्त आयोग के अध्यक्ष पद भी खाली है, और इनके अलावा अन्य सदस्यों का अभाव है।
पिछले माह से पद रिक्त होने से पहले न्याय परिषद ने प्रधानन्यायाधीश पद के लिए योग्य छह न्यायाधीशों के नाम संवैधानिक परिषद के सचिवालय को भेजे थे। न्याय परिषद ने सर्वोच्च अदालत के वरिष्ठतम न्यायाधीश कामु प्रधान मल्ल समेत न्यायाधीश कुमार रेग्मी, हरि फुयाल, डॉ. मनोजकुमार शर्मा, डॉ. नहकुल सुवेदी और तिलप्रसाद श्रेष्ठ को सिफारिश की थी। सूत्रों के अनुसार, कुछ ही हफ्तों में न्यायाधीश तिलप्रसाद श्रेष्ठ को न्यायिक नेतृत्व मिलने पर तत्काल सुधारों के लिए कार्ययोजना तैयार की गई थी, जिसे कुछ राजनीतिक नेताओं तक भी पहुंचा दिया गया था।
प्रधानन्यायाधीश सिफारिस के विषय में अनेक अटकलें चलने के कारण न्यायाधीश भी अनिश्चितता में दिख रहे हैं। कार्यवाहक प्रधानन्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल समेत चर्चित डॉ. मनोज शर्मा, डॉ. नहकुल सुवेदी और तिलप्रसाद श्रेष्ठ के शुभचिंतक प्रधानमंत्री बालेन शाह की मंशा समझने के लिए बार-बार प्रयास कर रहे हैं, यह जानकारी प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने दी है। हालांकि, प्रधानमंत्री शाह ने स्वयं और उनके सचिवालय को न्यायपालिका से संबंधित पक्षकारों और सरोकारवालों के साथ किसी भी प्रकार की बैठक या संपर्क से दूर रहने के निर्देश दिए हैं।
२३ वैशाख, काठमाडौं । रास्वपा सांसद सागर ढकाल ने बाँदर और बँदेल समस्याको समाधानका लागि विशेष नीति लागू करना आवश्यक बताया है। बुधबार सिंहदरबारमा बसेको कृषि समितिको बैठकमा उनले वैज्ञानिक अध्ययन र दीर्घकालीन योजनाअनुसार कृषि नीति कार्यान्वयनमा जोड दिन आग्रह गरे। ‘बाँदर तथा बँदेल समस्याको समाधानका लागि पनि विशेष नीति लागू गर्नुपर्छ। बाँदर मार्नु पर्छ भनेर हचुवाको तालमा बोल्नु हुँदैन,’ ढकालले स्पष्ट पारे।
कृषि क्षेत्रमा देखिएका समस्याहरूको पहिचान गरी समाधानका उपाय सुझाउन विश्वविद्यालयहरूसँग सहकार्य गर्नुपर्ने आवश्यकतामा पनि उनले जोर दिए। ‘कृषि क्षेत्रमा देखिएका समस्याहरूको पहिचान गरी समाधानका उपायबारे सिफारिस गर्न विश्वविद्यालयलाई अनुरोध गरौं। त्यस्तै कृषि औद्योगिकरणमा पनि हामीले जोर दिन आवश्यक छ,’ सांसद ढकालले भन्नुभयो।
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शिवोन जिलिस और इलन मस्क समाचार सारांश के रूप में संपादकीय समीक्षा किए गए। ओपनएआई की पूर्व निदेशक शिवोन जिलिस ने खुलासा किया कि इलन मस्क ने 2020 में उन्हें शुक्रकीट दान करने का प्रस्ताव दिया था। जिलिस ने मस्क के साथ एक बार प्रेम संबंध स्वीकारते हुए 2021 में जन्मे जुड़वाँ बच्चों के पिता मस्क को ही बताया। अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार मस्क ने ओपनएआई को लाभकारी कंपनी में परिवर्तित करने के फैसले को उलटने और अतिरिक्त नियंत्रण की इच्छा जताई थी।
२४ वैशाख, काठमाडौं। ओपनएआई की पूर्व बोर्ड सदस्य शिवोन जिलिस ने अमेरिकी अरबपति इलन मस्क द्वारा उन्हें शुक्रकीट दान का प्रस्ताव दिए जाने की बात सार्वजनिक की है। कैलिफ़ोर्निया के ऑकलैंड में संघीय न्यायालय में बुधवार को दिए गए बयान में उन्होंने मस्क के साथ अपने निजी संबंध और उनके द्वारा जन्मे चार बच्चों के बारे में खुलकर जानकारी दी। जिलिस ने इस बयान में मस्क द्वारा ओपनएआई को लाभकारी कंपनी बनाने के फैसले को उलटने के लिए दायर किए गए मुकदमे से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया है। अदालत में उन्होंने बताया कि 2020 में जब वह मां बनना चाह रही थीं, तब मस्क ने शुक्रकीट दान करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा, ‘मैं वास्तव में मां बनना चाहती थी। उस समय इलन ने यह प्रस्ताव रखा और मैंने स्वीकार किया।’
उनके अनुसार मस्क अपने आसपास के लोगों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। ‘उन्होंने देखा कि मैंने बच्चे को जन्म नहीं दिया तो उन्होंने दान करने की पेशकश की,’ जिलिस ने कहा। सिलिकॉन वैली में 15 वर्षों से अधिक समय तक वेंचर कैपिटलिस्ट के रूप में काम करने वाली जिलिस टेस्ला और न्यूरालिंक जैसी मस्क की कंपनियों में कार्यकारी पदों पर रहीं। वह 2016 में ओपनएआई की स्थापना के कुछ समय बाद सलाहकार के रूप में जुड़ी थीं। मस्क की कंपनियों और ओपनएआई दोनों में उनकी भूमिकाओं के कारण वे वर्तमान मुकदमे में महत्वपूर्ण गवाह मानी जा रही हैं।
ओपनएआई के वकीलों ने संदेह व्यक्त किया है कि मस्क ने 2018 में कंपनी छोड़ने के बाद भी जिलिस के माध्यम से कंपनी की जानकारी प्राप्त की। जिलिस ने करीब दस साल पहले मस्क के साथ ‘‘एक बार का’’ प्रेम संबंध स्वीकार किया है। लेकिन 2020 में मस्क ने बच्चों के पिता बनने का प्रस्ताव दिया जब वे प्रेम संबंध में नहीं थीं। उन्होंने कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण शादी करके बच्चे पैदा करने की अपनी पारंपरिक योजना को बदलना पड़ा, यह भी जानकारी दी।
जिलिस के अनुसार शुरुआत में वह और मस्क ने उनके पितृत्व को ‘‘पूरी तरह से गोपनीय’’ रखने पर सहमति जताई थी। इसलिए उन्होंने 2021 में जन्मे जुड़वाँ बच्चों के पिता के रूप में मस्क का नाम ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन को भी नहीं बताया। बाद में बिजनेस इनसाइडर द्वारा इस खबर को सार्वजनिक करने की योजना जानने के बाद उन्होंने ऑल्टमैन को सूचित किया। इसके बावजूद, ऑल्टमैन और ओपनएआई अध्यक्ष ग्रेग ब्रोकमैन ने उन्हें बोर्ड में बनाए रखने की इच्छा जताई। जिलिस के अनुसार वे कम से कम 2023 तक मित्रवत संबंध बनाए हुए थे।
इस बीच, अदालत में प्रस्तुत ईमेल और संदेशों से पता चलता है कि ओपनएआई को गैर-लाभकारी संस्था से लाभकारी मॉडल में परिवर्तित करने को लेकर मस्क और कंपनी नेतृत्व के बीच काफी समय से मतभेद हैं। अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार मस्क ओपनएआई पर अधिक नियंत्रण चाहते थे। उन्होंने कंपनी को टेस्ला के अधीन लाने का प्रस्ताव भी दिया था। लेकिन ओपनएआई नेतृत्व ने मस्क को कंपनी के कार्यों में नियंत्रण देने को तैयार नहीं होने का उल्लेख किया है।
राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टीले आगामी आर्थिक वर्षको बजेटका लागि मन्त्री र सांसदबीच बुधवारदेखि अन्तर्क्रिया सुरु गरेको छ। अर्थमन्त्री डा. स्वर्णिम वाग्लेले राजश्व वृद्धिद्वारा १२ खर्बबाट १४ खर्ब पुर्याउने लक्ष्य रहेको जानकारी गराएका छन्। मन्त्रीहरूले परिणाममुखी बजेट ल्याउने र पुराना विकृत पद्धति हटाउने तयारी भइरहेको सांसदहरूलाई जानकारी गराएका छन्। २३ वैशाख, काठमाडौं।
राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ले मन्त्री र सांसदबीच अन्तर्क्रिया सुरु गरेको छ। आगामी आर्थिक वर्षको बजेटका सन्दर्भमा बुधवारदेखि मन्त्री र सांसदबीच छलफल सुरु गरिएको हो। पहिलो दिन अर्थमन्त्री डा. स्वर्णिम वाग्ले र भौतिक पूर्वाधार मन्त्री सुनिल लम्सालले सांसदहरूसँग छलफल गरेका छन्। बजेट निर्माणको तयारी तथा प्रक्रिया बारे जानकारी सांसद खगेन्द्र कर्णले दिएका छन्।
अर्थमन्त्री वाग्लेले राजश्व वृद्धि गर्ने लक्ष्य सरकारले राखेको उल्लेख गरे। १२ खर्बको राजश्व संकलनलाई बढाउँदै १४ खर्ब पुर्याउने लक्ष्य रहेको जानकारी दिए। विगतमा निर्माण सुरु गरिएका ३ हजार पुल तीन वर्षभित्र पूरा गर्ने लक्ष्य रहेको सांसदहरूलाई बताइएको थियो। प्रमुख शहरहरूलाई धुलोमुक्त बनाउने योजना तथा नाका व्यवस्थापन गर्ने सरकारको योजना रहेको सांसद दीपककुमार साह (सुनसरी)ले जानकारी दिएका छन्।
पूर्वाधार विकासका लागि भारत र चीनबाट अनुदानको रूपमा ऋण लिने योजना रहेको पनि सांसदहरूलाई जानकारी गराइएको छ। मन्त्री वाग्ले र लम्सालले यस पटक रासायनिक मलको अभाव नहुने जानकारी दिएका छन्। अर्थमन्त्री वाग्लेले प्राथमिकताको आधारमा बजेट विनियोजन हुने भएकाले बजेटका लागि मन्त्रीको कोठामा अनावश्यक रूपमा नजाने सांसदहरूलाई आग्रह गरेका छन्। पुरानो पद्धति अनुसार मन्त्रीलाई बारम्बार भेटेर बजेटका लागि आग्रह गर्ने काम नहुने जानकारी मन्त्रीहरूले दिएका छन्।
छलफलमा सहभागी एक सांसदले यो जानकारी दिएका छन्। नयाँ सरकारले परिणाममुखी बजेट ल्याउने योजना बनाएको अर्थमन्त्री वाग्लेले बताएका छन्। पुराना विकृत पद्धतिलाई हटाएर परिणाममुखी बजेट लागू गरिने उनले सांसदहरूलाई बताए। अघिल्लो सरकारले ल्याएका दायित्व चिर्दै बजेट निर्माण गर्दै जाने पनि जानकारी दिइयो। विकास आयोजनाहरू तोकिएको समयमा पूरा नभएको र लागत बढी भएको तथ्याङ्क पनि मन्त्रीहरूले प्रस्तुत गरेका छन्, सांसद साहले बताएका छन्। बिहीबार पर्यटन, सञ्चार तथा कानुनी मन्त्रीहरूसँग सांसदहरू छलफल गर्ने कार्यक्रम छ।
समाचार सारांश समीक्षात्मक रूप में तैयार किया गया है। भारत के पश्चिम बंगाल और केरल में सम्पन्न विधानसभा चुनावों में वामपंथियों को भारी पराजय का सामना करना पड़ा है। नेपाल में हाल ही में हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में कम्युनिष्ट पार्टी सीमित होकर केवल ४२ सीटों पर सिमटी हैं और पाँच वर्षों तक सत्ता में न आने की संभावना है। नेकपा अध्यक्ष प्रचण्ड ने पार्टी पुनर्गठन और वाम एकता के प्रयास करने का निर्णय ले लिया है, फिर भी नेताओं के बीच मतभेद बरकरार हैं। २३ वैशाख, काठमांडू। पड़ोसी भारत के दक्षिण के राज्यों में हुए चुनाव परिणाम को नेपाल के राजनीतिक क्षेत्र गंभीरता से देख रहा है। पश्चिम बंगाल, केरल जैसे वामपंथी प्रभावशाली राज्यों में आयोजित चुनाव ने Nepal के राजनीतिक नेताओं और आम जनता दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। लेकिन इस बार विशेष ध्यान इस बात का है कि लगभग पाँच दशक के बाद भारत में किसी भी सरकार को वामपंथी पार्टियों ने विजय न दिला पाई। एक दशक से अधिक समय तक वाम शासन चलाने वाला पश्चिम बंगाल, जो कि २०११ के बाद गैरवाम सरकार का अधीन है, इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तृणमूल कांग्रेस को पराजित कर बहुमत प्राप्त किया है। २९४ सीटों के चुनाव में वामपंथी केवल २ सीटें ही जीत पाए।
दशकों तक वाम शासन वाला दूसरा राज्य केरल भी इस बार कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन के बहुमत में रहने से वामपंथी ३५ सीटों तक सिमट गए। यहाँ १४० सीटों में से कांग्रेस ६३, इंडियन मुस्लिम लीग २२ और अन्य सहयोगी दल १७ सीटें जीत गए। केरल में कांग्रेस और वामपंथी गठबंधन सरकार ने भी कोई बड़ा बदलाव नहीं किया। पश्चिम बंगाल में वाम सत्ता के पतन से त्रिपुरा पर भी असर पड़ा है, जहाँ हाल ही गैरवाम सरकार स्थापित हुई है। २० वर्षों तक वामपंथी शासन वाले त्रिपुरा में २०१८ से सत्ता परिवर्तन हुआ। वाम विचारक हरि रोक ने कहा, विश्व में दक्षिणपंथी लोकप्रियतावाद के बढ़ते प्रभाव ने नेपाल और भारत को भी प्रभावित किया है। परंतु यह प्रभाव वामपंथियों की कमजोरी पर आधारित है। ‘पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के वामपंथियों ने अपने एजेंडा से दूरी बनाई, जिससे जनता में दूरी बढ़ी,’ उन्होंने कहा, ‘नेपाल में भी ऐसी ही स्थिति है और इसके परिणाम अब दिख रहे हैं।’
भारतीय वामपंथी की पराजय नेपाली वामपंथियों के लिए चिंता का विषय है। हालिया फागुन में संपन्न प्रतिनिधि सभा चुनाव में भी नेपाली वाम शक्तियां कमजोर हुई हैं। नेपाल में २० वर्षों बाद पहली बार गैरवाम सरकार सत्ता में आई है। २०४८ साल में स्थापित नेकपा एमाले केवल २५ सीटों तक सिमटी है, जिसमें ९ सीटें प्रत्यक्ष चुनाव से और १६ समानुपातिक हैं। २०६३ साल से सत्ता में रही नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सम्मिलित) ने १७ सीटें हासिल की हैं। कुल सीटें ४२ ही रह गई हैं। आठ साल पहले ०७४ साल के चुनाव में कम्युनिस्ट लगभग पूरे देश पर शासन कर रहे थे और सात प्रदेशों में से छह में लगभग दो-तिहाई बहुमत था। लेकिन हाल के चुनाव में रास्वपा ने १८२ सीटें जीतकर अगले पाँच वर्षों तक कम्युनिस्ट नेतृत्व की संभावना कम कर दी है। समानुपातिक मतों में भी वामपंथियों की स्थिति कमजोर रही। एमाले ने १४,५५,८८५ (१३.४३%) और नेकपाने ८,११,५७७ (७.४९%) वोट प्राप्त किए। अन्य छोटे वाम दल थ्रेशोल्ड पार नहीं कर पाए। २०१५ के बाद वामपंथी कभी इतने कमजोर नहीं रहे। इस कमजोर नतीजे ने नेपाली वामपंथियों को और दुख दिया है।
नेकपा प्रवक्ता प्रकाश ज्वाल ने कहा, ‘श्रीलंका को छोड़कर दक्षिण एशिया में वामपंथियों को ऐतिहासिक पराजय का सामना करना पड़ा है। भारत की हालिया पराजय चिंता बढ़ाती है।’ इस पराजय के कारण भारतीय चुनावी परिणाम से उत्पन्न घाव का नेपाली वामपंथी पूरी तरह समीक्षा नहीं कर पाए हैं। खासकर एमाले संकट में है और समीक्षा प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई। फिर भी नेताओं ने स्वीकार किया है कि पराजय के कारणों की खोज कर सुधार अपरिहार्य है। उपाध्यक्ष गोकर्ण विष्ट के अनुसार, ‘जनता की बदलती इच्छा को समझने में विफलता, हमारी बात और काम में कमी क्या थी? पार्टी की रक्षा के लिए गंभीर समीक्षा आवश्यक है।’ वाम विश्लेषक हरि रोक ने कहा कि नेपाली वामपंथियों ने जनता की मांगों को भूलकर कुछ कॉर्पोरेटों का पक्ष लिया, जिससे आम जनता के एजेंडे से दूरी बनी और पॉपुलिज्म बढ़ा।
१० वर्षों के सशस्त्र विद्रोह के बाद ०६४ साल में सम्पन्न पहले संविधान सभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने वाले पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ अपनी पार्टी के पुनर्गठन की तैयारी में हैं। चैत १९ से वैशाख १४ तक चलने वाली केन्द्रीय कार्यसमिति बैठक के बाद आगामी मंसिर में एकता महाधिवेशन का आयोजन किया जाएगा। इससे नेतृत्व पुनर्गठन की उम्मीद है। प्रचण्ड ने वाम एकता का निर्णय लिया और वक्तव्य जारी किया है, जो कुछ नेताओं को असहज करता दिख रहा है। प्रवक्ता प्रकाश ज्वाल ने १९ वैशाख को जारी बयान में कम्युनिस्ट पार्टियों की एकता का उल्लेख भी किया। ‘पार्टी पुनर्गठन के साथ समग्र कम्युनिस्ट आंदोलन के पुनर्गठन और एकीकृत पार्टी निर्माण के लिए विशेष पहल होगी,’ बयान में कहा गया है।
प्रचण्ड ने कम्युनिस्ट पार्टी स्थापना दिवस पर भी वाम एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। ‘समाजवाद और साम्यवाद के लक्ष्य रखने वाले सभी वामपंथियों के बीच एकता आज की जरूरत है,’ उन्होंने ९ वैशाख को कहा। वहीं, एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के समर्थक नेताओं ने भी कम्युनिस्ट एकता की पहल शुरू की, जो विवादों को जन्म दे रही है। एक एमाले नेता ने कहा, ‘केपी ओली और प्रचण्ड को नेताओं मानकर हमने एकता की कोशिश की, लेकिन वह पहले ही असफल रही।’ नेकपा नेता और पूर्व अर्थ मंत्री वर्षमान पुन ने कहा कि तत्काल पार्टी एकता संभव नहीं है। ‘समस्याओं को एक साथ रखकर हल नहीं किया जा सकता, पहले अलग-अलग पार्टी का पुनर्गठन जरूरी है, तब बातचीत संभव है।’ इतने शर्मनाक पराजय के बावजूद नेपाली वामपंथी स्पष्ट दिशा नहीं दे पा रहे हैं। ओली और प्रचण्ड के साथ जाने या नया नेतृत्व चयन कर पुनर्गठन की राह अपनाने को लेकर मतभेद है। इसी वजह से एमाले समीक्षा बैठक भी नहीं बुलाई जा रही। कई वाम नेता और विश्लेषक मानते हैं कि नेतृत्व पुनर्गठन के बिना नेपाली वाम शक्तियां पुनर्निर्मित नहीं हो सकतीं। ‘पॉपुलिज्म से आई सत्ता देश की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती, इसलिए वाम शक्तियां फिर उठ सकती हैं, मगर इसके लिए नेतृत्व पुनर्गठन जरूरी है,’ रोक ने कहा।
नेकपा संयुक्त के कार्यवाहक अध्यक्ष घनश्याम भूसाल ने भी वामपंथी पराजय का मुख्य कारण कमजोर नेतृत्व को बताया। ‘नेपाल की लोकतंत्र और राष्ट्रीय पहचान कम्युनिष्टों ने बनाई, लेकिन प्रभावी नेतृत्व न होने से हम पराजित हुए,’ भूसाल ने कहा। उनके अनुसार, ओली और प्रचण्ड ने आंदोलन को केवल सत्ता का खेल बनाया, जिससे जनता वाम आंदोलन की सही भावना नहीं समझ पाई।
बाएं से क्रमशः बसंत बस्नेत, विष्णुप्रसाद भुसाल और भीमलाल अधिकारी। संघीय सरकार द्वारा ऐलानी जमीनों में बने घरों को ध्वस्त कर नागरिकों को बेघर किए जाने पर विभिन्न पालिकाओं ने विरोध जताया है। नवलपुर के कावासोती और उदयपुर के त्रियुगा पालिकाओं ने ऐलानी जमीन पर रह रहे नागरिकों को त्रस्त करने का आरोप लगाते हुए बयान जारी किए हैं। २३ वैशाख, काठमांडू। विभिन्न पालिकाओं ने संघीय सरकार द्वारा भौतिक संरचनाएँ तोड़कर नागरिकों को अपने ही देश में बेघर बनाए जाने पर विरोध किया है। उन्होंने अलग-अलग बयानों में कहा है कि सरकार ने ऐलानी जमीन पर रहने वाले नागरिकों को भी त्रस्त और बेघर कर दिया है। इस विरोध में कावासोती और त्रियुगा नगरपालिकाएं शामिल हैं।
कावासोती के मेयर विष्णुप्रसाद भुसाल ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा, ‘संघीय सरकार ने सरकारी और सार्वजनिक जमीन की सुरक्षा के नाम पर वर्षों से ऐलानी जमीन पर घर बनाकर जीवन यापन कर रहे नागरिकों को त्रस्त करते हुए घर और भौतिक संरचनाएं तोड़कर जमीन पर नियंत्रण कर अपने ही देश के नागरिकों को अंदर ही अंदर बेघर करने के कार्यशैली के प्रति कावासोती नगरपालिका अत्यंत चिंतित है।’ मेयर भुसाल ने कहा कि नगरपालिका ने लालपुर्जा वितरण के लिए निस्सा भी जारी किया है।
त्रियुगा नगरपालिक के मेयर बसंत बस्नेत ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि ऐलानी जमीन पर निवास कर रहे नागरिकों को त्रस्त करने की इस कार्रवाई का वे विरोध करते हैं। पालिका ने लालपुर्जा प्रदान करने के लिए भूमि स्वामित्व अधिकार प्रमाणपत्र (सेतो पुर्जा) भी वितरण किया है। दोनों नगरपालिकाओं ने कानूनी तौर पर सरकारी और सार्वजनिक जमीनों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता भी जताई है।
नवलपुर जिले के मध्यबिंदु नगरपालिका के मेयर भीमलाल अधिकारी ने कहा है कि राज्य संयंत्र की कमजोरी के कारण वर्षों से भूमिहीन दलित, सुकुम्बासी और अव्यवस्थित तथा गरीब नागरिकों की समस्या हल नहीं हो पाई है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ‘समस्या के समाधान के लिए नीतिगत और प्रक्रियागत रास्ता देना चाहिए, लेकिन इसके बजाय पीड़ित नागरिकों पर दबाव और त्रास उत्पन्न करना अत्यंत दुखद विषय है। घर छूट जाने के बाद बिचल्ली में पड़े बच्चे, वृद्ध, बीमार, दिव्यांग और गर्भवती महिलाओं की हृदय विदारक स्थिति देखकर मन अत्यंत पीड़ित हुआ है।’
इससे पहले बर्दिया की आठ पालिकाओं ने संयुक्त बयान जारी कर संघीय सरकार के वन क्षेत्रों से बस्तियां हटाने के निर्णय का विरोध किया था। ग्रामीण पालिका राष्ट्रीय महासंघ नेपाल और नेपाल नगरपालिका संघ ने भी संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि बस्तियां हटाने से भूमिहीन नागरिकों में त्रास और भय बढ़ेगा और जीवन की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ेगा।
नेपाल में इस वर्ष मानसून अवधि में औसत से कम वर्षा और अधिक गर्मी की संभावना जताई गयी है।
प्रशांत महासागर के एल नीनो और हिन्द महासागर के इंडियन ओशन डाइपोल मानसून कमजोर होने के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
कमजोर मानसून के कारण कृषि और जलविद्युत क्षेत्रों में प्रभाव पड़ने और खाद्य सुरक्षा जोखिम बढ़ने की आशंका है।
२३ वैशाख, काठमांडू। नेपाल में इस वर्ष मानसून अवधि में औसत वर्षा की तुलना में कम वर्षा और अधिक तापमान होने का अनुमान लगाया गया है।
प्रशांत महासागर में विकसित ‘एल नीनो’ और हिन्द महासागर के ‘इंडियन ओशन डाइपोल’ की तटस्थ स्थिति के कारण इस वर्ष मानसून कमजोर रहने का अनुमान है। हालांकि नेपाल के कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना भी है।
नेपाल में जून से सितंबर तक की अवधि मानसून काल के रूप में मानी जाती है। इस दौरान कुल वर्षा का लगभग ८० प्रतिशत होता है। मानसून या वर्षा सीधा प्रभाव डालती है फसलों और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर। साथ ही, बाढ़ और भू-स्खलन के कारण जन और संपत्ति का नुकसान होता है, इसलिए मानसून पर सभी की नजरें रहती हैं।
इसीलिए दक्षिण एशियाई देशों के ऋतुगत मौसम पूर्वानुमान संगठन, दक्षिण एशियाई जलवायु दृष्टिकोण मंच (सास्कोफ) हर साल मानसून की जानकारी जारी करता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर नेपाल के जल और मौसम विज्ञान विभाग भी संभावित मानसून की स्थिति की सूचना प्रदान करता है। विभाग ने आगामी शुक्रवार को सभी संबंधित पक्षों को एकत्रित करके इस वर्ष के मानसून की स्थिति पर जानकारी देने का कार्यक्रम रखा है।
सास्कोफ की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
हाल ही में मालदीव के माले में सास्कोफ की बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका समेत नौ देशों के मौसम विशेषज्ञ शामिल थे।
बैठक में मई से सितंबर तक की मानसून अवधि के दौरान दक्षिण एशिया के उत्तर-पश्चिमी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा होने का अनुमान लगाया गया। जबकि मध्य क्षेत्र में वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है।
तापमान का अनुमान
नेपाल के पूर्वी हिस्से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के निकट हैं, इसलिए ये सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में आते हैं। परन्तु नेपाल का बड़ा हिस्सा मध्य भाग में पड़ता है जो कम वर्षा वाले क्षेत्र में आता है। इसलिए कुछ जगहों पर भारी वर्षा हो सकती है लेकिन कुल मिलाकर कम वर्षा होने की उम्मीद है।
त्रिभुवन विश्वविद्यालय के जल तथा मौसम विभाग के सहप्राध्यापक डॉ. विनोद पोखरेल ने बताया कि इस वर्ष मानसून शुरुआती चरण में कमजोर होगा और ज्यादातर क्षेत्रों में औसत से कम वर्षा होने की संभावना है। उनके अनुसार आगामी जेठ १५ से सावन १५ (जून और जुलाई) तक का समय सूखा रहेगा।
मानसून की इस अस्थिरता का कृषि और जलविद्युत क्षेत्रों पर सीधा असर होगा। कमजोर मानसून के कारण पहले आधे काल में केवल लगभग ३०-४० प्रतिशत रोपाई संभव हो पाने का डॉ. पोखरेल ने उल्लेख किया।
मानसून कमजोर होने के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष मानसून कमजोर होने के दो मुख्य मौसमी कारण हैं – ‘एल नीनो’ प्रभाव और हिन्द महासागर में ‘इंडियन ओशन डाइपोल’ (आईओडी) की स्थिति।
प्रशांत महासागर में तापमान औसत से अधिक होना ‘एल नीनो’ कहलाता है, जो दक्षिण एशिया के मानसून को प्रभावित करता है। एल नीनो की स्थिति हालांकि अब तटस्थ हो रही है, लेकिन इसके शेष प्रभाव और वायुमंडलीय परिवर्तनों के कारण जून और जुलाई में बादल बनने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
इसी प्रकार, नेपाल के मानसून पर हिन्द महासागर के तापमान (इंडियन ओशन डाइपोल) का बड़ा प्रभाव होता है। अंतरराष्ट्रीय मॉडलों के अनुसार इस वर्ष जून-जुलाई के दौरान हिन्द महासागर की स्थिति तटस्थ रहेगी, जिससे नेपाल तक नमी युक्त हवा पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।
जलवायु और आपदा विशेषज्ञ डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि जून के मध्य तक पानी अच्छे तौर पर पड़ सकता है लेकिन जून के अंत में सूखा आएगा और जुलाई में कम वर्षा होने की संभावना है। फिर सितंबर के अंत में मानसून सक्रिय हो सकता है।
डा. उप्रेती कहते हैं, ‘आईओडी अभी तटस्थ है और प्रशांत महासागर में सुपर एल नीनो की स्थिति है। सुपर एल नीनो के दौरान अत्यधिक सूखा पड़ता है। अगर अप्रैल से जून तक यही स्थिति रही तो जुलाई से सितंबर तक दूसरी स्थिति देखने को मिलेगी।’
इस प्रकार जून के मध्य तक बारिश हो सकती है लेकिन अंत में सूखा बढ़ेगा और जुलाई में कम वर्षा होगी। उसके बाद सितंबर के अंत तक आईओडी सकारात्मक स्थिति में पहुंच सकता है, जिससे दशहरा-तिहार के समय मानसून पुनः सक्रिय हो सकता है, डॉ. उप्रेती ने बताया।
नेपाल की अर्थव्यवस्था में कृषि का प्रमुख योगदान होता है, जो लगभग ७५ से ९० प्रतिशत मानसूनी वर्षा पर निर्भर है। कम वर्षा से धान और अन्य वार्षिक फसलों पर असर पड़ेगा तथा खाद्य असुरक्षा का खतरा बढ़ेगा। इसके अलावा, अधिकांश जलविद्युत आयोजन नदी के जल प्रवाह पर आधारित हैं, जिससे वर्षा कम होने पर सर्दियों में लोडशेडिंग या ऊर्जा संकट की समस्या दोबारा हो सकती है।
जल तथा मौसम विज्ञान विभाग क्या कहता है?
इस वर्ष मानसून अवधि में वर्षा कम होने के साथ-साथ दिन और रात के तापमान (अधिकतम और न्यूनतम) भी औसत से अधिक रहने की संभावना जताई गई है, जिससे जन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है। खासकर तराई क्षेत्र में कृषि उत्पादन और दैनिक जीवन प्रभावित होने की आशंका है।
जल तथा मौसम विज्ञान विभाग की प्रवक्ता विभूति पोखरेल ने कहा कि नेपाल में मानसून को प्रभावित करने वाले कई अन्य कारक भी हैं, इसलिए अभी यह निश्चित रूप से कहना कठिन है कि इस मानसून का स्वरूप कैसा होगा।
‘एल नीनो है, लेकिन नेपाल में मानसून पर प्रभाव डालने वाले कई अन्य कारण भी हैं, इसलिए अभी यह कहना संभव नहीं कि मानसून यहीं रहेगा,’ उन्होंने कहा। ‘मानसून की स्थिति बीच-बीच में अपडेट की जाती है, इसलिए इसे करीब से नजर रखना आवश्यक है।’
कुछ सालों में जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में व्यापक बदलाव देखा गया है। बारिश के दौरान कहीं अत्यधिक वर्षा हुई है तो कहीं सूखा पड़ा है।
इसलिए विशेषज्ञों ने कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उपयुक्त वैकल्पिक फसलों का चयन, पीने का पानी और सिंचाई के जल संचयन, तापमान नियंत्रण तथा अन्य अनुकूलन कार्यक्रम अपनाने की सलाह दी है।