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लेखक: space4knews

सरकार ने राजनीतिक नियुक्ति वाले अदालत सदस्यों को इस्तीफा देने का किया आग्रह

सरकार ने कानूनी सचिव के माध्यम से प्रशासकीय अदालत और श्रम अदालत के सदस्यों से इस्तीफा देने का आग्रह किया है। कानूनी सचिव पारश्वर ढुंगाना ने कहा कि राजनीतिक नियुक्ति पाने वालों को विदा कर योग्य प्रतिस्पर्धी के माध्यम से नियुक्ति करने की सरकार की नीति है। प्रशासकीय अदालत में नवलकिशोर यादव और आलोकचन्द्र श्रेष्ठ तथा श्रम अदालत में शैलेन्द्र कुमार चौरसिया और कुमारी खरेल सदस्य हैं। २३ वैशाख, काठमाडौं।

कानूनी सचिव ढुंगाना ने एक बातचीत में कहा, “राजनीतिक नियुक्ति वाले व्यक्तियों को हटाकर उन पदों पर योग्य और प्रतिस्पर्धी व्यक्तियों की नियुक्ति करना सरकार की स्पष्ट नीति है।” उन्होंने आगे कहा, “सरकार ने उन्हें नियुक्त किया है, लेकिन बिना प्रतिस्पर्धा के हुई राजनीतिक नियुक्तियों की वजह से सरकार का संदेश मैं ने उन्हें पहुंचा दिया है।”

कानूनी सचिव से फोन पर बातचीत में, दो न्यायाधिकरण सदस्यों ने बताया कि उन्हें सर्वोच्च अदालत के कुछ न्यायाधीशों द्वारा फोन कर इस्तीफा देने के निर्देश मिले हैं। प्रशासकीय अदालत के सदस्य नवलकिशोर यादव और आलोकचन्द्र श्रेष्ठ तथा श्रम अदालत के सदस्य शैलेन्द्र कुमार चौरसिया और कुमारी खरेल हैं। ये सभी सदस्य पूर्व सरकार द्वारा नियुक्त किए गए थे।

सचिव ढुंगाना ने कहा, “अध्यक्षों की नियुक्ति न्यायपरिषद की सलाह से होती है, इसलिए सरकार ने इस संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया है।” प्रशासकीय अदालत निजामती कर्मचारियों से जुड़े मामलों और विवादों का निपटारा करती है, जबकि श्रम अदालत कर्मचारी और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बीच विवादों को सुलझाती है। दोनों अदालतें न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) प्रकृति की हैं।

हर्क साम्पाङ बोल्दा अरू कहाँ थिए ? – Online Khabar

हर्क साम्पाङ बोल रहे थे, तो बाकी कहां थे?

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा सहित समेटा गया।

  • हर्क साम्पाङ ने सुकुमवासी बस्तियों को हटाने की सरकारी कार्यशैली की आलोचना करते हुए व्यवस्थित योजना की आवश्यकता बताई है।
  • उन्होंने कहा कि सरकार संसद के दरवाजे बंद करके अध्यादेश के जरिए काम कर रही है और बहुमत के दबाव में किसी की नहीं सुन रही।
  • प्रतिपक्षी दल कांग्रेस और एमाले की सुकुमवासी समस्या समाधान में सक्रिय भूमिका न निभाने पर हर्क ने सवाल खड़े किए हैं।

हर्कवाद के औचित्य पर कभी अलग चर्चा होगी, लेकिन वर्तमान में हर्क साम्पाङ की प्रासंगिकता राष्ट्रीय राजनीति में स्पष्ट हो आई है। यह सब जानते हैं कि वे बेहद प्रतिबद्ध नेता हैं। उनके शुरू किए श्रम संस्कृति ने अपनी पार्टी में स्थायी पहचान नहीं बनाया है। जहां वे जाते हैं, पार्टी भी वहीं जाती है। वे जो निर्णय लेते हैं, वह पार्टी का निर्णय होता है। हर्क की इस कार्यशैली को श्रम संस्कृति कहा जाता है।

२३ वैशाख को ललितपुर के नखिपोट में जब हमारी टीम उनसे मिली, वह पुराने फिल्म कलाकार राजकुमार राई का पार्टी में स्वागत कर रहे थे। फिल्म द कमांडो से मशहूर राजकुमार ने लंबा समय पर्दे के पीछे बिताया। उनके साथ आरेन राई, सुदीप राई, प्रितम साँवा जैसे युवा भी थे। वहां भीड़ तो थी ही, साथ ही नई पार्टी के प्रति उत्साह भी नजर आ रहा था।

अभी संसद में मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस है, साथ ही एमाले भी प्रतिपक्ष में है। नेकपा और राप्रपा जैसे अन्य दल भी अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। फिर भी हर्क साम्पाङ और उनकी पार्टी के सांसद क्यों ज्यादा चर्चा में हैं, इसका कारण है।

विस्तृत बहुमत वाली सरकार तेजी से निर्णय करा रही है। सुकुमवासी बस्तियों में डोजर चलाया जा चुका है। सरकार दावा करती है कि होल्डिंग सेंटरों में बेहतरीन सुविधाएं हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की योजनाबद्ध यात्राओं में पुलिस सुरक्षा के बीच सुकुमवासी कहते हैं कि ‘हमें यहाँ सुविधाएं मिल रही हैं। पहले हमें श्रम करके खाना पड़ता था, अब सरकार मुफ्त सुविधा दे रही है।’

लेकिन संवाददाताओं से बात करते हुए सुकुमवासियों ने व्यवस्थित योजना के तहत बस्ती हटाने की मांग की है। राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने भी सरकार को इसी तरह सलाह दे रहे हैं। नीति सही हो, पर क्रियान्वयन कठिन है। इसी बीच सत्तारूढ़ पार्टी के भी अंदर विरोध की आवाजें उठ रही हैं और हर्क साम्पाङ सरकार के इस तरीके का विरोध कर रहे हैं।

ध्वस्त हुई सुकुमवासी बस्ती में हर्क साम्पाङ

ललितपुर के नखिपोट में हमसे मिलने पर हर्क लोकतंत्र में नागरिकों को सम्मान और गरिमा के साथ जीने और चलने का अधिकार क्यों होना चाहिए, यह बात अक्सर नेपाली और कभी-कभी अंग्रेजी में कहते थे। उनका कहना था, ‘काम करने वाले का भी अधिकार होता है। गरीबों की भी इज्जत होती है। झोपड़ियों में भरे हुए कापी-पुस्तकों से बच्चों की आंखों में आंसू आते हैं। सुकुमवासी बस्तियों में प्रेमी युगल थे, जो शादी की तैयारी कर रहे थे, उनकी इज्जत पर चोट लग रही है। सरकार ऐसा कर रही है।’

हर्क काम करते हुए कभी आंकड़े बढ़ा देते हैं, कभी घटा देते हैं, पर सभी नेता संवेदनशीलता में माहिर होते हैं।

हालांकि कुछ सुकुमवासियों को डोजर चलाया गया है और अव्यवस्थित बस्तियों व सरकारी जमीन पर पहले से ही कार्रवाई का इंतजार है। उनमें से एक हर्क साम्पाङ हैं।

कई नेता होल्डिंग सेंटर जैसे डिटेंशन सेन्टर तक नहीं पहुंच पाए हैं। कुछ को राजनीतिक छलांग लगाते-लगाते यात्रा ही रोकनी पड़ी। गरीबों के कष्ट किसी के लिए मनोरंजन नहीं होना चाहिए। सही रूप में राजनीति और जन समस्याओं का सामना हर्क वहां जाकर कर रहे हैं और स्थिति जनता के साथ साझा कर रहे हैं।

इस बीच कांग्रेस और एमाले क्या कर रहे हैं? वे हर्क से बड़े पदों वाले नेता हैं। मैंने दोनों के वरिष्ठ नेताओं से फोन पर बात की। एक वरिष्ठ एमाले नेता ने कहा, ‘इतने सारे लोग एक साथ बेघर हो गए, आप लोग क्या कर रहे हैं?’ मैंने पूछा, ‘हम रिपोर्टिंग और चर्चा कर रहे हैं, आप क्या कर रहे हैं?’ वे कुछ कह न सके और अपनी पार्टी की शीर्ष नेतृत्व से सामग्री बनाने को कहा।

‘सरकार संसद के दरवाजे बंद करके शीशा तोड़ते हुए अध्यादेशों से काम कर रही है। बहुमत के दबाव में किसी की नहीं सुनी जा रही।’

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से मैंने कहा, ‘आप लोग न तो सरकार चला पाए और न ही विपक्ष का प्रभावी संचालन कर पाने का खतरा है।’ उन्होंने जो जवाब दिया, उसे मैं यहां उद्धृत करने में असमर्थ हूं।

नेकपा की बात करें तो वहां अध्यक्ष प्रचंड फिर से वाम एकता के प्रयास में हैं। राष्ट्रीय जीवन के गंभीर मसले सड़क और बस्तियों में अनदेखे पड़े हैं। वे मुद्दों से हटकर वाम एकता को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ऐसे दौर में हर्क साम्पाङ, चाहे अपने तरीके से हों, सरकार तक जनता की समस्याएं पहुंचा रहे हैं। नखिपोट में उन्होंने कहा, ‘सरकार संसद के दरवाजे बंद करके शीशा तोड़ते हुए अध्यादेश से काम कर रही है। बहुमत के दबाव में किसी की नहीं सुनी जा रही।’

हर्क द्वारा उठाए गए सवाल सभी सही नहीं हो सकते, लेकिन लोकप्रिय सरकार के लिए जनता की आवाज़ सुनने वाला संगठन जरूरी है। संसदीय समितियों में मंत्रियों की उपस्थिति और अहंकार देखकर कड़ी आलोचना आवश्यक है।

कई संसदीय समितियों में सरकार के प्रतिनिधि नहीं आते। यह सरकार अब तक की सभी प्रवृत्तियों से सवाल कर रही है। सवाल दबाने के बजाय उन्हें बार-बार उठाया जाना चाहिए।

इस संदर्भ में हर्क साम्पाङ के सवाल प्रासंगिक हैं। वे खुद धरान के महापौर रह चुके हैं, जहां कई बार सवालों की अनदेखी या मनमानी शासन भी हुई है।

अब प्रतिपक्ष को भी हर्क की तरह सक्रिय भूमिका निभानी होगी। सिर्फ फेसबुक पर छवि दिखाने तक सीमित नहीं रहना होगा। सुकुमवासी बस्तियों के बीच मंत्री व सांसदों के कपड़े, आभूषण और थैले जैसे वीडियो बनाना अभद्रता और अविवेकपूर्ण मज़ाक जैसा है। विवेकपूर्ण और तथ्यपरक सवाल किए जाएं तो सरकार को फायदा होगा।

क्या यह सही नहीं है, राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी के नेता? प्रतिपक्ष को एक बार इस बारे में सोचना चाहिए।

सिटी होटल ने संस्थापक समूह के शेयर बिक्री की अफवाह को असत्य बताकर कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया

सिटी होटल ने संस्थापक समूह के शेयर बिक्री के संबंध में फैलाई गई अफवाह को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताते हुए प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। कंपनी ने यह जानकारी दी है कि २०८३ जेठ ४ तक संस्थापक और कर्मचारी समूह के ९०.४० प्रतिशत शेयर लकइन में हैं, जिसकी पुष्टि सीडीएससी के आधिकारिक विवरण से हुई है। इसी कारण, सिटी होटल ने भ्रामक समाचार प्रकाशित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है।

२३ वैशाख, काठमाडौँ। सिटी होटल के ‘लकइन’ में रहने वाले संस्थापक समूह के शेयर बिक्री किए जाने से जुड़ी जो अफवाहें फैलाई गई हैं, वे पूरी तरह गलत, भ्रामक और तथ्यहीन हैं, जैसा कि कंपनी ने स्पष्ट किया है। बुधवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, “कंपनी ने शुरुआत से ही लकइन से संबंधित नियमों का पूर्ण पालन किया है। ऐसे निराधार और भ्रामक समाचारों पर विश्वास न करने तथा कंपनी की आधिकारिक सूचनाओं को ही विश्वसनीय स्रोत मानने का अनुरोध किया जाता है।”

कंपनी सचिव सुन्दरबहादुर सेनी द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि सीडीएस एंड क्लियरिंग लिमिटेड से पत्राचार कर संस्थापक समूह के शेयरों का अद्यतित विवरण मांगा गया है। कंपनी के अनुसार, संस्थापक और कर्मचारी समूह के कुल २ करोड़ ७२ लाख १९ हजार ३२८ शेयर २०८३ जेठ ४ तक लकइन में ही हैं।

सिटी होटल ने यह भी बताया है कि उसने नेपाल धितोपत्र बोर्ड की स्वीकृति से पुराने शेयरधारकों को हकप्रद शेयर जारी किए हैं। इस प्रक्रिया में कुछ शेयर बिक्री नहीं हुए और बाकी बचे। इसलिए कंपनी ने धितोपत्र निष्कासन तथा बाँडफाँट निर्देशिका, २०७४ के निर्देशन संख्या १५ के तहत बोर्ड को सूचित कर लिलाम के माध्यम से शेयर बिक्री की है। कंपनी ने भ्रामक समाचार प्रकाशित करने वाले सभी लोगों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया है।

पूर्व महान्यायाधीवक्ताओं ने संविधान संशोधन के उद्देश्य को स्पष्ट करने कार्यदल को दी सलाह

२३ वैशाख, काठमाडौं। पूर्व महान्यायाधीवक्ताओं ने सरकार द्वारा गठित कार्यदल को संविधान संशोधन के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से समझने का सुझाव दिया है। बुधवार को संविधान संशोधन के लिए बहसपत्र तैयार करने वाले इस कार्यदल के साथ हुई चर्चा में पूर्व महान्यायाधीवक्ता और कानूनी विशेषज्ञों ने ऐसे विचार रखे। सरकार ने प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाह (बालेन) के राजनीतिक सलाहकार असिम शाह की अध्यक्षता में संविधान संशोधन के लिए बहसपत्र तैयार करने हेतु कार्यदल गठित किया है।

यह कार्यदल बुधवार को प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद कार्यालय में पूर्व महान्यायाधीवक्ताओं और कानूनी विद्वानों से सुझाव प्राप्त करने हेतु एक चर्चा आयोजित की थी। इस चर्चा के दौरान शासकीय स्वरूप, चुनाव प्रणाली, संघीय संरचना, न्यायपालिका की पुनर्संरचना, संवैधानिक निकायों की संख्या और समावेशन से जुड़े विषयों पर विस्तार से वार्तालाप हुआ, जिसकी जानकारी प्रधानमन्त्री कार्यालय ने दी।

चर्चा में शामिल विशेषज्ञों ने संविधान संशोधन के उद्देश्य को स्पष्ट रखने तथा इसके कार्यान्वयन में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही प्रदेशों और मंत्रालयों की संख्या की पुनः समीक्षा करने, न्यायपालिका और संवैधानिक निकायों की संरचनाओं में सुधार की जरूरत के विषय में सुझाव भी प्राप्त हुए, जो इस कार्यदल के एक सदस्य ने साझा किए। कार्यदल के संयोजक असिम शाह ने कहा कि संविधान जारी किए जाने के एक दशक बाद इसका पुनरावलोकन करना आवश्यक है।

चर्चा में पूर्व महान्यायाधीवक्ता डा. युवराज संग्रौला, सविता भण्डारी, रमनकुमार श्रेष्ठ, महादेवप्रसाद यादव, मुक्तिनारायण प्रधान, अग्निप्रसाद खरेल, संविधान सभा सदस्य सुरेश आले मगर, प्रतिनिधि सभा सदस्य पर्शुराम तामांग और पूर्व कानून सचिव राजीव गौतम उपस्थित थे, जिसकी जानकारी प्रधानमन्त्री कार्यालय ने दी।

किन छैन नेपाल-भारत संवाद ? – Online Khabar

नेपाल-भारत के बीच संवाद क्यों नहीं हो रहा है?

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा गरिएको।

  • नेपाल ने २०७२ साल से लिपुलेक, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों की अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करते हुए आठ से अधिक बार भारत और चीन को कूटनीतिक नोट भेजा है।
  • भारत ने इन नोटों को नजरअंदाज किया, देर से जवाब दिया या outright अस्वीकार किया जबकि चीन ने सार्वजनिक रूप से मौनता अठाई रखी है।
  • हाल ही में भारत ने लिपुलेक मार्ग का 1954 से उपयोग होने का दावा करते हुए वार्ता के लिए द्वार खुले रखा है और नेपाल ने कूटनीतिक संवाद की संभावनाओं को जीवित रखने की बात कही है।

२२ वैशाख, काठमांडू। २०७२ साल में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन दौरे के दौरान लिपुलेक पथ से व्यापारिक मार्ग खोलने का समझौता हुआ था। नेपाल ने इसे अपनी भूमि पर बिना अनुमति किए गए समझौते के रूप में लिया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री सुशील कोइराला के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत और चीन दोनों को कूटनीतिक नोट भेजा, लेकिन भारत ने कोई लिखित जवाब नहीं दिया और चीन भी मौन रहा।

चार साल बाद, २०७६ साल में जब भारत ने अपने नए राजनीतिक नक्शे में कालापानी क्षेत्र को शामिल किया, तब नेपाल ने फिर से कूटनीतिक नोट भेजा। इस नोट का जवाब आने में तीन सप्ताह से अधिक समय लगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मौनता नेपाल के दावों को गंभीरता से न लेने और सीमा वार्ता में रुचि न दिखाने का संकेत थी। भारत ने नेपाल के दावों को ‘अनुचित’ तथा ‘ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत’ कहा और अस्वीकार कर दिया।

२०७७ साल में भारत ने लिपुलेक में 79 किलोमीटर सड़क उद्घाटन किया, जिसके बाद नेपाल ने कड़े विरोध के साथ ना केवल कूटनीतिक नोट जारी किया बल्कि नए राजनीतिक मानचित्र में लिम्पियाधुरा, लिपुलेक और कालापानी को शामिल किया।

नेपाल का यह कदम बेहद मजबूत था, लेकिन भारत ने इसे ‘कृत्रिम’ तथा ‘एकपक्षीय’ बताया और खारिज कर दिया। नेपाल द्वारा भेजे गए नोटों को भारत ने अक्सर नजरअंदाज किया, देर से जवाब दिया या outright अस्वीकार किया।

२०८२ साल सावन में चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के दौरान लिपुलेक मार्ग के माध्यम से सीमा व्यापार पुनः शुरू करने का समझौता हुआ था, जिसमें नेपाल को सलाह नहीं दी गई थी।

इसके बाद नेपाल ने भारत और चीन दोनों को अलग-अलग कूटनीतिक नोट भेजे। भारत ने सीमित शब्दों में जवाब दिया और इसे ‘दशकों से जारी व्यापार’ बताते हुए नेपाल की चिंता को सामान्यीकृत किया। चीन ने इस बार भी मौनता बरती।

२०८३ वैशाख २० के नोट को भी कूटनीतिक पत्रों की श्रृंखला में शामिल किया गया है। जून-अगस्त २०२६ में भारत द्वारा लिपुलेक मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने की घोषणा के बाद बालेन शाह सरकार ने 6 बिंदुओं वाली कूटनीतिक नोट भारत और चीन को भेजी।

इस बार सरकार ने विपक्षी दलों से परामर्श कर नोट भेजा था, जिससे राष्ट्रीय सहमति का संदेश मिला। भारत ने अपेक्षाकृत जल्दी ‘कीर्तिमानी’ जवाब दिया।

भारतीय विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने लिपुलेक मार्ग का 1954 से उपयोग होने का दावा करते हुए नेपाल के क्षेत्रीय दावे को ‘नजायज’ तथा ‘ऐतिहासिक प्रमाणों पर आधारित नहीं’ कहा, लेकिन द्विपक्षीय वार्ता के द्वार खुले रहने की बात कही। चीन ने इस बार भी सार्वजनिक मौनता अपनाई।

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ये घटनाक्रम दिखाते हैं कि नेपाल ने हर बार अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के पक्ष में कूटनीतिक पहल की, लेकिन ज्यादातर नोटों को नजरअंदाज किया गया, विलंबित जवाब आए या outright अस्वीकार किया गया। भारत ने पुरानी तर्क दोहराई और चीन ने मौनता को रणनीतिक हथियार बनाकर रखा।

सुशील कोइराला के प्रधानमंत्री काल में परराष्ट्र मामलों के विशेषज्ञ दिनेश भट्टराई बताते हैं कि भारत ने नेपाल के कूटनीतिक नोटों पर मूकता बरती थी, जबकि वर्तमान सरकार का कदम सकारात्मक है। वे कहते हैं, ‘उस वक्त भेजे गए पत्र का जवाब नहीं आया था, अब फिर भेजकर अपनी स्थिति बनाए रखने का संदेश मिला जो सकारात्मक है।’

पूर्व राजदूत दीपकुमार उपाध्याय का कहना है कि पड़ोसी देशों ने संवाद हेतु नेपाल के बार-बार आग्रह को महत्व नहीं दिया। ‘नई सरकार का प्रयास अच्छा है, शांतिपूर्ण कूटनीति से समाधान से पहल होनी चाहिए, यह प्राथमिक एजेंडा होना चाहिए।’

दीपकुमार उपाध्याय, पूर्व राजदूत।

हालिया नोट पर भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और वार्ता के द्वार खोले जो कुछ सकारात्मक संकेत हैं। यह दर्शाता है कि भारत विवाद के कारण ठंडे हुए रिश्ते सुधारना चाहता है और कूटनीतिक संवाद जीवित रखना चाहता है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने लिपुलेक और नाथु ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा पुनः शुरू करने की घोषणा के बाद नेपाल की भौगोलिक अखंडता के संबंध में कड़ा रुख अपनाया है।

30 अप्रैल को जारी विज्ञप्ति में भारत ने इस वर्ष 20 समूह तीर्थयात्रा के लिए भेजने की बात कही, जिसके बाद नेपाल के परराष्ट्र मंत्रालय ने रविवार को आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर भारत और चीन को अपनी गंभीर चिंता से अवगत कराया।

पूर्व चुनावी सरकार चुप्पी के बीच, वर्तमान सरकार ने कूटनीतिक माध्यम से अपनी स्थिति मजबूती से रखी है। गत चैत में भारत द्वारा लिपुलेक से चीन के व्यापार पुनः शुरू करने की तैयारी के समाचार पर तत्कालीन प्रशासन ने प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिश्री द्वारा उत्तराखंड मुख्य सचिव को व्यापार तैयारी के लिए पत्र लिखे जाने के तथ्य के सामने आने के बाद नेपाल ने तीर्थाटन और व्यापार दोनों मुद्दों पर अपनी पुरानी स्थिति याद दिलायी।

नेपाल और ब्रिटिश भारत के बीच 1816 में हुए सुगौली संधि के आधार पर महाकाली नदी के पूर्व के लिम्पियाधुरा, लिपुलेक और कालापानी क्षेत्र नेपाल का अभिन्न हिस्सा हैं। नेपाल ने आधिकारिक मानचित्र जारी किया है, हालांकि पड़ोसी देशों के असामंजस्यपूर्ण उपयोग से विवाद जटिल होता जा रहा है।

नेपाल प्रति वर्ष आठ से अधिक बार कूटनीतिक नोट भेजता है, जो निरंतर कूटनीतिक प्रयासों को प्रमाणित करते हैं। ये नोट तत्काल कोई बदलाव नहीं लाते, पर नेपाल की स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय में दर्ज होती है।

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कूटनीतिक नोटों का तत्काल प्रभाव न हो, पर इसका प्रतीकात्मक महत्व है। हर नोट राष्ट्रीय एकता का संदेश देता है और भविष्य की वार्ता का आधार बनता है। कार्यान्वयन पक्ष कमजोर होने से आशंका भी होती है।

पड़ोसी देशों की मौनता के बावजूद कूटनीतिक नोट अपनी स्थिति बनाए रखने का एक माध्यम बने हैं। पूर्व राजदूत व कूटनीतिज्ञ नीलाम्बर आचार्य के अनुसार कूटनीतिक नोट संवाद की शुरुआत का माध्यम है।

‘नोट भेजने के बाद वार्ता होनी चाहिए लेकिन अब तक ठोस वार्ता नहीं हुई,’ वे कहते हैं। वे सुझाते हैं कि राष्ट्रीय हित के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखें और द्विपक्षीय वार्ता से समाधान खोजा जाए।

पूर्व परराष्ट्र मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने कहा कि नेपाल द्वारा भेजे गए कूटनीतिक नोटों को संबंध खराब करने वाली नहीं बल्कि विदेशी नीति की निरंतरता और स्थिरता के रूप में समझना चाहिए।

‘संबंध सुधार के नाम पर राष्ट्रीय हित न छोड़ा जा सकता है। नोट न भेजना हमें गलत समझा सकता है। इसलिए इसे लगातार नीति के तौर पर लेना चाहिए।’

सीमा विशेषज्ञ बुद्धिनारायण श्रेष्ठ ने बालेन सरकार के कूटनीतिक नोट को सकारात्मक माना और कहा, ‘वर्तमान सरकार गृहकार्य के साथ तत्परता दिखा रही है।’

बुद्धिनारायण श्रेष्ठ, सीमा विशेषज्ञ।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि लिपुलेक मार्ग सन् १९५४ से भारत द्वारा प्रयोग में है और यह मानव-सवारी के लिए भी उपयोग होता है।

श्रेष्ठ ने कहा कि सीमाओं से जुड़े बाकी मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयास महत्वपूर्ण हैं, और भारत भी तैयार है, इसलिए बालेन सरकार के प्रति आशावादी हैं।

‘यह कूटनीतिक नोट पहले से केवल औपचारिकता नहीं लगते।’

उन्होंने कहा, ‘मजबूत सरकार होने के कारण गृहकार्य कर के आगे बढ़ रही है। कूटनीतिक नोट का प्रभाव सार्वजनिक प्रदर्शन के साथ-साथ ‘साइलेंट चेनल’ से भी हो सकता है, जो अंतरराष्ट्रीय दबाव पैदा करने में सहायक होता है।’

कूटनीतिज्ञ जयराज आचार्य ने कहा कि भारत के नोट के जवाब को कूटनीतिक संवाद की एक संभावनात्मक अवसर के रूप में देखना चाहिए। ‘चुच्चे नक्शे के बाद भारत ने पहले संवाद के लिए तैयार नहीं था, लेकिन इस बार सकारात्मक जवाब दिया है।’

उन्होंने कहा, ‘इसे सकारात्मक रूप से लेते हुए संवाद के जरिए समाधान के रास्ते खोलने चाहिए। भारत ने फिर भी अपनी स्थिति रखी है, लेकिन वार्ता की संभावना बनी हुई है, जो सीमा विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।’

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नेपाल-भारत के बीच सभी मुद्दों पर चर्चा का सबसे उच्च स्तरीय मंच ‘नेपाल-भारत संयुक्त आयोग’ है, जिसकी स्थापना १९८७ में हुई थी और दोनों देशों के विदेश मंत्री इसके सह-अध्यक्ष होते हैं।

सीमा विवादों के लिए ‘बाउंड्री वर्किंग ग्रुप’ और कालापानी-सुस्ता जैसे विवादों के लिए ‘विदेश सचिव स्तरीय संयंत्र’ सक्रिय है, लेकिन संयुक्त आयोग सभी को नीतिगत दिशा प्रदान करता है और विवादित मामलों में राजनीतिक सहमति खोजने का प्रमुख मंच है।

पूर्व विदेश मंत्री ज्ञवाली का कहना है कि भारत ने नेपाल को कुछ हद तक नजरअंदाज किया है, इसलिए केवल पत्राचार के बजाय संयुक्त आयोग की बैठक बुलाकर सीमा विवाद पर चर्चा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि चीन के साथ संबंधों को भी समान रूप से महत्व देना चाहिए और चीन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

प्रिमियर इंटरनेशनल आईबी कंटिनम स्कूल में विद्यार्थियों की उद्यमशीलता प्रदर्शनी

प्रिमियर इंटरनेशनल आईबी कंटिनम स्कूल में विद्यार्थियों ने व्यावसायिक अवधारणा और योजनाओं को प्रस्तुत करते हुए उद्यमशीलता प्रदर्शनी का आयोजन किया है। निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों को स्थायी और विस्तार योग्य व्यवसाय निर्माण के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रदान किए। ढाका कपड़े आधारित व्यवसाय को श्रेष्ठ व्यावसायिक प्रस्ताव के रूप में प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया। 23 वैशाख, काठमांडू।

उद्यमशीलता प्रदर्शनी ने युवा नवप्रवर्तनशील, उद्योग क्षेत्र के विद्वान और अभिभावकों को एक साथ लाते हुए विद्यार्थियों द्वारा संचालित व्यावसायिक अवधारणाओं की प्रेरणादायक प्रस्तुति प्रदान की। स्कूल के वार्षिक कार्यक्रम के तहत आयोजित इस प्रदर्शनी में कक्षा 11 के एनईबी प्रबंधन के विद्यार्थी और आईबीडीपी प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने स्थानीय नेपाली संसाधनों पर आधारित पूर्ण व्यावसायिक अवधारणाओं को प्रस्तुत किया।

प्रत्येक समूह ने अपना व्यवसायिक योजना सम्मानित निर्णायक मंडल के सदस्यों को पेश करते हुए सुझाव और संभावित निवेश की अपेक्षा जताई। इस प्रक्रिया ने वास्तविक स्टार्टअप इकोसिस्टम का अनुभव प्रदान करते हुए कक्षा के बाहर व्यवहारिक सीख को बढ़ावा दिया। निर्णायक मंडल में ब्राइट लिनहार्ट (संस्थापक, कर्मा कॉफी), विनी बज्राचार्य (संस्थापक, अबिर), और जीतेंद्र रंजीत (संस्थापक, अभानी एडवरटाइजिंग) ने भाग लिया।

कार्यक्रम में कुल छह नवप्रवर्तनशील व्यवसायिक अवधारणाएं प्रस्तुत की गईं। इनमें प्राकृतिक सामग्री से बना मच्छर भगाने वाला मिस्ट, फुरंदाना आधारित स्वास्थ्यवर्धक स्नैक्स, वेगन डेयरी विकल्पों की उत्पादन श्रृंखला, पारंपरिक ढाका कपड़ों पर आधारित व्यवसाय, नेपाल के सातों प्रदेशों के अचारों को समेटने वाला व्यवसाय तथा टिकाऊ लकड़ी आधारित उत्पाद शामिल थे। इन सभी में से ढाका कपड़े आधारित व्यवसाय को सर्वश्रेष्ठ व्यावसायिक प्रस्ताव के रूप में प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

सांसदों के लिए इलेक्ट्रॉनिक हाजिरी प्रक्रिया शुरू

२३ वैशाख, काठमाडौं । अब सांसदों को इलेक्ट्रॉनिक हाजिरी प्रणाली के माध्यम से हाजिरी दर्ज करानी होगी। कल से सांसदों के बॉयोमेट्रिक विवरण संग्रह की प्रक्रिया शुरू हो रही है। संघीय संसद सचिवालय ने बुधवार को सूचना जारी कर सभी सांसदों से इलेक्ट्रॉनिक हाजिरी के लिए अपने बॉयोमेट्रिक विवरण उपलब्ध कराने का आह्वान किया है। विभिन्न संसदीय समितियों ने बॉयोमेट्रिक विवरण संग्रह हेतु समय और स्थान अलग-अलग निर्धारित किए हैं। विवरण संग्रह के दौरान आधिकारिक तस्वीर भी ली जाएगी, इसलिए सांसदों को आधिकारिक पोशाक पहनकर संघीय संसद के लोगो के साथ उपस्थित होने कहा गया है।

अंतरराष्ट्रीय संबंध व पर्यटन समिति के सदस्य तथा विकास, आर्थिक मामले और सुशासन समिति के सदस्य कल सुबह १० बजे से १२ बजे तक सार्वजनिक लेखा समिति के हॉल में उपस्थिति दर्ज कराएं। अर्थ समिति के सदस्य और विधायन प्रबंधन समिति के सदस्य भी कल ही अर्थ समिति के हॉल में उपस्थित रहना आवश्यक है। उद्योग तथा वाणिज्य और श्रम एवं उपभोक्ता हित समिति के सदस्य कल दोपहर २ बजे से ४ बजे तक सार्वजनिक लेखा समिति के हॉल में जाएंगे। कानून, न्याय एवं मानवाधिकार समिति के सदस्य भी कल दोपहर २ बजे से ४ बजे तक अर्थ समिति के हॉल में उपस्थिति दें।

कृषि, सहकारी तथा प्राकृतिक स्रोत समिति के सदस्य और संघीयता सबलीकरण तथा राष्ट्रीय सरोकार समिति के सदस्य परसों शुक्रवार सुबह १० बजे से १२ बजे तक सार्वजनिक लेखा समिति के हॉल में पहुंचेंगे। पूर्वाधार विकास समिति के सदस्य और सार्वजनिक नीति तथा प्रत्यायोजित विधायन समिति के सदस्य भी सुबह १० बजे से १२ बजे तक अर्थ समिति के हॉल में उपस्थित होंगे। महिला एवं सामाजिक मामले समिति के सदस्य परसों दोपहर २ बजे से ४ बजे तक सार्वजनिक लेखा समिति के हॉल में उपस्थित होंगे। राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समिति के सदस्य परसों दोपहर २ बजे से ४ बजे तक अर्थ समिति के हॉल में पहुंचेंगे। सार्वजनिक लेखा समिति के सदस्यों का बॉयोमेट्रिक विवरण २८ वैशाख को सुबह १० बजे से १२ बजे तक लेखा समिति के हॉल में एकत्र किया जाएगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और सूचना प्रौद्योगिकी समिति के सदस्यों का बॉयोमेट्रिक विवरण भी २८ वैशाख को सुबह १० बजे से १२ बजे तक अर्थ समिति के हॉल में संग्रहित होगा।

देउवा दम्पतीविरुद्ध ‘रेड नोटिस’ प्रक्रियामा इन्टरपोलले माग्यो थप कागजात

देउवा दंपती के खिलाफ ‘रेड नोटिस’ प्रक्रिया में इंटरपोल ने मांगे अतिरिक्त दस्तावेज़

समाचार सारांश

  • इंटरपोल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और उनकी पत्नी आरजु राणा देउवा के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज़ मांगे हैं।
  • पिछले चैत २४ को काठमांडू जिला अदालत ने देउवा दंपती के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
  • देउवा दंपती १४ फागुन को इलाज के लिए विदेश गए थे और अब तक नेपाल नहीं लौटे हैं।

२३ वैशाख, काठमांडू। पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा और उनकी पत्नी पूर्व विदेश मंत्री डॉ. आरजु राणा देउवा के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने के लिए इंटरपोल ने अतिरिक्त दस्तावेज़ों की मांग की है।

पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक, इंटरपोल ने आवश्यक अतिरिक्त दस्तावेज़ों के विवरण नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (एनसीबी), काठमांडू से मांगे हैं।

“रेड नोटिस की प्रक्रिया जारी है। इंटरपोल ने आवश्यक अतिरिक्त दस्तावेज़ों की मांग की है,” एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया।

पिछले चैत २४ को काठमांडू जिला अदालत ने संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग की सूचना के आधार पर देउवा दंपती के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। गिरफ्तारी वारंट जारी होते ही उन्हें नेपाल लाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

रेड नोटिस के लिए एनसीबी काठमांडू ने आधिकारिक तौर पर इंटरपोल को पत्राचार किया था, लेकिन इंटरपोल ने दस्तावेजों के अभाव का हवाला देते हुए रेड नोटिस जारी नहीं किया है।

जब गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ, तब देउवा दंपती विदेश में थे। चुनाव के पूर्व संध्या १४ फागुन को वे इलाज के लिए सिंगापुर गए थे और फिर ७ चैत को हांगकांग पहुंचने की जानकारी मिली है।

पहले भी जनजातीय आंदोलन के बाद इलाज के लिए सिंगापुर गए देउवा दंपती उपचार के बाद लौटे थे।

लेकिन इस बार १४ फागुन को देश छोड़ने के बाद वे अभी तक नेपाल वापस नहीं आए हैं। सूत्रों के अनुसार वे अभी भी हांगकांग में ही हैं।

यदि रेड नोटिस जारी हो जाता है, तो इंटरपोल के १९६ सदस्य देशों में देउवा दंपती की गिरफ्तारी की जा सकती है और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें नेपाल लाया जा सकता है।

गिरफ्तारी वारंट के बाद देउवा ने एक बयान जारी कर खुद को खुली किताब बताया था। उन्होंने संपत्ति संबंधित मामलों को गुमराह करने वाला और झूठा करार दिया था एवं अपनी संपत्ति के विवरण सरकारी एजेंसियों के समक्ष सार्वजनिक पद धारण करते हुए प्रस्तुत करने का उल्लेख किया था।

इलाज के लिए विदेश जाने की बात उन्होंने कही, लेकिन अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में कोई विवरण नहीं दिया।

शेरबहादुर देउवा के रिश्तेदार प्रदीप शमशेर जबरा, भूषण राणा, जयवीर देउवा समेत के कारोबार के बारे में भी जांच चल रही है।

पहले भी देउवा की पत्नी आरजु राणा पर नकली भूटानी शरणार्थी मामले में आरोप लगे थे।

शेरबहादुर देउवा ने बुढानीलकण्ठ में अपने परिसर में दो मकान बनाए थे, जहां वे जनजातीय आंदोलन के समय थे। उस दौरान देउवा दंपती पर हमला हुआ और मकान में आगजनी की भी घटना हुई।

पिछले २३ और २४ भदौ को जनजातीय आंदोलन के दौरान देउवा निवास में जलाए गए नोट्स पाए गए थे और एक वीडियो भी सार्वजनिक हुआ था।

संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग ने इस विषय पर मुचलका लेकर जांच शुरू कर दी है।

सिंहदरबार में म्याद समाप्त दही बिक्री, ‘हमरै खाजा घर’ को 2 लाख 5 हजार रुपये जुर्माना

वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सिंहदरबार के अंदर म्याद समाप्त दही बेचने वाले ‘हमरै खाजा घर’ को 2 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अनुगमन टीम ने राष्ट्रीय विपद् जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन प्राधिकरण के चमेनागृह में म्याद समाप्त दही बिक्री हो रही होने का खुलासा किया है।

23 वैशाख, काठमाडौँ। देश के प्रमुख प्रशासनिक केंद्र सिंहदरबार के भीतर म्याद समाप्त दही बिक्री हो रही है, जो सामने आया है। वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने बुधवार को किए गए आकस्मिक बाजार अनुगमन के दौरान उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हुए म्याद समाप्त दही बेचने वाले ‘हमरै खाजा घर’ नामक चमेनागृह को तत्काल 2 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

अनुगमन के दौरान चमेनागृह में बिक्री के लिए रखे गए दही की उपभोक्ता म्याद समाप्त पाई गई, जिसके कारण विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू की है। उपभोक्ता संरक्षण ऐन २०७५ की धारा ३८ (ङ) के अनुसार दोष साबित होने पर विभाग ने इसी ऐन की धारा ३९ (१) (ख) के तहत जुर्माना लगाने का निर्णय किया है। विभाग ने खुदरा विक्रेता के अलावा म्याद समाप्त दही उत्पादन करने वाले श्रीकृष्ण डेरी फर्म को भी जांच के दायरे में लाया है।

काठमाडौं विश्वविद्यालयको निमित्त उपकुलपतिमा ऋषिकेश वाग्ले नियुक्त

प्रधानमन्त्री तथा विश्वविद्यालय के कुलपति बालेन शाह ने काठमाडौं विश्वविद्यालय के निमित्त उपकुलपति के रूप में प्राडा ऋषिकेश वाग्ले को जिम्मेदारी सौंपी है। डीनों के अध्यादेश से मुक्त होने के बाद परीक्षा नियंत्रक वाग्ले को उपकुलपति का कार्यभार दिया गया है। 23 वैशाख, काठमाडौं।

अध्यादेश जारी होने के पश्चात उपकुलपति डॉ. अच्युत वाग्ले पदमुक्त हुए, जिसके कारण ऋषिकेश वाग्ले को यह पद सौंपा गया है। प्रधानमन्त्री और कुलपति बालेन शाह ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है। डीनों के भी पदमुक्त होने पर परीक्षा नियंत्रक रहे वाग्ले ने निमित्त उपकुलपति की जिम्मेदारी संभाली है। वाग्ले ने कहा कि उन्हें यह जिम्मेदारी प्राप्त होने की सूचना मिली है। ‘ज़िम्मेदारी मिली है,’ उन्होंने बताया।

उपकुलपति पद पर स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया लंबित होने के कारण कुछ समय के लिए ऋषिकेश वाग्ले को निमित्त जिम्मेदारी दी गई है। इसी दिन विभिन्न विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों के नाम सुझाने हेतु शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया है।

पन्जाबलाई हराउँदै हैदराबाद शीर्षस्थानमा – Online Khabar

पंजाब को हराकर हैदराबाद ने टेबल में शीर्ष स्थान हासिल किया

सनराइजर्स हैदराबाद ने आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स को 33 रन से हराकर शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया है। हैदराबाद द्वारा निर्धारित 236 रन के लक्ष्य को पीछा करते हुए पंजाब ने 20 ओवर में 7 विकेट खोकर केवल 202 रन ही बना पाए। हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस और शिवांग कुमार ने 2-2 विकेट लिए, और हैदराबाद 11 मैचों में 14 अंक लेकर शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। 23 वैशाख, काठमांडू।

बुधवार के मैच में लगातार तीसरी हार झेलने के कारण पंजाब दूसरा स्थान पर आ गया है। कूपर कोनॉली ने नाबाद शतक बनाया, लेकिन बाकी बल्लेबाज उनकी मदद नहीं कर सके। कोनॉली ने 59 गेंदों में 7 चौके और 8 छक्के लगाकर 107 रन बनाए। मार्कस स्टोइनिस ने 28 रन और सूर्यांश शेड्गे ने 25 रन जोड़े।

पहले बल्लेबाजी करते हुए हैदराबाद ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 235 रन बनाए। हेनरिक क्लासेन और ईशान किशन ने अर्धशतक पूरा किया। क्लासेन ने 43 गेंदों में 3 चौके और 4 छक्के लगाकर 69 रन बनाए जबकि किशन ने 32 गेंदों में 2 चौके और 4 छक्के लगाकर 55 रन जोड़े। ट्रैविस हेड ने 38 और अभिषेक शर्मा ने 35 रन बनाए। पंजाब के लिए अर्शदीप सिंह, लकी फर्गुसन, युवजेंद्र चहल और विजयकुमार वैशाक ने 1-1 विकेट लिए। इस जीत के साथ हैदराबाद ने 11 मैचों में 14 अंक हासिल करते हुए तालिका में शीर्ष स्थान पाया है जबकि 10 मैचों में 13 अंक के साथ पंजाब दूसरे स्थान पर है।

रासायनिक मल कारखाना खोल्ने कि प्रांगारिकमा जोड दिने ? – Online Khabar

रासायनिक खाद कारखाना खोलने या जैविक खाद को प्राथमिकता देने पर चर्चा

२३ वैशाख, काठमाडौं। संसद में लगातार उठ रहा एक अहम मुद्दा है – किसानों को समय पर और आसानी से खाद प्राप्त नहीं हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए देश में खाद कारखाना खोलने का विषय राजनीतिक एजेंडा पर पिछले चार दशक से बना हुआ है। लेकिन अब तक कोई खाद कारखाना नहीं खुल सका है और किसानों को आसानी से खाद भी नहीं मिल पा रहा है। २१ फागुन को हुए चुनाव के बाद गठित प्रतिनिधि सभा के कृषि, सहकारी तथा प्राकृतिक स्रोत समिति के अध्यक्ष के चुनाव के बाद हुई पहली बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया। सिंहदरबार स्थित समिति कक्ष में बुधवार को हुई बैठक में सांसदों ने रासायनिक खाद कारखाना खोलने या जैविक खाद को प्राथमिकता देने पर चर्चा की।

एमाले सांसद लक्ष्मीप्रसाद पोखरेल के अनुसार २०१५ साल से ही संसद में खाद की कमी का विषय उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हाल के समय में बजट में भी यह विषय आया है। राजनीतिक प्रतिबद्धता भी है, अब इसे निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा। सरकार को नेपाल में ही खाद कारखाना खोलने का निर्णय लेना चाहिए।’ उनके पूर्व वक्ता, राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सांसद राजीव खत्री ने कहा कि रासायनिक खाद की खरीद के साथ-साथ जैविक खाद के उत्पादन पर भी जोर देना चाहिए। उनके अनुसार यदि जैविक खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता तो किसानों को रासायनिक खाद के लिए रात-दिन जागरूक होने और पुलिस लाठी खाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

रास्वपाकी सांसद समिना मियाँ ने रासायनिक खाद के इस्तेमाल से उत्पादित कृषि उपज के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को बताते हुए सरकार से नागरिकों के स्वास्थ्य को नुकसान न पहुँचाने वाली कृषि उत्पादन नीति लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘सभी प्रकार की क्रांति हो गई, लेकिन कृषि क्रांति नहीं हुई।’ उन्होंने आगे कहा, ‘जैविक खाद को प्राथमिकता देने से प्राकृतिसम्पन्न खाद मृदा की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है।’ रास्वपाकी सांसद पुनमकुमारी अग्रवाल ने उत्पादन वृद्धि के अलावा मृदा संरक्षण पर भी सरकार का ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

रास्वपाकी अन्य सांसद आशिका तामांग ने तत्काल रासायनिक खाद के वितरण को सुगम बनाने तथा दीर्घकालीन रूप से जैविक खाद को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने कहा, ‘यह आश्चर्य की बात है कि देश में खाद कारखाना तक नहीं है। जब रासायनिक खाद न हो, तो हर पालिका में जैविक खाद के लिए कोल्ड स्टोरेज होना आवश्यक है।’ उन्होंने खाद वितरण में भेदभाव की भी सरकार को सूचित किया। उन्होंने कहा, ‘वास्तविक किसानों के पास एक बोरा खाद तक नहीं है, जबकि पहुंच रखने वाले व्यक्तियों के पास पाँच बोरा तक है।’

रासायनिक खाद कारखाना खोलने या विकल्प खोजने की बहस के दौरान रास्वपाकी सांसद सुजाता तामांग ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में इस विषय पर स्पष्ट नीति आने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, ‘खाद के विषय में आगामी बजट में क्या किया जा सकता है, इस पर चर्चा करनी चाहिए।’

सालों से जारी बहस में, एमाले सांसद लक्ष्मीप्रसाद पोखरेल ने कहा कि नेपाल में ही रासायनिक खाद कारखाना खोलने का सपना वर्षों से है लेकिन पूर्णता प्राप्त नहीं कर पाया है। कृषि तथा पशुपालन विकास मंत्रालय के अनुसार नेपाल में विं.सं. २००७ से रासायनिक खाद का उपयोग शुरू हुआ।

उससे पहले नेपाल पूरी तरह जैविक कृषि आधारित था। शुरुआत में भारत से अमोनियम सल्फेट लाया जाता था, और बाद में नेशनल ट्रेडिंग लिमिटेड के माध्यम से रूस से रासायनिक खाद का आयात आरंभ हुआ। उस समय रासायनिक खाद की खपत बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम और प्रचार-प्रसार किए गए। खाद के आयात को सुगम बनाने के लिए २०२२ साल में कृषि मंत्रालय के अंतर्गत कृषि सामग्री कंपनी लिमिटेड की स्थापना हुई, जो आज तक सक्रिय है। २०३० साल से नेपाल सरकार रासायनिक खाद पर किसानों को अनुदान दे रही है। वर्तमान में नेपाल में मुख्यत: यूरिया, डीएपी, पोटाश, अमोनियम सल्फेट, सिंगल सुपर फॉस्फेट और अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट का आयात हो रहा है।

खाद खपत में वृद्धि के कारण, नेपाल में ही खाद कारखाना खोलने का विषय २०४० साल में सम्भाव्यता अध्ययन के तहत रखा गया था। यह अध्ययन जापान सहयोग नियोग (जाइका) द्वारा किया गया था लेकिन वह केवल अध्ययन तक सीमित रहा। आर्थिक वर्ष २०७३/०७४ में सरकार की नीति एवं कार्यक्रम में यह विषय शामिल किया गया था। तत्कालीन अर्थमंत्री विष्णु पौडेल ने नेपाल में रासायनिक खाद कारखाना खोलने की नीति बनाई थी। इसके बाद और अध्ययन हुए। तत्कालीन कृषि मंत्रालय ने निवेश बोर्ड को कारखाना संबंधी अध्ययन की जिम्मेवारी दी। भारत के डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ कर्नाटक के द्वारा की गई सम्भाव्यता अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया कि नेपाल में प्राकृतिक गैस के अलावा अन्य ऊर्जा स्रोतों से तत्काल खाद कारखाना चलाना असम्भव है।

२०८० जेठ में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ के भारत दौरे के दौरान उच्चस्तरीय बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई। १८ जेठ २०८० को आयोजित संयुक्त पत्रकार सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, ‘नेपाल में रासायनिक खाद कारखाना खोलने में आवश्यक सहयोग के लिए भारत तैयार है।’ हालांकि, नेपाल में खाद कारखाना खोलने का मुद्दा ठोस रूप से आगे नहीं बढ़ पाया। उस समय राजनीतिक दल इस मुद्दे को लगातार उठा रहे थे।

गत २१ फागुन के चुनाव से पहले रास्वपाले १०० बिंदु वाली प्रतिज्ञापत्र जारी की थी, जिसमें बिंदु संख्या ४३ में खाद कारखाना खोलने का उल्लेख है। इसमें कहा गया है, ‘रासायनिक खाद और कृषि यांत्रिकीकरण में प्राथमिकता के साथ निवेश बढ़ाकर कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि और उत्पादन लागत में कमी करेंगे। कृषि उत्पादन वृद्धि की व्यवस्था नेपाल सरकार करेगी।’ रास्वपा ऊर्जा आधारित बड़े उद्योगों जैसे स्टील, सीमेंट, जड़ी-बूटी प्रसंस्करण, डेटा सर्वर स्टेशन और रासायनिक खाद उद्योग को आकर्षित करने का वादा करती रही है।

इन चुनावी वादों के साथ रास्वपा २१ फागुन के चुनाव में भारी बहुमत लेकर विजयी हुई। रास्वपा के नेतृत्व में शक्तिशाली एकल सरकार बनने के बाद भी संसद की समिति में खाद कारखाने के मुद्दे को पुनः उठाया गया है। इसके बावजूद, सरकार ने इस विषय पर अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया है।

वित्तीय प्रणाली में अधिक तरलता के कारण धन का मूल्य घटने लगा, जमा राशि बढ़ रही है

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद तैयार।

  • वित्तीय प्रणाली में अधिक तरलता के कारण बैंक और वित्तीय संस्थानों में जमा राशि के धन का मूल्य कम हो रहा है।
  • नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार, फागुन महीने की मुद्रास्फीति 3.62 प्रतिशत और बचत पर अधिकतम ब्याज दर 2.75 प्रतिशत है।
  • बैंक एवं वित्तीय संस्थानों की कुल जमा राशि 79 खरब 45 अरब और कर्ज निवेश 58 खरब 78 अरब तक पहुंच गई है।

23 वैशाख, काठमांडू। बैंक और वित्तीय संस्थानों में जमा की गई राशियों के धन का मूल्य घट रहा है। वित्तीय प्रणाली में बढ़ी अधिक तरलता के कारण ब्याज दरों में कमी आई है, जो पैसे के मूल्य में गिरावट का कारण बनी है।

आमतौर पर पैसे के मूल्य को बनाए रखने के लिए बाजार में मुद्रास्फीति के अनुसार ब्याज दर आवश्यक होती है। नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार, फागुन महीने की मुद्रास्फीति 3.62 प्रतिशत है जबकि बचत पर अधिकतम ब्याज दर 2.75 प्रतिशत है।

यह केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर करिडोर की निचली सीमा निर्धारित करने का भी परिणाम है। यदि केंद्रीय बैंक नियंत्रण न करे तो अधिकतर तरलता के कारण ब्याज दर और भी कम स्तर पर जा सकती है।

नेपाल के अर्थशास्त्री डॉ. रमेश पौडेल के अनुसार, बैंक एवं वित्तीय संस्थान जो जमा पर ब्याज देते हैं उसकी तुलना में मुद्रास्फीति अधिक होने के कारण पैसे का मूल्य कम हुआ है।

“मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव पैसे के मूल्य में प्रभाव डालते हैं,” पौडेल ने कहा, “अर्थव्यवस्था के सिद्धांत के अनुसार बचत पर ब्याज दर कम से कम मुद्रास्फीति के बराबर होनी चाहिए, यदि कम हो तो पैसे का मूल्य कम हो जाता है।”

वित्तीय प्रणाली में पैसे की आपूर्ति बढ़ी है, पर मांग स्थिर रहने के कारण अधिक तरलता पैदा हुई है, पौडेल ने बताया।

अब तक वित्तीय प्रणाली में लगभग 11 खरब रुपए जमा हो चुके हैं। इसे सुधार कर पैसे के मूल्य में वृद्धि करने के लिए निवेश का विस्तार जरूरी है, उनकी सलाह है। साथ ही सरकार को वित्तीय क्षेत्र में मौजूद अधिक तरलता को प्रभावी तरीके से उपयोग करने के उपाय विकसित करने चाहिए।

पूर्व केंद्रीय बैंक के कार्यकारी निदेशक नरबहादुर थापाले ने कहा है कि वित्तीय प्रणाली में जमा में वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन निवेश में कमी नकारात्मक पहलू है।

उन्होंने वित्तीय संसाधनों को पूंजी निर्माण और व्यवसाय विस्तार में निवेश करने पर बल दिया।

“यदि वित्तीय क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग नहीं होता तो यह स्थिति चिंताजनक है,” थापाले ने कहा, “सरकार को नीतिगत उपायों के तहत वित्तीय क्षेत्र की अधिक तरलता परिचालित कर इसे विकास और रोजगार सृजन में लगाना होगा।”

थापाले ने कहा कि सरकार को शासकीय सुधार के समान आर्थिक सुधारों के लिए भी प्रभावी कदम उठाने होंगे।

“सरकार को शासकीय सुधारों के साथ ही अर्थव्यवस्था के लिए ठोस कार्ययोजना बनानी होगी तभी आर्थिक प्रणाली बेहतर होगी। ऐसी स्थिति में वित्तीय संसाधन परिचालित होकर रोजगार का सृजन करेंगे,” उन्होंने कहा।

उनके अनुसार वित्तीय क्षेत्र के संसाधनों को व्यवसाय विस्तार और पूंजी निर्माण में ही निवेशित करना चाहिए।

अधिक तरलता के कारण बचतकर्ताओं को उचित लाभ न मिलना चिंताजनक बात है, थापाले ने कहा। “आज की मुद्रास्फीति दर के मुकाबले पैसे के मूल्य में गिरावट हो रही है और बचत पर मिलने वाला ब्याज भी मुद्रास्फीति को पूरा नहीं कर पा रहा है,” उन्होंने कहा। “अगर अर्थव्यवस्था में गंभीर सुधार और दिशा-निर्देश नहीं आए तो वर्तमान स्थिति में वृद्धि तो होगी लेकिन वास्तविक परिवर्तन नहीं आएगा।”

थापाले ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट से अर्थव्यवस्था में सकारात्मक सुधार की उम्मीद जताई। “यदि बजट में सुधार न किया गया तो आर्थिक स्थिति जटिल हो सकती है,” उन्होंने कहा, “सरकार को न केवल शासकीय सुधार बल्कि आर्थिक सुधार पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा जो अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।”

नेपाल राष्ट्र बैंक के आंकड़ों के अनुसार बुधवार तक बैंक एवं वित्तीय संस्थानों की कुल जमा राशि 79 खरब 41 अरब रुपए हो गई है, जो देश के कुल घरेलू उत्पाद से 20 प्रतिशत अधिक है।

राष्ट्रीय तथ्यांक कार्यालय के अनुसार चालू वर्ष की जीडीपी 66 खरब रुपए अनुमानित है। अर्थव्यवस्था में अपेक्षित गति नहीं होने, रेमिटेंस और निर्यात में वृद्धि के कारण वित्तीय प्रणाली में जमा बढ़ा है, जिससे पैसों के वास्तविक मूल्य में कमी आई है।

बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में जमा राशि से मिलने वाली आमदनी अधिक तरलता के कारण कम हुई प्रतीत होती है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक ने दीर्घकालीन ऋणपत्र से लेकर अल्पकालीन स्थाई जमा सुविधा तक का उपयोग कर 10 खरब 9 अरब रुपए को नियंत्रण में रखा है।

वित्तीय क्षेत्र की कुल जमा राशि और कर्ज निवेश के आंकड़े बताते हैं कि कर्ज की मांग नहीं बढ़ पाई है। वर्तमान में बैंक एवं वित्तीय संस्थान औसतन 73.23 प्रतिशत कर्ज जमा अनुपात बनाए हुए हैं।

केंद्रीय बैंक को इस व्यवस्था के प्रबंधन पर वार्षिक रूप से भारी खर्च करना पड़ता है। पिछले वित्तीय वर्ष में तरलता प्रबंधन के लिए 10 अरब रुपए खर्च किए गए थे।

बैंक पुराने कर्ज की डिफ़ॉल्ट दर में वृद्धि होने के बावजूद नए कर्जों में सतर्क हैं, जिसकी वजह से निवेश अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पा रहा है। निवेश में सुस्ती के कारण वित्तीय प्रणाली में धन जमा हो रहा है। हालांकि आर्थिक गतिविधि में सुधार न होने पर भी जमा राशि लगातार बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक संकेत है।

चालू वर्ष के 22 वैशाख तक बैंक और वित्तीय संस्थाओं की कुल जमा राशि 79 खरब 45 अरब रुपए पहुंच गई है, लेकिन कुल कर्ज निवेश केवल 58 खरब 78 अरब रुपए ही है। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार वाणिज्यिक बैंकों की कुल जमा राशि 71 खरब 65 अरब और विकास बैंक तथा फाइनेंस कंपनियों की 7 खरब 81 अरब रुपए है।

इस आधार पर कर्ज की मांग में कमी स्पष्ट होती है। बैंक और वित्तीय संस्थानों का औसत कर्ज जमा अनुपात 73.23 प्रतिशत है, जिसे 90 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। चालू वर्ष के फागुन तक बैंक एवं वित्तीय संस्थानों से निजी क्षेत्र को प्रवाहित कर्ज में 4.4 प्रतिशत, अर्थात 2 खरब 43 अरब 54 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है।

समस्याग्रस्त सहकारीका प्रमुख ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक

समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिले आज १० वटा समस्याग्रस्त सहकारीका प्रमुख ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक गरेको छ। समितिले ती ऋणीहरूलाई यथाशीघ्र कार्यालयमा सम्पर्क गरी ऋण चुक्ता गर्न निर्देशन दिएको छ, नभए कानुन बमोजिम असुली प्रक्रिया अघि बढाइने बताइएको छ। समितिले अन्य समस्याग्रस्त सहकारीका प्रमुख ऋणीहरूको नाम क्रमशः सार्वजनिक गर्ने र तिनीहरूलाई ऋण बुझाउन आग्रह गर्ने जनाएको छ। २३ वैशाख, काठमाडौं।

समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिले समस्याग्रस्त सहकारीका प्रमुख ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक गर्ने काम थालनी गरेको छ। समितिका अनुसार आज समस्याग्रस्त घोषित १० वटा सहकारीका प्रमुख ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक गरिएको छ। अन्य समस्याग्रस्त सहकारीका ठूला ऋणीहरूको नाम क्रमशः सार्वजनिक गरिने समितिको जानकारी छ।

समितिले जारी गरेको सूचनामा सम्बन्धित ऋणीहरूलाई यथाशीघ्र कार्यालयमा सम्पर्क गरी ऋण चुक्ता गर्ने निर्देशन दिइएको छ। नभए कानुन बमोजिम करबाही गरिने स्पष्ट पारिएको छ। साथै आगामी दिनहरूमा अन्य ऋणीहरूको नामावली पनि सार्वजनिक गरिने भएकाले ती ऋणीहरूले पनि छिट्टै कार्यालयमा सम्पर्क गरी ऋण तिर्न आग्रह गरिएको छ।

समितिले आज घेदुङ बहुउद्देश्यीय सहकारी, हाम्रो सगरमाथा बहुउद्देश्यीय सहकारी, तपाई हाम्रो बहुउद्देश्यीय सहकारी, नागरिक कल्याण बहुउद्देश्यीय सहकारी, आइडियल यमुना बहुउद्देश्यीय सहकारी, तुलसी बहुउद्देश्यीय सहकारी, नेपाल वित्तीय सहकारी, ओरियन्टल कोअपरेटीभ सहकारी, गौतम श्री सहकारी र नेपाल सहकारी वित्तीयका प्रमुख ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक गरेको छ।

कानुनमन्त्रीसँग नेपालका लागि फ्रान्सकी राजदूतको भेटवार्ता

कानुन मन्त्रीसँग नेपालका लागि फ्रान्सकी राजदूत भिर्जिनि कोर्टेबलको भेट

२३ वैशाख, काठमाडौं । कानुन, न्याय तथा संसदीय मामिलामन्त्री सोबिता गौतमले नेपालका लागि फ्रान्सकी राजदूत भिर्जिनि कोर्टेबलसँग भेटवार्ता गरेकी छिन्। कानुन मन्त्री गौतमलाई भेट्न राजदूत कोर्टेबल बुधबार दिउँसो मन्त्रालय पुगेकी थिइन्। सो क्रममा राजदूत कोर्टेबलले मन्त्री गौतमलाई बधाइ तथा शुभकामना व्यहोरिन्। साथै, मन्त्रालयसँग सहकार्य गर्न सकिने विभिन्न विषयमा पनि व्यापक छलफल भएको मन्त्री गौतमले जनाइन्।